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जानिए कैसे होता है तूफ़ानों का नामकरण?

03 May 2019
तूफ़ानों का नामकरण: A से लेकर W तक के अक्षरों में रखे जाते हैं पुरुष और स्त्री आधारित नाम
 
MAY 03 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि ‘फोनी’ तूफ़ान भारत के पूर्वीय तटीय इलाकों में क़हर बरपा रहा है। इस तूफ़ान में हवाओं की रफ़्तार क़रीब 200 किलोमीटर प्रति घंटा है, औऱ यह तूफ़ान ओडिशा के तटीय इलाकों से टकरा गया है। ऐहतियात के तौर पर ओडिशा, आंध्रप्रदेश और पश्चिम बंगाल में अलर्ट जारी है। इस सबके बीच आप सोच रहे होंगे कि तूफ़ानों का नाम किस तरह से निर्धारित किया जाता है? सबसे पहले हम आपको बताएंगे कि ‘फोनी’ का मतलब क्या होता है और किस देश ने इसका नामकरण किया है?
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि तूफ़ान का ‘फोनी’ नाम बांग्लादेश ने दिया है। ‘फोनी’ का मतलब होता है ‘फन वाल सांप’। इससे तूफ़ानों के नाम नीलोफर, तितली, बिजली और जल आदि रखे गये थे। मौसम विज्ञान के जानकारों के मुताबिक़ ‘फोनी’ एक उष्णकटिबंधीय तूफ़ान है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में उष्णकटिबंधीय तूफ़ानों को अलग-अलग नाम से जाना जाता है।
 
आधिकारिक तौर पर तूफ़ानों के नाम रखने की शुरुआत साल 1953 से शुरू हुई। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हर तूफ़ान का नामकरण नहीं किया जाता है। किसी भी तूफ़ान का नामकरण तब किया जाता है जब उसकी स्पीड कम से कम 63 किलोमीटर प्रति घंटा हो। इसके साथ ही अगर तूफ़ान की रफ़्तार 118 किलोमीटर प्रति घंटा तो उसे ‘गम्भीर तूफ़ान’ माना जाता है। वहीं अगर तूफ़ान की रफ़्तार 200 किलोमीटर प्रति घंटे से ज़्यादा होती है तो उसे ‘सुपर साइक्लोन’ की श्रेणी में रखा जाता है।
 
‘फोनी’ तूफ़ान की शुरूआत हिन्द महासागर के उत्तरी इलाके में हुई है, ऐसे में तूफ़ान के नाम को रखने की ज़िम्मेदारी इस क्षेत्र में आने वाले देशों की थी। इस बार इस सुपर साइक्लोन का नाम बांग्लादेश ने दिया है ‘फोनी’, जिसका अर्थ होता है फन वाला सांप।
 
अब आप जानना चाहते होंगे कि तूफ़ान का जेन्डर क्या होता है, यानी कि तूफ़ान पुरुष है या स्त्री। वैसे तूफ़ान मेल जेन्डर में आता है। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पहले तूफ़ान को सिर्फ़ महिलाओं का नाम मिलता था। साल 1953 में अमेरिकी मौसम विभाग ने तय किया कि अंग्रेजी वर्णमाला के A से लेकर W तक जितने भी नाम महिलाओं के हो सकते हैं, उसी आधार पर तूफ़ान का नामकरण किया जाए। लेकिन महिला संगठनों के विरोध के बाद तूफ़ान का नाम पुरुषों के नाम पर भी किया जाने लगा।
 
बात करें भारतीय उपमहाद्वीप और हिन्द महासागर की तो यहां के देशों में तूफ़ानों के नामकरण की परम्परा साल 2000 से शुरू हुई। इन देशों में भारत, बांग्लादेश, मालदीव और म्यांमार जैसे देश शामिल हैं। अब तूफ़ानों का नाम देने का काम वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल संगठन करता है। इसके हिसाब से जिस इलाक़े में तूफ़ान आएगा, उसका नाम वहां की क्षेत्रीय एजेंसिया रखेंगी।
 
यानि कि किसी भी साल की शुरुआत में आने वाले पहले तूफ़ान का नामकरण अंग्रेजी के A अक्षर से और उसके बाद आने वाले तूफ़ानों का नामकरण B अक्षर से किया जाएगा। वहीं जैसे-जैसे तूफ़ान आते जाएंगे, अगले आने वाले अक्षर के आधार पर उसका नामकरण होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सम संख्या (ईवन नम्बर) वाले वर्षों जैसे 2014, 2016 और 2018 में आने वाले तूफ़ानों का नामकरण पुरुषों के नाम पर किया जाता है। वहीं विषम नम्बर (ऑड नम्बर) वाले वर्षों जैसे 2013, 2015 और 2017 में आने वाले तूफ़ानों का नामकरण महिला के नाम पर किया जाता है।