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तो व्हाट्सएप पर इस तरह पता कीजिए फेक न्यूज़!

03 Apr 2019
लोकसभा चुनाव में संदेशों की प्रामाणिकता के लिए व्हाट्सएप की नई पहल

APR 03 (WTN) – दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में होने जा रहे लोकसभा चुनाव में फ़र्जी ख़बरों से निपटने के लिए व्हाट्सएप ने एक नया चेकप्वाइंट लॉन्च किया है। इसकी सहायता से यूजर्स यह पता कर सकेंगे कि जो ख़बर उनके पास व्हाट्सएप के जरिये आई है उसमें कितनी सत्यता है।



व्हाट्सएप ने यूजर्स की सहायता के लिए ‘चेकप्वाइंट टिपलाइन’ लॉन्च किया है, इसके माध्यम से यूजर्स उन्हें व्हाट्सएप के जरिये मिलने वाली जानकारी की प्रमाणिकता को जांच सकेंगे। व्हाट्सएप की मालिकाना कम्पनी फेसबुक के मुताबिक़, इस सेवा को भारत के एक मीडिया कौशल स्टार्टअप ‘प्रोटो’ ने यूजर्स की सहायता के लिए पेश किया है।

 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह टिपलाइन ग़लत जानकारियों और अफवाहों का डाटाबेस तैयार करने में मदद करेगी, और इससे चुनाव के दौरान ‘चेकप्वाइंट’ के लिए इन जानकारियों का अध्ययन किया जा सकेगा। इस बारे में फेसबुक का कहना है कि चेकप्वाइंट एक रिसर्च प्रोजेक्ट के तौर पर चालू किया गया है, जिसमें व्हाट्सएप की ओर से तकनीकी सहयोग दिया जा रहा है।

 

यदि आपको किसी भी तरह की ग़लत जानकारी या अफवाह मिलती है, तो आप व्हाट्सएप के नम्बर +91-9643-000-888 पर चेकप्वाइंट टिपलाइन को इसे भेज सकते हैं। जैसे ही कोई यूजर टिपलाइन को किसी भी सूचना का मैसेज करेगा, तब प्रोटो अपने प्रमाणन केन्द्र के द्वारा जानकारी के सही या ग़लत होने की पुष्टि करने के बाद उसकी सूचना यूजर को देगा।

 

प्रोटो के द्वारा मिली पुष्टि से यूजर को यह पता चल जाएगा कि उसे मिला संदेश सही है या ग़लत। व्हाट्सएप का दावा है कि प्रोटो का प्रमाणन केन्द्र तस्वीर, वीडियो और लिखित संदेश की पुष्टि करने में सक्षम है, और इसकी सहायता से ख़बर की पूरी प्रामाणिकता की जानकारी हासिल की जा सकती है।



जिस तरह से लोकसभा चुनाव में किसी भी तरह की अफवाहों और ग़लत ख़बरों की प्रामाणिकता की पुष्टि का दावा व्हाट्सएप द्वारा किया गया है, उसके आधार पर कहा जा सकता है कि ग़लत ख़बरों की जानकारी व्हाट्सएप द्वारा प्रदान की जा रही इस सुविधा से पता लगाई जा सकती है। व्हाट्सएप के मुताबिक़, अंग्रेजी, हिन्दी, तेलुगू, बांग्ला और मलयालम भाषा के संदेशों की पुष्टि प्रोटो के प्रमाणन केन्द्र द्वारा की जा सकेगी। अब देखते हैं कि व्हाट्सएप की इस सुविधा का कितना उपयोग भारत में लोग करते हैं, और इसके द्वारा अफवाहों और ग़लत ख़बरों की प्रमाणिकता का कितना सही पता लगाया जा सकेगा।