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लोकसभा चुनाव के लिए मध्य प्रदेश में भी हुआ सपा और बसपा के बीच ‘गठबंधन’

11 Feb 2019
भाजपा और कांग्रेस को ‘टक्कर’ देने सपा और बसपा मध्य प्रदेश में भी आईं ‘साथ-साथ’

FEB 11 (WTN) – कांग्रेस समेत बसपा और समाजवादी पार्टी जानती हैं कि लोकसभा चुनाव में वे अपने दम पर इस समय नरेन्द्र मोदी को शिकस्त देने की स्थिति में नहीं हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि लोकसभा में सीटों के हिसाब से सबसे बड़े राज्य यूपी में भाजपा को रोकने के लिए धुर विरोधी पार्टियों बसपा और समाजवादी पार्टी ने 38-38 सीटों पर गठबंधन कर लिया है। यूपी के बाद अब मध्य प्रदेश में भी दोनों ही पार्टियां भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए लोकसभा चुनाव में गठबंधन करने जा रही हैं।
 
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीतने वाली बसपा और सिर्फ़ पांच सीटों पर सिमटी सपा ने मोदी लहर से निपटने के लिए यूपी के बाद अब मध्य प्रदेश में भी गठबंधन कर लिया है। जानकारी के मुताबिक़, मध्य प्रदेश की सभी 29 सीटों पर दोनों पार्टियां गठबंधन के साथ चुनाव लड़ेंगी। मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से समाजवादी पार्टी तीन सीटों पर तो बसपा 26 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
 
जानकारी के मुताबिक़ मध्य प्रदेश में बसपा-सपा गठबंधन का निर्णय दोनों ही पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व ने लिया है। प्रदेश की तीन सीटों टीकमगढ़, खजुराहो और बालाघाट सीट पर समाजवादी पार्टी अपने प्रत्याशी उतारेगी, वहीं बसपा बाकी बची राज्य की 26 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जानकारी के मुताबिक़ बसपा ने मुरैना लोकसभा सीट से पूर्व सांसद राम लखन सिंह कुशवाहा को टिकट दिया है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश के यूपी से लगे ज़िलों में बसपा और सपा दोनों ही पार्टियों का बढ़िया जनाधार है। समय-समय पर विधानसभा चुनाव में दोनों ही पार्टियां कुछ सीटों पर जीत हासिल करती रही हैं। मध्य प्रदेश में विगत दिनों हुए विधानसभा चुनाव में बसपा ने दो तो सपा ने एक सीट पर जीत हासिल की थी, और बसपा और सपा विधायकों के समर्थन पर ही कमलनाथ सरकार को विश्वासमत हासिल है।
 
यदि इतिहास पर नज़र डाली जाए तो मध्य प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच ही हमेशा से ही लोकसभा चुनाव में सीधा मुकाबला रहा है। कुछ एक लोकसभा चुनाव में बसपा और सपा एक या दो सीटों को जीतने में कामयाब रही हैं, लेकिन कोई बड़ी टक्कर ये दोनों ही पार्टियां कांग्रेस और भाजपा को नहीं दे सकी हैं। पिछले लोकसभा चुनाव की बात करें तो सपा और बसपा दोनों ही पार्टियों को मध्य प्रदेश में बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था।

लेकिन इस लोकसभा चुनाव से पहले ये दोनों ही पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ती थीं और इस बार दोनों मिलकर चुनाव लड़ने जा रही हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि एन्टी भाजपा और एन्टी कांग्रेस वोट सपा-बसपा गठबंधन के रूप में एकजुट होने जा रहा है जिसका कुछ ना कुछ नुकसान भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों को उठाना पड़ सकता है। अब देखना होगा कि सपा-बसपा गठबंधन से भाजपा और कांग्रेस को कितना नुकसान उठाना पड़ सकता है, या फ़िर हो सकता है कि यह गठबंधन कुछ खास असर ना दिखा सके।