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बीजेपी में ‘बगावत’!

09 Feb 2019
वरिष्ठ नेताओं की ‘नाराजगी’ कहीं भाजपा पर पड़ ना जाए भारी
 

FEB 09 (WTN) – मध्य प्रदेश बीजेपी में बगावत होना शुरू हो गई है। जैसा कि आप जानते हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व केन्द्रीय मंत्री और शिवराज सरकार में मंत्री रहे सरताज सिंह ने पार्टी से बगावत कर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, तो वहीं विधानसभा चुनाव के दौरान खुद को या फ़िर अपनी बहू को टिकट ना मिलने की ख़बरों के बीच, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने भी पार्टी से बगावत की धमकी दी थी। हालांकि विधानसभा चुनाव में उनकी बहू को टिकट मिला तो गौर के बगावती तेवर कुछ कम हुए थे।
 
इधर सरताज सिंह और बाबूलाल गौर के अलावा कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी अब पार्टी के ख़िलाफ़ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। जैसा कि आप जानते हैं कि पूर्व सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता रामकृष्ण कुसमरिया ने कल ही भाजपा छोड़कर राहुल गांधी के सामने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। कसुमरिया काफ़ी समय से आरोप लगा रहे थे कि भाजपा में वरिष्ठ नेताओं की कद्र नहीं हो रही है। 

आपकी जानकारी के लिए बत दें कि कुसमरिया को इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा ने टिकट नही दिया था जिसके बाद उन्होंने दमोह और पथरिया सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। कहा जाता है कि उसी के बाद से कुसमारिया भाजपा नेतृत्व से नाराज़ चल रहे थे। कुछ दिनों पहले कुसमारिया ने बाबूलाल गौर से मुलाकात की थी जिसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि रामकृष्ण कुसमरिया कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं।
 
भाजपा का दावा है कि कुसमारिया के कांग्रेस में शामिल होने से पार्टी को कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन भाजपा नेतृत्व शायद भूल गया है कि विधानसभा चुनाव में दमोह सीट पर पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया की हार की बड़ी वजहों में एक वजह कुसमारिया का निर्दलीय चुनाव लड़ना भी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कांग्रेस पार्टी में शामिल होते समय रामकृष्ण कुसमारिया ने राहुल गांधी को एक चिट्ठी दी है। कहा जाता है कि इसी के बाद से राजनीतिक गलियारों में यह चिट्ठी चर्चा का विषय बनी हुई है। भाजपा नेताओं में चिंता है कि कहीं कुसमारिया की चिट्ठी भाजपा के लिए मुसीबत ना बन जाए।

इधर शिवराज सरकार में मंत्री रहीं कुसुम सिंह मेहदेले ने भी भाजपा से नाराज़गी जाहिर कर दी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विधानसभा चुनाव में पार्टी ने कुसम सिंह मेहदेले को टिकट नहीं दिया था जिसके बाद वे पार्टी से खफा बताई जाती हैं। पार्टी से नाराज चल रहीं कुसुम सिंह मेहदेले ने भाजपा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा है कि पार्टी को वरिष्ठजनों की उपेक्षा नहीं बल्कि उनका सम्मान करना चाहिए। इसे मेहदेले की नाराजगी कहें या फ़िर धमकी, उन्होंने पार्टी से मांग कर डाली है कि उन्हें या तो दमोह या खजुराहो लोकसभा सीट से टिकट दिया जाए या फ़िर कहीं का राज्यपाल बनाया जाए।

भाजपा से पहले सरताज सिंह अलग हुए और अब रामकृष्ण कुसमारिया ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है, तो वहीं बाबूलाल गौर के बाद अब कुसुम सिंह मेहदेले के बयानों में बगावत के सुर दिखाई दे रहे हैं। राजनीति के जानकारों के कहना है कि इस तरह की बयानबाजी प्रेशर पॉलिटिक्स कहलाती है और चुनाव के समय टिकट के लिए इस तरह की प्रेशर पॉलिटिक्स लगभग हर पार्टी में होती रहती है। वहीं जानकारों का कहना है कि सरताज सिंह को छोड़ दिया जाए तो रामकृष्ण कुसमारिया जैसे नेताओं के पार्टी छोड़ने से भाजपा को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।
 
खैर जानकार कुछ भी कहें लेकिन इतना तो सच है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा पार्टी छोड़ना और बगावती सुर अलापना कहीं से भी भाजपा के लिए लोकसभा चुनाव की दृष्टि से सही नहीं है। यह सच है कि पार्टी किसी भी नेता से बड़ी होती है लेकिन पार्टी भी जनाधार वाले नेताओं से ही बनती है। भाजपा को सचेत रहने की जरूरत है क्योंकि कहीं ऐसा ना हो कि पार्टी के यही बगावती तेवर अख्तियार करने वाले नेता पार्टी के लिए हार का कारण बन जाएं।