MAR 14 (WTN) – अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवाद और आतंकवादियों को समर्थन देते हुए चीन ने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किये जाने की भारत समेत कुछ अन्य देशों की कोशिशों पर पानी फेरने का काम किया है। भारत का पड़ोसी देश चीन एक बार फिर से आतंकी मौलाना मसूद अजहर के साथ 'खड़ा' हो गया है। संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा समिति की बैठक में चीन ने अपने वीटो पावर का इस्तेमाल कर भारत को 'झटका' देते हुए मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने की भारत की कोशिशों पर 'अड़ंगा' लगा दिया है।

आतंक के साथ खड़े दिखाई दे रहे चीन के इस कदम के बाद भारत ने 'कठोर आपत्ति' दर्ज कराई है और इसमें भारत को अमेरिका का साथ मिला है। चीन की नापाक हरकत के बाद अमेरिका की ओर से यूएनएससी में 'कड़ा विरोध' दर्ज कराया गया है। अमेरिका ने चीन को 'चेतावनी' देते हुए कहा है कि अगर चीन मसूद अजहर समेत अन्य आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में लगातार इस तरह की अड़चन बनता रहा, तो जिम्मेदार देशों को कोई और कदम भी उठाने पड़ सकते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन ने चौथी बार मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के भारत के प्रयासों को 'बाधित' किया है। भारत के साथ खड़े अमेरिका ने चीन के कदम की निन्दा करते हुए कहा कि चीन का यह कदम आतंकवाद के खिलाफ लड़ने और दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के उसके खुद के बताए लक्ष्यों के 'विपरीत' है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ‘‘1267 अल कायदा सैंक्शन्स कमेटी’’ के तहत मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव पिछले महीने की 27 तारीख को पेश किया था।

वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का 1267 संकल्प आखिर है क्या? 15 अक्टूबर 1999 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस संकल्प को 'सर्वसहमति' से अपनाया था। उस समय तालिबान, अलकायदा और दुनिया भर में फैले बाकी आतंकी संगठनों के आतंकवादियों को 'प्रतिबंधित' करने के लिए उन्हें सूचीबद्ध किया गया था। इस प्रस्ताव के तहत सुरक्षा परिषद किसी आतंकवादी को या आतंकी संगठन को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी या आतंकवादी संगठन घोषित कर सकता है और उस पर 'व्यापक प्रतिबंध' लगाया जा सकता है।

संकल्प 1267 के तहत कई आतंकियों को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जा चुका है लेकिन इसका समय-समय पर पाकिस्तान ने विरोध किया है। इतना ही नहीं, 'भारत विरोधी' होने के कारण चीन ने हमेशा से ही पाकिस्तान का समर्थन किया है। चीन 'योजनाबद्ध' तरीके से संकल्प 1267 का विरोध भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोकने के लिए करता रहता है। इतना ही नहीं, चीन हमेशा से ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का विरोध करता रहा है। वहीं चीन भारत के एनएसजी (राष्ट्रीय सुरक्षा समूह) में शामिल होने पर भी हमेशा अड़ंगा डालता आया है, जबकि इस मामले में भारत को दुनियाभर के ज्यादातर देशों का समर्थन हासिल है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह पहली बार नहीं है कि भारत के विरोध में चीन ने आतंकियों का साथ दिया है। इससे पहले जब पुलवामा आतंकी हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस हमले की निंदा की थी तो उस समय भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा पुलवामा आतंकी हमले को लेकर जैश-ए-मोहम्मद का नाम लिये जाने पर चीन ने 'अड़ंगा' लगाया था। उस समय चीन ने मांग की थी कि पुलवामा हमले से आतंकी संगठन जैश का नाम हटाया जाए।

चीन को यह याद रखना चाहिए कि आतंकियों का समर्थन उसके लिए भी हितकारी नहीं है। भारत विरोध में और पाकिस्तान को समर्थन देने की 'कूटनीति' के तहत चीन जिस तरह से पाकिस्तान की हर गलत गतिविधि का समर्थन करते हुए आतंकियों का समर्थन करता है, उससे साफ़ जाहिर होता है कि चीन का एकमात्र मकसद हर स्तर पर भारत का विरोध करना है। जिस तरह से चीन ने आतंकी मसूद अजहर के लिए हमदर्दी दिखाई है उससे साफ जाहिर होता है कि चीन के लिए भारत विरोध ज्यादा जरूरी है बजाय सच के साथ खड़े होने के।