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जानिए कैसे मोदी सरकार ने आर्थिक मोर्चे पर आलोचकों को दिया करारा जवाब?

23 Mar 2019
चुनौतीपूर्ण हालात और बाज़ार में जारी उतार चढ़ाव के बीच मोदी सरकार ने हासिल किया विनिवेश का लक्ष्य

MAR 23 (WTN) – आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार को एक और कामयाबी हासिल हुई है और उसने इस तरह अपने आलोचकों को करारा जवाब दिया है। जानकारी के मुताबिक़, मोदी सरकार ने अपनी आर्थिक नीतियों का कारण विनिवेश लक्ष्य को हासिल कर लिया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष (2018-19) में अब तक विनिवेश के जरिए 85,000 करोड़ रुपये जुटाए गये हैं, जो कि लक्ष्य से 5,000 करोड़ रुपये ज़्यादा हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मोदी सरकार ने सीपीएसई ईटीएफ की पांचवीं किस्त से 9,500 करोड़ रुपये, और आरईसी-पीएफसी सौदे से 14,500 करोड़ रुपये जुटाए हैं। 28 फरवरी तक केन्द्र सरकार को विनिवेश से 56,473.32 करोड़ रुपये मिले थे। मार्च में आरईसी-पीएफसी सौदे के साथ ही साथ सीपीएसई ईटीएफ की पांचवीं किस्त के अलावा ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन में रणनीतिक बिक्री से 1,000 करोड़ रुपये सरकार को मिले हैं। वहीं, शत्रु के शेयरों की बिक्री से करीब 2,000 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई है। इतना ही नहीं, सरकार इसी महीने मझगांव डॉक्स और एमएसटीसी के आईपीओ भी लाई थी।
 
प्रधानमंत्री मोदी के करीबी वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने विनिवेश के सम्बन्ध में अपने ट्विट में लिखा, "80,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य के मुकाबले, इस साल 85,000 करोड़ रुपये हासिल किए है। साल 2017-18 में बजट लक्ष्य 72,500 करोड़ रुपये के मुकाबले, रिकॉर्ड 1 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश हासिल किया गया था। इनमें से ज़्यादातर रकम, ओएनजीसी द्वारा हिंदुस्तान पेट्रोलियम के अधिग्रहण से हासिल हुई थी।"
 
पर आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रेटिंग एजेंसियों और कई आर्थिक विश्लेषकों ने चुनौतीपूर्ण हालात, और बाज़ार में जारी उतार-चढ़ाव का हवाला देते हुए, मौजूदा वित्त वर्ष के लिए तय किए गए विनिवेश लक्ष्य के चूकने की आशंका जाहिर की थी। वहीं रेटिंग एजेंसी केयर रेटिंग्स ने तो अपनी रिपोर्ट में विनिवेश के जरिए सिर्फ़ 60,000 करोड़ रुपये मिलने की बात कही थी। लेकिन मोदी सरकार ने अपनी योजनाबद्ध आर्थिक नीतियों के कारण विनिवेश के लक्ष्य से ज़्यादा पैसा हासिल कर लिया।
 
इस वित्त वर्ष में सरकार के विनिवेश के लक्ष्य पर जानकारों को संशय इसलिए था, क्योंकि मोदी सरकार वित्त वर्ष 2014 से 2017 के बीच, विनिवेश लक्ष्य की सिर्फ़ 65 प्रतिशत रकम ही जुटाने में कामयाब रही थी। साल 2014 में तो सरकार लक्ष्य के मुक़ाबले सिर्फ़ 53 प्रतिशत रकम ही जुटा पाई थी। हालांकि, वित्त वर्ष 2018 में सरकार ने तय लक्ष्य 72,500 करोड़ रुपये के मुक़ाबले, क़रीब 1 लाख करोड़ रुपये की राशि जुटाई थी।
 
दरअसल विनिवेश की शुरुआत, आर्थिक उदारीकरण प्रक्रिया के बाद सामने आई है, जिसके बाद सरकार ने घाटे वाली कम्पनियों में प्राइवेट कम्पनियों की हिस्सेदारी बढ़ाना शुरू कर दी। विनिवेश की प्रकिया निवेश की प्रक्रिया से उलटी होती है। निवेश का मतलब होता है किसी कारोबार, संस्था या परियोजना में पैसा लगाना, और विनिवेश का मतलब होता है निवेश की गई रकम को वापस निकालना। सरकारी कम्पनियों में सरकारी हिस्‍सेदारी को बेचने की प्रक्रिया ही विनिवेश कहलाती है।