जानिए रेपो रेट कम होने के बाद भी सस्ते क्यों नहीं हो रहे हैं लोन?
APR 05 (WTN) – समय-समय पर आप सुनते होंगे कि भारत की केन्द्रीय बैंक, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया, ने रेपो रेट में कटौती की है। जिसके बाद आपको पढ़ने में और सुनने में आता होगा कि रेपो रेट के कम होने के बाद होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन सस्ते होंगे। लेकिन वास्तव में ये लोन उतने सस्ते नहीं होते हैं जितनी की आप आशा करते हैं। क्या आपको पता है कि ऐसा क्यों होता है? यदि आप नहीं जानते हैं, तो हम आपको बताते हैं कि ऐसा क्यों होता है?
दरअसल रेपो रेट कम होने के बाद भी बैंक अपने ग्राहकों को रिज़र्व बैंक की कटौती का पूरा फायदा अपनी नीतियों के कारण नहीं पहुंचाते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले तीन महीनों में रेपो रेट में 0.5 प्रतिशत की कमी हुई है, पर आपके लोन पर ब्याज की दर में कोई बड़ी कटौती नहीं हुई है। यदि आप ध्यान दें तो रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट को एक साल के सबसे निचले स्तर(6 प्रतिशत) पर ला दिया है। फरवरी और अप्रैल की कटौती मिलाकर रेपो रेट में आधा प्रतिशत की कमी आई है।
यदि आपका होम लोन, ऑटो लोन या पर्सनल लोन है, और यदि आपने गौर किया हो तो आपको पता चलेगा कि रेपो रेट में कमी की तुलना में आपकी ईएमआई में कमी नहीं हुई है। वहीं नए लोन लेने वालों के लिए भी ब्याज दरों में बड़ी कटौती नहीं हुई है। जानकारों के मुताबिक़, बैंकों ने कभी भी रिज़र्व बैंक की कटौती का पूरा फायदा ग्राहकों को नहीं पहुंचाया है।
दरअसल रेपो रेट वो दर होती है जिस पर रिज़र्व बैंक से बैंक कर्ज़ लेते हैं। रेपो रेट के कम होने पर बैंकों को आरबीआई से कम ब्याज पर पैसा मिलता है, जिसके कारण ग्राहकों को भी बैंकों से सस्ता लोन मिलना चाहिए, पर ऐसा होता नहीं है। प्रतिस्पर्धा के चक्कर में बैंकों को अपनी आय और लाभ की चिंता होती है। यही कारण है कि रिज़र्व बैंक से सस्ता कर्ज़ मिलने के बाद भी बैंक ग्राहकों को इसका पूरा फ़ायदा नहीं देते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आरबीआई ने फरवरी के महीने में रेपो रेट 0.25 प्रतिशत कम की थी, जिसके बाद कुछ बैंकों ने ब्याज दरों में सिर्फ 0.05 प्रतिशत की कटौती की थी। जानकारों के मुताबिक़ यह कटौती इतनी कम है कि लम्बे समय के लोन पर इसकी कमी का असर ना के बराबर ही है।
पर जब भी रिज़र्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंक तुरन्त ही तेज़ी से लोन पर ब्याज दरों को बढ़ा देते हैं। लेकिन रिज़र्व बैंक द्वारा रेपो रेट कम करने के बाद, बैंकों द्वारा तुरन्त ही ग्राहकों के लिए कर्ज़ सस्ता नहीं किया जाता है। यानि कि रेपो रेट बढ़ने के बाद कर्ज़ महंगा करने में बैंक पीछे नहीं रहते हैं, लेकिन रेपो रेट कम होने के बाद कर्ज़ सस्ता करने में बैंक का इतिहास हमेशा से ही ग्राहकों के हितों के विपरित ही रहा है।
वहीं यदि अगर आप सोच रहे हैं कि इस बार भी हुई रेपो रेट की कटौती का लाभ ग्राहकों को मिलेगा, तो आपका सोचना ग़लत है। दरअसल रिज़र्व बैंक ने 1 अप्रैल से लोन की दरों को एक्सटरनल बैंचमार्क से जोड़ने की व्यवस्था को भी टाल दिया है। इस व्यवस्था के आने के बाद लोन की दरों में कटौती का फायदा ग्राहकों को मिलने की उम्मीद थी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बैंक अभी अपने फंड की लागत के हिसाब से लोन की दरें तय करते हैं। इसके तहत एमसीएलआर के जरिए लोन की दरें तय होती हैं। अब चुंकि यह व्यवस्था जारी रहेगी, इसलिए लोन की दरों में कटौती का लाभ लेने के लिए ग्राहकों को अभी और प्रतीक्षा करना होगी।