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मोदी सरकार के फ़ैसले से ‘सस्ती’ हुईं कैंसर और डायबिटीज की कई दवाइयां

28 Feb 2019
आम जनता के ‘फायदे’ के लिए मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाई गईं 78 दवाइयां

FEB 28 (WTN) – देश की गरीब जनता के हित को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 78 दवाएं सस्ती की हैं। सरकार के इस कदम से कैंसर, डायबिटीज, संक्रमण और अस्थमा जैसी कई बीमारियों की दवाएं सस्ती हो जाएंगी। जानकारी के मुताबिक़, मोदी सरकार ने कैंसर के इलाज में काम आने वाली 43 गैर-अनुसूचित दवाओं को मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाने का निर्णय लिया है साथ ही इसमें व्यापार मार्जिन 30 प्रतिशत पर रखा गया है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एनपीपीए यानि कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने कीमत नियंत्रण आदेश, 2013 के पैरा 19 के अंतर्गत जनहित में असाधारण शक्तियों का उपयोग कर कैंसर के इलाज में उपयोग की जाने वाली 42 गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं को व्यापार मार्जिन युक्तिसंगत बनाकर उन्हें मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाने का निर्णय लिया है।
 
जानकारी के मुताबिक़, मूल्य नियंत्रण होने से 105 ब्रांड की दवाओं की एमआरपी में करीब 85 प्रतिशत की कमी आएगी और इसका पूरा फायदा ग्राहकों को मिलेगा। फिलहाल अनुसूचित श्रेणी के तहत कैंसर के इलाज में उपयोग में लाए जाने वाली 57 दवाएं कीमत नियंत्रण दायरे में हैं।
 
वहीं एनपीपीए ने मधुमेह यानि कि डायबिटीज, कैंसर, अस्थमा और संक्रमण समेत अन्य बीमारियों के इलाज में उपयोग में लाए जाने वाली 36 दवाओं की कीमतें तय की हैं। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने अपनी अधिसूचना में कहा कि उसने 22 दवाओं की एमआरपी तय की हैं और 14 की उच्च कीमतों को संशोधित किया है।
 
जिन दवाओं की कीमतों को संशोधित किया गया है, उसमें अस्थमा के इलाज में प्रयोग में लाई जाने वाली बुडेसोनाइड इनहेलेशन और कीटाणुओं के संक्रमण के इलाज के लिए उपयोग में लाए जाने वाले जेंटामाइसिन इंजेक्शन शामिल हैं। वहीं ग्लिकलाजाइड टैबलेट (डायबिटीज टाइप 2 के इलाज के लिये) और कैंसर के इलाज के लिए उपयोगी ट्रास्टुजुमाब इंजेक्शन को भी मूल्य नियंत्रण में शामिल किया गया है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एनपीपीए का गठन साल 1997 में हुआ था। यह औषधि (कीमत नियंत्रण) आदेश, 2013 के तहत अनुसूची-एक के अंतर्गत आने वाली जरूरी दवाओं की खुदरा कीमतें तय करता है। इतना ही नहीं यह गैर-सूचीबद्ध दवाओं के दाम में हर साल होने वाली बढ़ोतरी पर भी नज़र रखता है।