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भाजपा नेताओं ने दिये ‘संकेत’; शायद भाजपा को ना मिले लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत!

07 May 2019
लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत ना मिलने की स्थिति में एनडीए के सहयोगियों के ‘प्रदर्शन’ पर भाजपा की ‘निगाहें’!
 
MAY 07 (WTN) – अब जबकि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में लोकसभा चुनाव में मतदान के पांच चरण पूरे हो चुके हैं और बाक़ी दो चरणों के लिए मतदान होना शेष है। इस सबके बीच भाजपा नेताओं के बयानों से ऐसा लग रहा है कि भाजपा को इस बार चुनाव में शायद ‘पूर्ण बहुमत’ नहीं मिलेगा और एनडीए के सहयोगियों के साथ ही भाजपा गठबंधन 272 सीटों पर पहुंच पाएगा। आख़िर क्यों भाजपा नेता ऐसा कह रहे हैं, और इसके पीछे की वजह क्या है? आइये जानते हैं।
 
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने एक न्यूज़ चैनल को दिये इंटरव्यू में ‘संकेत’ दिये हैं कि इस बार के लोकसभा चुनाव में भाजपा को शायद पूर्ण बहुमत हासिल नहीं होगा। राम माधव ने ‘संकेत’ देते हुए कहा कि भाजपा को नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनाने के लिए एनडीए के सहयोगियों के अलावा ‘अन्य सहयोगियों’ की ज़रूरत भी पड़ सकती है। यानि की साफ़ है कि राम माधव के नज़र में भाजपा की इस बार ‘पूर्ण बहुमत’ की सरकार ना बने।
 
राम माधव से पहले भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी कहा था कि अगर बालाकोट में भारत ने एयर स्ट्राइक नहीं की होती तो इस लोकसभा चुनाव में भाजपा को ज़्यादा से ज़्यादा 160 सीटें ही मिल पातीं। वहीं अब राम माधव का मानना है कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव की तरह भाजपा को इस बार अपने ‘दम’ पर ‘पूर्ण बहुमत’ शायद हासिल नहीं हो। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समय-समय पर कहते आएं हैं कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल होने जा रहा है।
 
दरअसल, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में काफ़ी अन्तर है। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के ख़िलाफ़ लोगों में ‘गुस्सा’ था जिसका ‘फ़ायदा’ भाजपा को मिला और भाजपा ने उस चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल किया था। लेकिन अब जबकि इस समय केन्द्र में भाजपा की सरकार है, तो ऐसे में भाजपा को स्वाभाविक रूप से ‘सत्ता विरोधी लहर’ का सामना करना पड़ेगा। साथ ही भाजपा ने पिछले चुनाव में जिन राज्यों में अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया था, वहां पर भी भाजपा को इस बार ‘नुकसान’ होने की बात कही जा रही है।
 
बात करें यूपी की तो यहां पर बसपा-सपा गठबंधन के कारण भाजपा को ‘नुकसान’ होता दिख रहा है। पिछले चुनाव में जहां भाजपा ने राज्य की 80 में से 71 सीटों पर जीत हासिल की थी, तो कहा जा रहा है कि इस बार बसपा-सपा गठबंधन के कारण भाजपा 50 सीटों के अन्दर ‘सिमट’ सकती है। वहीं अन्य राज्य जैसे राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा और पंजाब में भी भाजपा को ‘नुकसान’ हो सकता है। दक्षिण भारत में कर्नाटक को छोड़कर भाजपा की किसी अन्य राज्य में पकड़ नहीं है। ऐसे में भाजपा यहां पर सहयोगियों के सहारे ही सीटों की ‘आस’ लगाए बैठी है।
 
इस बारे में खुद राम माधव का कहना है कि भाजपा ने पूर्वी भारत में जो ‘मेहनत’ की थी यदि वही मेहनत दक्षिण भारत में की होती तो आज भाजपा दक्षिण में ज़्यादा ‘आरामदायक’ स्थिति में होती। पूर्वी भारत के बारे में जो बातें राम माधव ने की हैं वो सही भी लगती हैं, क्योंकि ओपिनियन पोल्स के मुताबिक़ इस बार पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भाजपा के लिए ‘अच्छे नतीजे’ सामने आ सकते हैं।
 
इस लोकसभा चुनाव में भाजपा को ‘सबसे ज़्यादा’ सीटों की आशा हिन्दी भाषी राज्यों के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से है। वहीं यदि भाजपा को अपने दम पर ‘पूर्ण बहुमत’ नहीं मिलता है तो सरकार बनाने के लिए भाजपा एनडीए के दलों पर आश्रित रहेगी। वहीं एनडीए को भी बहुमत हासिल नहीं होता है तो एनडीए सरकार बनाने के लिए अन्य क्षेत्रीय दलों पर आश्रित रहेगी। लेकिन यदि ओपिनियन पोल्स की मानें तो भाजपा को इस चुनाव में पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है तो भी एनडीए को पूर्ण बहुमत मिल सकता है और भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बन सकती है।