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जानिए क्या है एफ़एटीफ़ जिसके जरिये भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर करेगा पाकिस्तान को बेनकाब?

18 Feb 2019
मोदी सरकार की ‘कूटनीति’ के चलते अब तबाह होगी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था

FEB 18 (WTN) – सीआरपीएफ़ जवानों पर पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार पाकिस्तान को कूटनीति के तहत चारों तरफ़ से घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस लेने और पाकिस्तान से आयातित सामान पर आयात शुल्क 200 प्रतिशत करने के बाद अब मोदी सरकार एफ़एटीएफ़ यानि कि फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ डॉज़ियर सौंपने की तैयारी कर रही है ताकि पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान बेनकाब हो सके।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एफ़एटीएफ़ संस्था अंतर्राष्ट्रीयस्तर पर आतंकी फंडिंग की मॉनिटरिंग का काम करती है। मोदी सरकार अब एफ़एटीएफ़ को डॉज़ियर सौंप कर पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट कराने की तैयारी में है। पुलवामा में सीआरपीएफ़ जवानों पर जैश-ए-मोहम्मद के फिदायीन हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरे साक्ष्य इकट्ठा कर रही हैं, ताकि एफ़एटीएफ़ में पाकिस्तान के आतंकियों के साथ सम्बन्धों को पूरी दुनिया के सामने बेनकाब किया जा सके। जैसा कि आप जानते हैं कि जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान समर्थित और पोषित आतंकी संगठन है और इसका प्रमुख मौलाना मसूद अज़हर है जो कि पाक अधिकृत कश्मीर में रहता है।

एफ़एटीएफ़ में पेश किये जाने वाले डॉज़ियर में भारत सरकार जैश के पाकिस्तान के साथ सम्बन्धों को पूरी दुनिया के सामने उजागर करेगी और बताएगी कि किस तरह से पाकिस्तान सरकार आतंकी संगठनों को मदद करती रही है। साथ ही इस डॉज़ियर में यह जानकारी भी होगी कि आईएसआई समेत तमाम पाकिस्तानी एजेंसियां किस तरह से जैश-ए-मोहम्मद की मदद करती रही हैं।

भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत किये जाने वाले इस डॉज़ियर में जैश द्वारा किये गये पिछले हमलों की पूरी जानकारी दी जाएगी। एफ़एटीएफ़ की बैठक में भारत सरकार पूरी कोशिश करेगी कि एफ़एटीएफ़ पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट में डाले। 17 से 22 अप्रैल तक पेरिस स्थित इस वैश्विक आर्थिक संगठन की बैठक होने जा रही है जिसमें कई देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि पाकिस्तान एफ़एटीएफ़ में ब्लैकलिस्टेड होता है तो इसका मतलब यह होगा कि पूरी दुनिया के सामने यह साबित हो जाएगा कि पाकिस्तान आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में सहयोग नहीं कर रहा है। एफ़एटीएफ़ के नियमों के अनुसार यदि कोई देश आतंकी फंडिंग करता है या फ़िर मनी लॉन्ड्रिंग के नियमों का उल्लंघन करता है तो उस देश को ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाएगा। फिलहाल इस संस्था में 35 देश और दो क्षेत्रीय संगठन-यूरोपियन कमीशन और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल शामिल हैं।
 
ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देश पहले से ही एफ़एटीएफ़ की ब्लैक लिस्ट में शामिल हैं। अब यदि पाकिस्तान भी इसमें शामिल हो जाता है तो वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ, ईयू, एडीबी, एसएंडपी, मूडी और फिच जैसी आर्थिक संस्थाएं पाकिस्तान के साथ होने वाले व्यापार को खतरनाक सूची में डाल देंगी। यदि पाकिस्तान एफ़एटीएफ़ की ब्लैकलिस्ट में शामिल होता है तो बहुपक्षीय कर्जदाता संस्थाएं पाकिस्तान की ग्रेडिंग को कम कर सकती हैं, इतना ही नहीं क्रेडिट एजेंसियां उसकी रेटिंग भी कम कर सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो पहले से ही खस्ता हालत में चल रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल जुलाई में एफ़एटीएफ़ पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल चुका है।