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पाकिस्तान में तख़्ता पलट की ‘आशंका’!

17 May 2019
पाकिस्तान में ‘बर्बाद’ होने की क़गार पर अर्थव्यवस्था, सेना कर सकती है इमरान खान सरकार का तख्ता पलट!
 
MAY 17 (WTN) –
यदि पाकिस्तान के आर्थिक हालात ऐसे ही रहे, तो वो दिन दूर नहीं जब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी। और यदि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तबाह हुई तो पाकिस्तान में सेना तख़्तापलट भी कर सकती है। आख़िर पाकिस्तान में सेना तख्ता पलट क्यों कर सकती है? आपको विस्तार से बताते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान पर विदेशी कर्ज़ इतना बढ़ गया है कि उसका अब इस स्थिति से उबरना काफ़ी मुश्किल ही है। वहीं अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मिलने वाले बेलआउट पैकेज की शर्तों के कारण पाकिस्तान में महंगाई बढ़ने वाली है, जिसे पाकिस्तान की आम जनता शायद ही सह पाये।

पाकिस्तानी मामलों के जानकारों के मुताबिक़, पाकिस्तान को मिलने वाले विदेशी कर्ज़ का ज़्यादातर हिस्सा सेना और उसके लिए हथियारों की ख़रीदी में ख़र्च होता है। वहीं विदेश से मिलने वाले कर्ज़ से ही पाकिस्तान आतंक को बढ़ावा देने में लगा हुआ है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय पाकिस्तान पर कुल विदेशी कर्ज़ 88.199 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भण्डार भी लगभग ख़ाली है। इतना ही नहीं, अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले पाकिस्तानी रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर तक पहुंच चुका है।

कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की बर्बादी की यह तो बस शुरूआत है। हालत इससे भी ज़्यादा ख़राब होने वाले हैं, क्योंकि अब पाकिस्तान आईएमएफ से 6 बिलियन डॉलर का बेलआउट पैकेज लेने जा रहा है। आईएमएफ से कर्ज़ लेने के बाद पाकिस्तान के राजनेता अपनी जनता को समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि इतना बढ़ा कर्ज़ लेने के बाद पाकिस्तान की आर्थिक हालत सुधर जाएगी, लेकिन हक़ीकत है कि पहले भी पाकिस्तान इससे ज़्यादा कर्ज़ ले चुका है। सालों से विदेशी कर्ज़ लेने के बाद भी पाकिस्ताान के आर्थिक हालात नहीं सुधर सके हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि पाकिस्तान कर्ज़ की रक़म का ज़्यादातार उपयोग सेना के लिए हथियार ख़रीदने और आतंक को बढ़ाने में करता है।

क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान जब कुछ महीनों पहले प्रधानमंत्री बने थे, तो उनकी कोशिश थी कि पाकिस्तान के मित्र देशों सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और चीन से लोन मिल जाए। लेकिन इमरान खान के यह मंसूबे पूरे नहीं हो सके, और आख़िरकार पाकिस्तान को आईएमएफ के सामने हाथ फैलाने पड़े। एक समय था जब इमरान खान कहा करते थे कि आईएमएफ से कर्ज़ लेने की बजाए वो मर जाना पसंद करेंगे, लेकिन हक़ीकत अब आप सबके सामने है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आईएमएफ काफ़ी कड़ी शर्तों पर पाकिस्तान को बेलआउट पैकेज दे रहा है। आईएमएफ की यह रक़म पाकिस्तान को तीन सालों में मिलेगी। लेकिन आईएमएफ की कर्ज़ की शर्तें इतनी कठिन हैं, जिससे आम पाकिस्तानी जनता को महंगाई की मार झेलना पड़ेगी। अर्थशास्त्र के जानकारों के मुताबिक़, जिस तरह से पाकिस्तान कर्ज़ में बर्बाद होता जा रहा है, वैसे कोई भी देश बर्बाद नहीं होता है। कर्ज़ लेने के बाद पाकिस्तानी रूपया, अमेरिकी डॉलर के सामने और भी कमज़ोर होता चला जाएगा, और इससे पाकिस्तान की आर्थिक हालत और भी ख़राब होती चली जाएगी।

डॉलर महंगा होने से पाकिस्तान के लिए विदेश से तेल मंगाने से लेकर हर आयात महंगा हो जाएगा। इन्ही सब कारणों से आम पाकिस्तानी जनता की हालत बद से बदतर होने वाली है। महंगाई के साथ-साथ आईएमएफ की कड़ी शर्तों के कारण बिजली की दरें बढ़ेंगी और टैक्स का बोझ आम जनता पर डाला जाएगा। यानी कि साफ़ है कि धीरे-धीरे पाकिस्तान की आर्थिक हालत बर्बादी की क़गार पर पहुंच गई है।

अब इन सभी बातों से यह तय है कि आईएमएफ के कर्ज़ के कारण पाकिस्तान के बजट पर असर पड़ेगा, और स्वाभाविक है कि सेना के खर्चे में कटौती होगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान में सेना ही सर्वोपरि है, ऐसे में यदि सेना नाराज़ हुई तो पाकिस्तान में तख्तापलट भी हो सकता है। इस समय पाकिस्तान में कई अलगाववादी आंदोलन चल रहे हैं। वहीं यदि महंगाई नियंत्रण से बाहर हुई, और टैक्स का बोझ आम जनता पर पड़ा, तो स्वाभाविक है कि यह अलगाववादी आंदोलन और भी तेज़ हो जाएंगे। इन अलगाववादी आंदोलनों को दबाने की आड़ में भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की सेना तख़्ता पलट कर सकती है।

अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान की इस बदतर आर्थिक हालत का फ़ायदा चीन उठा सकता है। कहा जा रहा है कि चीन, पाकिस्तान को अपनी शर्तों पर कर्ज़ देकर पाकिस्तान के संसाधनों का जमकर दोहन करेगा। जिसके बाद वहां की सेना में असंतोष फैल सकता है। यानी कि साफ़ है कि पाकिस्तान की बर्बाद होती अर्थव्यवस्था के कारण पाकिस्तान में सेना द्वारा तख़्ता पलट की सबसे बड़ी आशंका है। पाकिस्तान की सेना किसी भी हालत में अपने ख़र्चों में कटौती के लिए तैयार नहीं है। यदि पाकिस्तान में सेना के ख़र्चों में कटौती की कोशिश इमरान खान सरकार ने की, तो पाकिस्तान में एक बार फ़िर से तख़्ता पलट की आशंका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है।