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पाकिस्तान में महंगाई ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, आसमान पर पहुंची खाने पीने की क़ीमतें!

20 May 2019
ख़राब आर्थिक हालात के बीच पाकिस्तान में ऐतिहासिक स्तर पर पहुंची महंगाई

MAY 20 (WTN) – पाकिस्तान पूरी दुनिया में एक असफ़ल देश के रूप में जाना जाने लगा है। पाकिस्तान की आर्थिक हालत इस समय सबसे ख़राब दौर से गुजर रही है। पाकिस्तान की आर्थिक हालत यह है कि यदि उसे उसके मित्र देशों ने आर्थिक सहयोग नहीं दी होती, तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कब की दिवालिया घोषित हो गई होती। पाकिस्तान के इस तंगहाल आर्थिक हालत के लिए खुद पाकिस्तान ही ज़िम्मेदार है, क्योंकि पाकिस्तानी सरकारों ने सेना के लिए हथियार ख़रीदने और भारत में आतंक फ़ैलाने के लिए पैसों को पानी की तरह बहाया है।
 
कर्ज़ के जाल में फंसे पाकिस्तान में आर्थिक संकट लगातार गहराता ही जा रहा है, और उस पर पाकिस्तान की सरकार महंगाई रोकने में नाकाम साबित हो रही है। इसका नतीजा यह हो रहा है कि पाकिस्तान में खाने पीने की वस्तुओं से लेकर रोजमर्रा के सामान काफ़ी महंगे होते जा रहे हैं। एक तो ग़रीबी और ऊपर से महंगाई, इन दोनों कारणों से आम पाकिस्तानी का जीना इन दिनों मुश्किल हो गया है।

पाकिस्तान में महंगाई इस कदर बढ़ गई है कि वहां पर दूध 190 रूपये लीटर बिक रहा है, तो वहीं सेब फल की क़ीमत 400 रुपये किलो तक पहुंच गई है। संतरे जहां 360 रुपये किलो बिक रहे हैं, तो एक दर्ज केले ख़रीदने के लिए 150 रूपये ख़र्च करने पड़ रहे हैं।

बात करें मटन की, तो पाकिस्तान में मटन की क़ीमत 1100 रुपये किलो तक जा पहुंची है। वहीं मार्च की तुलना में मई में प्याज की क़ीमतों में 40% का इज़ाफा हुआ है, तो टमाटर 19 % तक महंगे हो गये हैं। मूंग की दाल के अलावा शक्कर, गुड़, मसाले, फल्लियां, मछली,आटा, घी, चावल, तेल, आटा, चाय और गेंहू की कीमतों में भी वृद्धि हुई है, जिसके कारण आम जनता परेशानी का सामना कर रही है।

एक समय था जब पाकिस्तान में वहां की आवाम की आवाज़ को दबा दिया जाता था। लेकिन अब सोशल मीडिया के कारण ऐसा कर पाना सम्भव नहीं हो पा रहा है, ऐसे में महंगाई की मारी पाकिस्तान की शिक्षित जनता खुलकर इमरान खान सरकार की नीतियों का विरोध कर रही है। सोशल मीडिया पर लोग जमकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं कि आख़िर क्यों महंगाई को काबू में नहीं लिया जा पा रहा है? पाकिस्तान की आवाम का आरोप है कि इमरान खान सरकार पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है, और उसकी ग़लत आर्थिक नीतियों के कारण ही महंगाई अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर है।

इधर, पाकिस्तानी बाज़ार पर रिसर्च करने वाली एक संस्था का कहना है कि पाकिस्तान सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण धीरे-धीरे व्यापारियों का बाज़ार पर से विश्वास उठता जा रहा है। वहीं उधर पाकिस्तान का शेयर मार्केट भी चौपट होने के क़गार पर है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले 17 सालों में पाकिस्तानी शेयर बाज़ार का सबसे ख़राब दौर चल रहा है। पाकिस्तानी शेयर मार्केट की हालत यह है कि कारोबारियों ने सरकार से मार्केट सपोर्ट फंड बनाने की मांग उठाई है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान में महंगाई बढ़ने के कई कारण हैं, जिसमें से एक कारण पाकिस्तानी रूपये का अमेरिकी डॉलर के सामने लगातार कमज़ोर होना है। दरअसल, पाकिस्तान ने अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से 6 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज लिया है, इसी पैकेज के कारण पाकिस्तान को अपने मुद्रा का अवमूल्यन अमेरिकी डॉलर के सामने करना पड़ रहा है।

आईएमएफ ने पाकिस्तान को लोन ही इसी शर्त पर दिया है कि उसे डॉलर के मुक़ाबले अपनी मुद्रा का अवमूल्यन करना होगा, और इसी कारण से पाकिस्तान में महंगाई ऐतिहासिक स्तर पर जा पहुंची है। लेकिन पाकिस्तान की सरकार ने इस बात को आम जनता तक शायद सही तरीक़े से नहीं पहुंचाया है कि महंगाई क्यों बढ़ रही है। ऐसा इसलिए, क्योंकि एक समय इमरान खान खुद कहा करते थे कि आईएमएफ से आर्थिक सहायता लेने से बेहतर होगा कि वे आत्महत्या कर लें। लेकिन अब जबकि प्रधानमंत्री रहते इमरान खान आईएमएफ से बेलआउट पैकेज ले रहे हैं, ऐसे में वे किस तरह से पाकिस्तानी जनता के सामने अपना पक्ष रख पाएंगे?

पाकिस्तान की अशिक्षित और ग़रीब जनता को यह नहीं पता है कि देश में बढ़ती महंगाई का कारण क्या है। उसे तो बस यह दिख रहा है कि देश में महंगाई बढ़ रही है। दरअसल, पाकिस्तान की सरकारों ने वहां की सेना के साथ मिलकर हमेशा पाकिस्तान की जनता को भारत के ख़तरे के धोखे में रखा। भारत का डर दिखाकर पाकिस्तान ने सेना के लिए जमकर हथियर ख़रीदें, जिसमें नेता से लेकर नौकरशाहों और सेना के अधिकारियों ने जमकर कमीशन कमाया। वहीं भारत में आतंक फैलाने के नाम पर भी पाकिस्तान ने पैसों की जमकर बर्बादी की है। लेकिन भारत जैसे शक्तिशाली देश का कुछ नहीं बिगड़ा, बल्कि पाकिस्तान की आर्थिक हालत यह हो गई है कि उसकी जनता महंगाई के कारण परेशान है।