APR 04 (WTN) – यदि आप ज़रूरत से ज़्यादा स्मार्ट फ़ोन का प्रयोग करते हैं तो ज़रा सावधान रहें। क्योंकि जो समय आपको आराम करने या सोने के लिए मिलता है उसमें यदि आप मोबाइल फ़ोन का ज़्यादा करते हैं, तो इससे आपके जीवन में नकारात्मकता आ सकती है।

'कंप्यूटर्स इन ह्यूमन बिहेवियर' नामक पत्रिका में छपी एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, स्मार्टफोन के ज़्यादा प्रयोग से जीवन में नकारात्मक भावनाओं में वृद्धि होती है। इसके साथ ही ज़्यादा स्मार्टफ़ोन के प्रयोग से जीवन में उद्देश्य की भावना भी प्रभावित हो सकती है, जिससे जीवन में नीरसता और निराशा आने लगती है।

कहा जा रहा है कि शायद यह पहला ऐसा रिसर्च है जिसमें इस बात का गहराई से मूल्यांकन किया गया है कि स्मार्ट फ़ोन का उपयोग जीवन में संतुष्टि और मनोवैज्ञानिक पहलुओं से जुड़ा हुआ है। ऑस्ट्रेलिया केी डीकिन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का इस बारे में कहना है कि आदतन और मनोरंजन के लिए स्मार्टफोन का उपयोग करने वाले लोगों के जीवन में संतुष्टि की कमी रहती है।

रिसर्च में 500 से ज़्यादा विद्यार्थियों को शामिल किया गया और उसमें पाया गया कि स्मार्टफ़ोन के अधिक प्रयोग से नकारात्मक भावनाएं ज्यादा आती हैं। वहीं इसके ज़्यादा उपयोग से व्यक्ति का खुद पर नियंत्रण कम हो जाता है और जीवन में उद्देश्य की भावना धीरे-धीरे कम होती जाती है। इतना ही नहीं, रिसर्च में यह बात भी सामने आई है कि स्मार्टफ़ोन के ज्यादा प्रयोग से सामाजिक दबाव को झेलने की झमता भी प्रभावित होती है।

रिसर्च के मुताबिक़, स्मार्टफ़ोन के कारण हम लगातार ख़बरों और मनोरंजन से जुड़े रहते हैं, जिसके कारण हमारी सोचने सझमने की क्षमता काफ़ी प्रभावित होती है। जो भी ख़बरें या मनोरजंन हमारे पास स्मार्टफ़ोन के द्वारा आ रहे हैं, जरूर नहीं है कि वे सभी सकारात्मक ही हो। ज़्यादातर नकारात्मक ख़बरें आने से हमारे जीवन में भी इसके कारण नकारात्मकता आती है और हमारी निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है।

हालांकि, ऐसा नहीं है कि स्मार्टफ़ोन का उपयोग करने से हमेशा ही नकारात्मकता आती है। यदि आप अपने आराम करने के समय स्मार्टफ़ोन का कम उपयोग करते हैं और बाक़ी समय भी स्मार्टफ़ोन का उपयोग करते समय सिर्फ़ कॉल या मैसेज भेजने पर ज़्यादा ध्यान देते हैं तो आप नकारात्मकता से दूर रहेंगे।