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वो ‘पुख्ता सबूत’ जो साबित करते हैं बालाकोट में भारतीय वायुसेना की 'सफल' एयर स्ट्राइक को

06 Mar 2019
बड़ा सवाल: क्या मोदी सरकार सार्वजनिक करेगी एयर स्ट्राइक से जुड़े ‘सबूत’?

MAR 06 (WTN) -  क्या मोदी सरकार बालाकोट में स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी अड्डों पर हुई एयर स्ट्राइक के सबूत जल्द देश की जनता के सामने पेश करने वाली है? हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि भारतीय वायुसेना ने मोदी सरकार को एयर स्ट्राइक से जुड़ी ‘तस्वीरों’ के सभी ‘सबूत’ सौंप दिए हैं। सूत्रों के अनुसार इन तस्वीरों में यह बताया गया है कि किस तरह वायुसेना के आतंकी अड्डों पर अधिकतर निशाने ‘सही’ लगे हैं।
 
सूत्रों के अनुसार वायुसेना ने सरकार को 12 पेज की एक रिपोर्ट सौंपी है, इसमें वायुसेना ने बालाकोट के उस क्षेत्र की हाई रिजोल्यूलेशन तस्वीरें भी साझा की हैं जहां पर उसने एयर अटैक किया था। कहा जा रहा है कि वायुसेना की रिपोर्ट के अनुसार बालाकोट में उसके 80 प्रतिशत निशाने ‘सही’ लगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वायुसेना ने जिन बमों को मिराज विमान से दागा था वे वहां मौजूद बिल्डिंगों के सीधे ‘अंदर’ गए हैं और यही कारण है कि जो भी ‘तबाही’ हुई है वह अंदर ही हुई है।
 
रिपोर्ट के अनुसार एयर स्ट्राइक में जिन मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ था उन्होंने आतंकी अड्डों की छतों को ‘सीधे भेदा’ और अपने टारगेट पर वार किया। सूत्रों के मुताबिक एयरफोर्स की इस रिपोर्ट के अनुसार बालाकोट में जिस समय ये एयर स्ट्राइक की गई थी तो वहां पर मौजूद सभी टारगेट को ‘तबाह’ कर दिया गया।
 
लेकिन भारत में राजनीति के कारण 26 फरवरी को भारत द्वारा की गई एयर स्ट्राइक के बाद से ही इस पर विपक्षी दल मोदी सरकार से मांग कर रहे हैं कि इसके ‘सबूत’ पेश किये जाएं। इधर वायुसेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा साफ़ कहा था कि उनका मिशन पूरी तरह से ‘सफल’ रहा है और सबूतों को जनता के सामने रखने का ‘फ़ैसला’ सरकार को करना है।
 
पर पिछले कुछ दिनों से ऐसी बातें सामने जरूर आईं हैं जो यह गवाही देती हैं कि भारतीय वायुसेना की एयर स्ट्राइक से बालाकोट में आतंकियों के अड्डे ‘तबाह’ जरूर हुए हैं। NTRO यानि कि नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन के सर्विलांस से पता चलता है कि जब बालाकोट में भारतीय वायुसेना ने एयर स्ट्राइक की तो उस समय वहां पर 280 से ज्यादा मोबाइल सक्रिय थे।
 
वहीं बालाकोट में जिस जगह पर भारतीय वायुसेना ने कार्रवाई की थी वहां पर जैश-ए-मोहम्मद का मदरसा था। मदरसा तालीम-उल-कुरान के छात्र ने इस बात की पुष्टि भी की थी कि उसने 26 फरवरी की सुबह वहां पर ‘धमाके’ सुने थे, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने उन्हें ‘सुरक्षित’ स्थानों पर पहुंचा दिया था। वहीं कुछ पाकिस्तानी यूजर्स ने ट्विटर पर लिखा था कि 26 फरवरी के बाद उन्होंने बालाकोट में 10 ‘एम्बुलेंस’ देखी थीं।
 
इधर, न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स ने भी बड़ा ‘दावा’ किया था कि वहां रहने वाले कई लोगों ने इस बात की पुष्टि की थी कि उस मदरसे में जैश का आतंकी अड्डा है और भारतीय वायुसेना ने उसे ‘निशाना’ बनाया था। पाकिस्तान का झूठ एक बार फ़िर सबके सामने खुल गया जब पाकिस्तानी सेना ने एयर स्ट्राइक के ठीक बाद वर्ल्ड मीडिया को बालाकोट ले जाने की बात कही थी, लेकिन पाकिस्तान की सरकार वर्ल्ड मीडिया को ‘तुरन्त’ वहां नहीं ले गई बल्कि एक दिन के बाद उन्हें वहां पर ले गई और उन्हें मदरसे से काफ़ी ‘दूर’ रखा गया। साफ जाहिर होता है कि एक दिन बाद मीडिया को वहां ले जाने का मतलब था कि तब तक आतंकियों की लाशों को पाकिस्तानी सेना ने ‘ठिकाने’ लगा दिया होगा।

वहीं बालाकोट में हुई एयर स्ट्राइक के बाद जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर का एक ऑडियो भी सामने आया था जिसमें उसने इस बात को कबूल किया था कि भारत के हवाई हमले में उनका एक बड़ा अड्डा तबाह हुआ है। इन सभी दावों और सबूतों पर यदि गौर किया जाए तो साफ़ जाहिर होता है कि भारतीय वासुसेना द्वारा की गई एयर स्ट्राइक में आतंकी अड्डे तो नष्ट हुए हैं साथ ही बड़ी तादात में आतंकी मारे गये हैं और घायल हुए हैं। अब देखना होगा कि मोदी सरकार वायुसेना द्वारा दिये गये एयर स्ट्राइक के सबूतों को सार्वजनिक कब तक करती है।