HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

​राम माधव का ‘दावा’ या ‘सपना’!

08 Jun 2019
ज़मीनी हक़ीक़त से काफ़ी दूर है राम माधव का ‘दावा’!
 
JUNE 08 (WTN) – विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के इतिहास में 2019 का लोकसभा चुनाव अपने आप में काफ़ी ऐतिहासिक था। इस चुनाव में पहली बार हुआ था कि कांग्रेस के अलावा किसी दूसरी पार्टी ने लगातार दूसरी बार लोकसभा चुनाव में बहुमत हासिल किया। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं। जनता का कांग्रेस के प्रति इतना गुस्सा था कि कांग्रेस को दोनों ही लोकसभा चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा। 2014 में कांग्रेस के सिर्फ़ 42 सांसद ही जीत सके थे, तो वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के हिस्से में सिर्फ़ 52 सीटें ही आईं।

जो राजनीतिक हालत इस समय कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों की है, उसके आधार पर कहा जा सकता है भाजपा इस समय देश की सबसे ज़्यादा शक्तिशाली राजनीतिक पार्टी है। भाजपा के लगातार चुनाव जीतने पर भाजपा महासचिव राम माधव ने एक बहुत बड़ा दावा किया है। माधव के मुताबिक़, भाजपा 2047 तक केन्द्र की सत्ता में रहेगी। माधव ने कहा कि कांग्रेस ने 1950 से 1977 तक लगातार 27 सालों तक केन्द्र में शासन किया, लेकिन अब भाजपा, कांग्रेस का रिकॉर्ड तोड़ेगी और 2047 तक केन्द्र में शासन करेगी।

ख़ैर राम माधव ने आख़िर किस आधार पर इतना बड़ा दावा किया है, यह तो वो ही बेहतर तरीके से बता सकते हैं। लेकिन आइये जरा राम माधव के दावे की ज़मीनी हकीकत देखी जाए। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 37.36 प्रतिशत वोट हासिल कर 303 सीटों पर जीत हासिल की है। भाजपा को इस चुनाव में इतनी बड़ी जीत हासिल हुई है कि कई राज्यों की पूरी की पूरी सीटें भाजपा ने जीती हैं। वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस सिर्फ़ 52 सीटों पर सिमटकर रह गई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा सरकार ने जनता से किये अपने वादों को पूरा किया और विपक्ष बिखरा होने के साथ साथ कमज़ोर रहा है तो कोई बड़ी बात नहीं है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा के नेतृत्व में एनडीए फ़िर से जीत हासिल कर ले। ऐसा इसलिए, क्योंकि भाजपा हमेशा से ही राष्ट्रवाद पर ज़ोर देती रही है। यह तय है कि पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देना कम नहीं करेगा। आने वाले पांच सालों में हो सकता है कि पाकिस्तान की तरफ़ से कोई बड़ा आतंकी हमला फ़िर से हो। ऐसे में तय है कि मोदी सरकार सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के तर्ज पर आतंकियों के ख़िलाफ़ फ़िर कोई कार्रवाई करेगी।

आतंकियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई से एक बार फ़िर से देश में राष्ट्रवाद चर्चा में रहेगा और भाजपा इसका पूरा फ़ायदा उठाने में सफल होगी। इतना ही नहीं, यदि भाजपा भ्रष्टाचार को रोकने में और आर्थिक स्थिरता लाने में सफल रही तो इसका फ़ायदा भी भाजपा को मिलना तय है। किसान, व्यापारी और युवाओं का दिल जीतने में यदि मोदी सफल रहे तो 2024 के लिए भाजपा की राह आसान हो जाएगी। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा एक बार फ़िर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम पर जनता से वोटिंग की अपील करेगी, जिसका काफ़ी असर भाजपा के पक्ष में हो सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अभी तक नरेन्द्र मोदी की छवि एक ईमानदार, मेहनती और देशभक्त नेता की रही है। यदि यही छवि मोदी की 2024 के लोकसभा चुनाव तक रहती है, तो कोई बड़ी बात नहीं है कि भाजपा लगातार तीसरी बार लोकसभा चुनाव में जीत हासिल कर ले।

2024 के लोकसभा चुनाव में एक बार फ़िर से भाजपा की जीत के राम माधव के दावे पर तो विश्वास किया जा सकता है, लेकिन 2029 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत पर संदेह है। ऐसा इसलिए, क्योंकि 2029 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी 79 साल के हो जाएंगे। यदि मोदी स्वस्थ रहते हैं तो ठीक है, लेकिन यदि अस्वस्थ रहे तो ऐसे में तब उनकी राजनीति में सक्रियता ना होने के बाद फिलहाल ऐसा कोई चेहरा नज़र नहीं आ रहा है जिसके नाम पर भाजपा 2029 के लोकसभा चुनाव में वोट मांगे।

वहीं सम्भव है कि आने वाले सालों में भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की नीतियां जनता को पसंद ना आए और जनता 2024 या फ़िर 2029 के लोकसभा चुनाव में एनडीए को हराकर यूपीए के हाथ में फ़िर से शासन सौंप दे। यानि कि साफ़ है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में एक बार फ़िर से भाजपा की जीत के बारे में तो विश्वास किया जा सकता है। लेकिन राम माधव का यह दावा कि भाजपा 2047 तक केन्द्र की सत्ता में रहेगी, अपने आप में दावा कम और सपना ज़्यादा है। भाजपा को आने वाले सालों में सत्ताविरोधी लहर का सामना करना पड़ेगा, जिसके कारण हो सकता है कि भाजपा को लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़े और राम माधव का दावा बस दावा ही रह जाए।