HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

अपनी ही पार्टी के नेताओं से ‘हारे’ राहुल गांधी!

28 May 2019
कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी, लापरवाही और मनमानी से टूटे राहुल गांधी के सपने!
 
MAY 28 (WTN) – क्या कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी ही पार्टी के नेताओं से हार मान ली है? हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के लिए जिस तरह की जिद राहुल गांधी कर रहे हैं, इससे तो साफ़ जाहिर होता है कि राहुल गांधी अपनी ही पार्टी के नेताओं से बुरी तरह से नाराज़ हैं, या फ़िर कहा जाए कि पार्टी नेताओं से वे हार मान चुके हैं।

राहुल गांधी को आशा थी कि इस बार कांग्रेस लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करेगी और एनडीए को सत्ता हासिल करने से रोकने में कामयाब होगी, लेकिन राहुल गांधी का यह सपना पूरा ना हो सका। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 44 सीटों पर जीत हासिल की थी तो इस बार कांग्रेस सिर्फ 52 सीटों पर ही सिमट कर रह गई। यदि कांग्रेस पार्टी के हार के कारणों पर मंथन किया जाए तो साफ़ जाहिर होता है कि राहुल गांधी की टीम ने ही कांग्रेस पार्टी को हराने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

कांग्रेस नेताओं ने जिस तरह के बयान प्रधानमंत्री मोदी, हिन्दुत्व और सेना के ख़िलाफ़ दिये, उससे कांग्रेस पार्टी को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी के लिए जिस तरह के अमर्यादित शब्दों का प्रयोग कांग्रेस नेताओं ने किया है, उससे कांग्रेस पार्टी की छवि जनता के सामने गिर गई। देश के प्रधानमंत्री के लिए असभ्य शब्दों के प्रयोग से देश की जनता ने खुलकर मोदी का साथ दिया, जिसका यह नतीजा रहा कि 17 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में कांग्रेस को एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हो सकी।

वही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अलावा हिन्दुत्व और भारतीय सेना के ख़िलाफ़ भी कांग्रेसी नेताओं ने अमर्यादित भाषा और शब्दों का प्रयोग किया। देश की बहुसंख्यक हिन्दू जनता के धर्म के विरुद्ध कांग्रेसी नेताओं के बयान का नकारात्मक असर हुआ,और कांग्रेस को हिन्दी भाषी राज्यों में बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा। सेना के ख़िलाफ़ भी समय-समय पर कांग्रेसी नेताओं ने अपशब्दों का प्रयोग किया तो कुछ कांग्रेसी नेताओं ने सेना की क्षमता पर ही सवाल खड़े करने शुरू कर दिये। सेना के ख़िलाफ़ की गई बयानबाजी का भी कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा है।

वहीं इधर, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में सत्ता हासिल करने के बाद आशा की जा रही था कि इन राज्यों में कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में बड़ी सफ़लता हासिल होगी, लेकिन यहां पर भी राहुल गांधी को निराशा ही हाथ लगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि इन राज्यों के मुख्यमंत्री आत्म मुग्ध रहे कि विधानसभा चुनाव में जीत के बाद कांग्रेस पार्टी को लोकसभा चुनाव में भी सफलता हासिल हो सकती है। कांग्रेस नेताओं को जो मेहनत जीत के लिए ज़मीनी स्तर पर करना चाहिए थी वो इन नेताओं ने नहीं की, जिसका नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।

वहीं अन्य राज्यों की चर्चा करें तो वहां पर कांग्रेस संगठन, भाजपा संगठन के सामने फीका साबित रहा। भाजपा को प्रचार के लिए संघ के स्वयंसेवकों का पूरा सहयोग मिला, जिसका फायदा भाजपा ने उठाया। इन राज्यों में कांग्रेसी नेता मोदी सरकार की नाकामियों, सत्ता विरोधी लहर और प्रियंका गांधी के कथित करिश्मे की आशा पर जीत के सपने देख रहे थे। कांग्रेसी बस सपने देखते रह गये, और भाजपा के कार्यकर्ताओं ने मोदी सरकार की उपलब्धियों और कांग्रेस की नाकामियों को जनता के सामने इतने अच्छे तरीक़े से प्रस्तुत किया कि देश की जनता ने भाजपा को चुना।

साफ़ जाहिर है कि राहुल गांधी को जिन नेताओं पर भरोसा था कि वे कांग्रेस पार्टी के लिए जीत का आधार बनेंगे, उन नेताओं ने जीत के लायक ना तो मेहनत की और ना ही कोशिश की। कांग्रेस नेताओं की इन्हीं ग़लतियों का खामियाजा आज पार्टी उठा रही है। कांग्रेस पार्टी की इतनी बुरी तरह से हार इन लोकसभा चुनाव में हुई है कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी के ज्यादातर सदस्यों को हार का सामना करना पड़ा है। खैर देखते हैं कि इतनी बड़ी हार के बाद क्या कुछ बड़े क्रांतिकारी परिवर्तन राहुल गांधी अपनी पार्टी में करते हैं ताकि 2024 में भाजपा को टक्कर दी जा सके।