MAR 28 (WTN) – अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं, तो यह ख़बर आपके काम की है। सेबी यानि कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने साफ़ कर दिया है कि एक अप्रैल से सूचीबद्ध कम्पनियों के शेयर्स का हस्तांतरण केवल डीमैट (डीमैटेरियलाइज्ड) रूप में ही किया जा सकेगा। हालांकि, सेबी ने साफ़ किया कि निवेशकों पर भौतिक रूप में शेयर रखने पर पाबंदी नहीं होगी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सेबी ने दिसम्बर, 2018 में सूचीबद्ध कम्पनियों के शेयर्स को केवल डीमैट रूप में ही हस्तांतरित करने के लिये समय सीमा को बढ़ाकर एक अप्रैल कर दिया था, पर अब इस समय सीमा को आगे नहीं बढ़ाने का फ़ैसला सेबी ने ले लिया है। वैसे शेयर्स को अनिवार्य रूप से डीमैट रूप में हस्तांतरण का फ़ैसला मार्च, 2018 में लिया गया था।

वैसे आप जानने चाहेंगे कि सेबी ने ऐसा फ़ैसला क्यों लिया है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि डीमैट रूप में शेयरों को रखे जाने से कम्पनियों में शेयरधारिता के रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाये रखा जा सकेगा। हालांकि सेबी ने साफ़ किया कि निवेशकों के अपने पास शेयरों को भौतिक रूप में रखने पर किसी भी तरह की कोई भी पाबंदी नहीं होगी।

वहीं यदि अगर कोई निवेशक भौतिक रूप में रखे शेयरों को हस्तांतरित करना चाहता है, तो एक अप्रैल 2019 के बाद, ऐसे शेयर्स के डीमैट रूप में होने के बाद ही उन्हें हस्तांतरित किया जा सकेगा। वहीं हमारी आपको सलाह है कि यदि आपके पास भौतिक तौर पर कागज के रूप में कोई पुराने शेयर रखें है, तो उनको तुरन्त डीमैट करवा लें।

क्योंकि यदि अगर ये शेयर्स इलेक्ट्रॉनिक रूप में नहीं हुए, तो ये आपके नाम से नहीं होंगे और आप ये शेयर रख तो पाएंगे, लेकिन आप इन शेयर्स को ट्रांसफर नहीं कर पाएंगे। शेयर बाजार के जानकारों के मुताबिक़, शेयर डीमैट फॉर्म में ही रखना ज्यादा बेहतर होता है क्योंकि इससे आप आसानी से उन्हें ट्रैक कर सकते हैं।