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विश्लेषण: साफ़ दिखाई देता है भारत और पाकिस्तान में नेतृत्व का असर

04 Apr 2019
ग़लत नीतियों के कारण कर्ज़ में डूबे पाकिस्तान की आर्थिक हालत और भी होगी बदतर

APR 04 (WTN) – पाकिस्तान, भारत से अलग होकर एक देश बना था। लेकिन आज भारत जहां हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है, वहीं पाकिस्तान अपनी बनाई नीतियों के कारण आज आर्थिक रूप से बर्बादी की कग़ार पर है। आतंकवाद को बढ़ावा देने के कारण ही आज पाकिस्तान की यह हालत हो गई है। बात करें आर्थिक प्रगति की तो एडीबी यानि कि एशियन डेवलपमेंट बैंक के मुताबिक़, भारत इस साल भी दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यस्था रहेगी। लेकिन बात करें पाकिस्तान की तो एडीबी के अनुसार, वित्तीय संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर (GDP) में भारी गिरावट आने के संकेत हैं।
 
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने 'व्यापक आर्थिक चुनौतियों' का हवाला देते पाकिस्तान की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2018 में 5.2 प्रतिशत से गिरकर 2019 में 3.9 प्रतिशत पर आ जाने का अनुमान लगाया है। एशियाई विकास परिदृश्य 2019 के अनुसार, साल 2018 में कृषि क्षेत्र में सुधार के बावजूद पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर धीमी पड़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक़, पाकिस्तान की विस्तारवादी राजकोषीय नीति के कारण बजट और चालू खाते के घाटे को काफ़ी बढ़ाया है। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में साफ़ कहा गया है कि वित्तीय रूप से संकट में चल रहे पाकिस्तान ने विदेशी मुद्रा का भारी नुकसान किया है।
 
एडीबी ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति के बारे में साफ़ कहा है कि जब तक पाकिस्तान में वृहद आर्थिक असंतुलन को कम नहीं किया जाता है, तब तक वृद्धि के लिए वहां पर परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहेंगी। इस दौरान ऊंची मुद्रास्फीति की परेशानी का सामना तो पाकिस्तान को करना ही पड़ेगा, साथ-साथ मुद्रा पर दबाव भी बना रहेगा। एडीबी ने पाकिस्तान पर व्यंग्य करते हुए कहा कि थोड़ा बहुत विदेशी मुद्रा भंडार भी बनाये रखने के लिये भारी मात्रा में बाहरी वित्तीय पोषण की ज़रूरत होगी।
 
कर्ज़ में डूबे पाकिस्तान की जीडीपी वृद्धि दर साल 2019 में गिरकर 3.9 प्रतिशत रहने का अनुमान एडीबी ने जताया है। क्योंकि इस समय पाकिस्तान के सामने बेहत बड़ी आर्थिक चुनौतियां सामने हैं, लेकिन उन्हें दूर करने की बजाय वो भारत में अस्थिरता फैलाने में ज़्यादा व्यस्त है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान को याद दिलाते हुए एडीबी ने साफ़ तौर से अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि यदि 2020 में भी पाकिस्तान ने राजकोषीय घाटा कम नहीं किया और वित्तीय अनुशासन जारी नहीं रखा, तो उसकी आर्थिक वृद्धि दर गिरकर 3.6 प्रतिशत रह जायेगी।
 
इधर पाकिस्तान अपनी भारी वित्तीय ज़रूरतों को पूरा करने के लिये अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ एक वृहदआर्थिक स्थिरीकरण कार्यक्रम पर चर्चा कर रहा है ताकि दिनों दिन बिगड़ती आर्थिक स्थिति पर काबू पाया जा सके।
 
इधर एडीबी के मुताबिक़, वित्त वर्ष 2019-20 में भारत की विकास दर 7.2 प्रतिशत रह सकती है। वहीं वित्त वर्ष 2020-21 में यह बढ़कर 7.3 प्रतिशत हो सकती है। एडीबी ने जहां भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में टॉप पर रखा है, तो वहीं चीन की साल 2019 में विकास दर 6.3 प्रतिशत और 2020 में गिरकर 6.1 प्रतिशत रह जाने का अनुमान एडीबी ने लगाया है।
 
वैसे तो भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी तरह की तुलना लाजिमी नहीं है। लेकिन यदि फ़िर भी तुलना की जाए, तो साफ़ दिखता है कि जहां भारत में लोकतांत्रिक सरकारें देश के विकास के लिए काम करती हैं, तो वहीं पाकिस्तान में सेना का पूरी तरह से वहां की सरकारों पर नियंत्रण रहता है। 

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जहां भारत में ग़रीबों के लिए नई नई योजनाओं पर काम हो रहा है, तो वहीं पाकिस्तान में वहां की सेना, सरकार के साथ मिलकर भारत में आतंकी गतिविधियों को फ़ैलाने में लगी हुई है। धीरे-धीरे चीन के कर्ज जाल में फंसते जा रहे पाकिस्तान की आर्थिक हालत आने वाले दिनों में और भी कमजोर हो सकती है।