बसपा और सपा ने यूपी के बाद मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस को किया ‘किनारे’!
FEB 25 (WTN) – यूपी के बाद अब मध्य प्रदेश में भी बसपा और सपा ने कांग्रेस को किनारे करते हुए लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन कर लिया है। बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती और समजावादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक साथ मिलकर मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। दोनों ही पार्टियों ने बाकायदा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मध्य प्रदेश में साथ मिलकर चुनाव लड़ने की जानकारी दी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश में लोकसभा की 29 सीटें हैं और इन सभी सीटों पर बसपा-सपा गठबंधन चुनाव लड़ेगा। राज्य की 26 सीटों पर बसपा और 3 सीटों पर समाजवादी पार्टी चुनाव लड़ेगी। यूपी में जहां दोनों ही पार्टियां लगभग बराबर सीटों पर चुनाव लड़ रहीं हैं लेकिन मध्य प्रदेश में बसपा, सपा से 23 अधिक सीटों पर चुनाव लड़ रही है। ऐसे में साफ़ जाहिर है कि मध्य प्रदेश में 29 में से 26 सीटों पर चुनाव लड़कर बसपा बढ़े भाई की भूमिका में नजर आएगी।
जानकारी के मुताबिक़ समाजवादी पार्टी बुन्देलखण्ड क्षेत्र की दो सीटों टीकमगढ़ और खजुराहो के अलावा महाकौशल की बालाघाट सीट से भी चुनाव लड़ेगी। वहीं राज्य की बाकी बचीं 26 सीटों पर बसपा गठबंधन के तहत चुनाव लड़ेगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश के यूपी से लगे जिलों में बसपा और सपा दोनों ही पार्टियों का अच्छा जनाधार है। हाल के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बसपा और सपा वैसे तो अपना पुराना प्रदर्शन नहीं दोहरा पाई हैं, लेकिन फ़िर भी मध्य प्रदेश में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाने के बाद भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए बसपा के दो और सपा के एक विधायक ने कांग्रेस सरकार को समर्थन दिया है।
पिछले लोकसभा चुनाव की बात करें तों 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा और सपा दोनों ही पार्टियों को मध्य प्रदेश में एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हो सकी थी। मध्य प्रदेश की 29 सीटों में से 27 सीटों पर भाजपा तो सिर्फ़ 2 सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। वहीं 2009 के लोकसभा चुनाव में जरूर बसपा एक सीट जीतने में कामयाब रही थी। इससे पहले 2004 के लोकसभा चुनाव में भी बसपा और सपा को मध्य प्रदेश से निराशा हाथ लगी थी।
अब देखना होगा कि मध्य प्रदेश में गठबंधन के बाद बसपा और सपा को कितना फायदा मिलता है और भाजपा और कांग्रेस जैसी मजबूत पार्टियों के बीच इनका प्रदर्शन कैसा रहता है? लेकिन लोकसभा चुनाव में इन दोनों ही पार्टियों के गठबंधन पर सवाल उठना लाजिमी है, क्योंकि जब दोनों पार्टियों ने राज्य में भाजपा को सरकार बनाने से दूर रखने के लिए कांग्रेस को समर्थन दिया है तो फ़िर लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराने के लिए क्यों नहीं दोनों ही पार्टियों ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया?