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क्या पाकिस्तान से नाराज़ चल रहा है चीन?

02 May 2019
चीन के ‘समर्थन’ के बाद मसूद अज़हर वैश्विक आतंकी घोषित, पाकिस्तान के ‘नाराज़’ होने की चीन ने नहीं की चिन्ता
 
MAY 02 (WTN) –
मोदी सरकार की 'सफ़ल कूटनीति' के कारण आख़िरकार मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया गया है। पिछले दस सालों से भारत सरकार प्रयास कर रही थी कि मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित किया जाए, लेकिन शुरू से ही चीन इसका विरोध संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में करता आ रहा था। लेकिन आख़िर में चीन ने अपने अड़ियल रूख में बदलाव किया और मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के भारत के प्रयासों का समर्थन किया। पर इस सबके बीच एक बड़ा सवाल यह है कि क्या चीन ने ऐसा करके पाकिस्तान को नाराज़ किया है?

इन सवालों के बीच बड़ा सवाल यही है कि आख़िर वे कौन से कारण हैं जिसके कारण चीन मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए राज़ी हुआ। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद जब जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए अमेरिका, यूके और फ्रांस ने एक प्रस्ताव सुरक्षा परिषद में लाया था, तो हमेशा की तरह चीन ने इसका जमकर विरोध किया था।
 
हालांकि, भारत ने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अज़हर के ख़िलाफ़ लगातार कई बार सबूत दिये, लेकिन चीन इन सबूतों को नाकाफ़ी बताता रहा। अमेरिका, यूके और फ्रांस लगातार चीन पर इस बात के लिए दबाव बनाते रहे कि वो मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रयासों में बाधा ना डाले, लेकिन तब पाकिस्तान को खुश रखने के चक्कर में चीन अपने अड़ियल रवैये पर कायम रहा।  पर जब प्रस्ताव से पुलवामा आतंकी हमले का जिक्र हटाया गया तो चीन मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए राज़ी हुआ।

विदेश नीति के जानकारों का मानना था कि चीन शायद ही मसूद अज़हर के मामले में भारत का साथ दे। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 देशों में से 14 देश, जैश के सरगना मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने का समर्थन कर रहे थे पर चीन अपने रूख पर कायम रहा।

लेकिन इस दौरान कई ऐसे घटनाक्रम हुए जिसके बाद चीन को अपने अड़ियल रूख में बदलाव लाना पड़ा और पाकिस्तान की नाराज़गी की चिन्ता किये बना वो भारत के साथ खड़ा हो गया। कहा जाता है कि चीन का अमेरिका के साथ व्यापार युद्द, ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध और भारत में फ़िर से मोदी सरकार की वापसी के सम्भावना, ये वो कारण थे जिनके चलते चीन मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रयासों का साथ देने राज़ी हुआ।

कहा यह भी जा रहा है कि मसूद अज़हर का साथ देने के कारण चीन पूरी दुनिया में अकेला पड़ गया था। पूरी दुनिया में चीन की यह छवि बन गई थी कि चीन आतंक और आतंकियों को बचाने का काम कर रहा है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद जिस तरह से पूरी दुनिया भारत के साथ खड़ी नज़र आई, उससे चीन को आभास हो गया कि भारत को नज़र अन्दाज़ करना अब सही नहीं है।

वहीं मसूद अज़हर के मामले में बार-बार चीन द्वारा वीटो किये जाने के बाद अमेरिका, चीन से नाराज़ बताया जा रहा था। अमेरिका ने चीन को साफ़ सन्देश दे दिया था कि मसूद अज़हर पर चीन के अड़ियल रूख के कारण वह यूके और फ्रांस के साथ मिलकर एक बार फ़िर से सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाएगा। कहा जा रहा है कि इसी वैश्विक दबाव के कारण भी चीन, मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए राज़ी हुआ।

जानकारों का मानना है कि चीन के इस क़दम के बाद कहा जा रहा है कि उसके पाकिस्तान के साथ रिश्ते सही नहीं चल रहे हैं। या तो चीन, पाकिस्तान से नाराज़ है या फ़िर पाकिस्तान की अब कोई चिन्ता चीन को नहीं है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कुछ दिनों पहले चीन की सरकारी टीवी ने पीओके यानि की पाक अधिकृत कश्मीर को पाकिस्तान को हिस्सा नहीं दिखाया था। वहीं बीजिंग में वन बेल्ट-वन रोड समिट में चीन ने जो नक्शा पेश किया था उसमें पूरे कश्मीर को भारत का हिस्सा दिखाया था। इतना ही नहीं, वन बेल्ट-वन रोड समिट में शिरकत करने बीजिंग पहुंचे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के स्वागत पर भी सवाल उठे, जब इमरान खान का स्वागत किसी मंत्री या विदेश मंत्रालय के अधिकारी के बजाय बीजिंग की मेयर ने किया।
 
विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि चीन और पाकिस्तान के बीच अब रिश्ते बराबरी वाले या सामान्य नहीं रहे हैं। अपने महत्वाकांक्षी सीपीईसी प्रोजेक्ट के लिए चीन ने पाकिस्तान को कर्ज़ देकर एक तरह से उसे अपने अधीन कर लिया है। ग़रीबी और कर्ज़ में डूबे पाकिस्तान की सहायता करते हुए चीन, पाकिस्तान के संसाधनों का जमकर प्रयोग कर रहा है। जानकारों का मानना है कि सीपीईसी प्रोजेक्ट के बाद पाकिस्तान बस चीन का उपनिवेश बनकर ही रह जाएगा। हो सकता है कि मसूद अज़हर पर चीन के रवैये के बाद पाकिस्तान अपना विरोध दर्ज कराए, लेकिन चीन के कर्ज़ मे दबे पाकिस्तान में इतनी हिम्मत नहीं है कि वो ऐसा कर सके।

वैसे साफ़ जाहिर है कि मसूद अज़हर के मामले में चीन ने भारत का साथ देकर पाकिस्तान को नाराज़ कर दिया है, लेकिन चीन जानता है कि यदि वो ऐसा नहीं करता तो पूरी दुनिया के सामने सन्देश जाता कि वो आतंक के साथ खड़ा है। इसलिए चीन ने पाकिस्तान के नाराज़ होने की परवाह किये बिना, भारत का साथ दिया और मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित किये जाने के भारत के प्रयासों का समर्थन किया।