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​ख़ौफ में पाकिस्तान!

10 Jun 2019
आतंकी संगठनों पर समुचित कार्रवाई करने में ‘नाकाम’ साबित हो रहा है पाकिस्तान

JUNE 10 (WTN) – भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं, और इन मुश्किलों के लिए ख़ुद पाकिस्तान ही ज़िम्मेदार है। जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयब्बा जैसे आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करने में असफ़ल रहने के बाद पाकिस्तान, फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) द्वारा ब्लैक लिस्टेट किया जा सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आतंकी संगठनों पर समुचित कार्रवाई न करने के लिए पाकिस्तान को FATF ने पहले से ही ग्रे लिस्ट में डाला हुआ है।

पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डालने के बाद उसे जैश और लश्कर के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था। एशिया-पैसिफिक ग्रुप ने पाकिस्तान को जैश और लश्कर के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए 27 एक्शन प्लान बताए गये थे। जिसके बाद ने पाकिस्तान को बताया गया है कि जिन 27 एक्शन प्लान पर उसे काम करने को कहा गया था, उसमें से 18 पर उसकी कार्रवाई संतोषजनक नहीं है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एशिया-पैसिफिक ग्रुप मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फाइनेंसिंग और जनसंहार करने वाले हथियारों की ख़रीद के लिए होने वाली वित्तीय लेन-देन को रोकने वाली एक संस्था है और इस संस्था की रिपोर्ट के आधार पर ही FATF कार्रवाई करती है। बता दें कि FATF दुनिया भर में आतंकी संगठनों को दी जाने वाली वित्तीय मदद पर नज़र रखने वाली एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है।

जानकारी के मुताबिक़, एशिया-पैसिफिक ग्रुप ने पाकिस्तान से मांग की है कि वो ISIS, अल कायदा, जमात-उद-दावा, फलह-ए-इंसानियत फाउंडेशन, लश्कर-ए-तैय्यबा, जैश-ए-मोहम्मद, हक्कानी नेटवर्क और तालिबान से जुड़े लोगों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई करे। इतना ही नहीं, पाकिस्तान से कहा गया है कि उसकी जांच एजेंसियां मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग को रोकने के लिए कुछ सख्त क़दम उठाए और उसका असर साफ़-साफ़ दिखाई देना चाहिए।

आर्थिक रूप से बर्बादी की कगार पर पहुंचे पाकिस्तान को सितम्बर तक की समय सीमा दी गई है कि वो आतंकी संगठनों के ख़िलाफ़ कोई ठोस कार्रवाई करे, क्योंकि इसके बाद पाकिस्तान के मामले पर अन्तिम फ़ैसला लेने के लिए FATF की बैठक होगी। इधर, FATF की अगली बैठक ओरलैंडों में 16 से 21 जून के बीच होगी। इस बैठक में पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट करने का प्रस्ताव लाया जा सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कि FATF की ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान पहले से ही है। पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर आने के लिए FATF के 36 में से 15 सदस्यों का वोट मिलना ज़रूरी है। वहीं पाकिस्तान को FATF में ब्लैकलिस्ट होने से बचने के लिए कम से कम 3 सदस्यों के वोट की ज़रूरत है। बता दें कि ओरलैंडों में होने वाली बैठक में पाकिस्तान को किस लिस्ट में रखना है इसकी कार्रवाई पूरी हो जाएगी, लेकिन इसकी औपचारिक घोषणा पेरिस में अक्टूबर में होने वाली FATF की बैठक में की जाएगी।

आतंकी संगठनों पर कोई कार्रवाई ना करने के कारण पाकिस्तान को जून 2018 में FATF की ग्रे लिस्ट में डाल दिया गया था। अगर पाकिस्तान को FATF ब्लैक लिस्टेड कर देता है, तो पाकिस्तान पर इसके गहरे आर्थिक प्रभाव होंगे। FATF की ब्लैक लिस्ट में शामिल होने के बाद पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मिलने वाले 6 अरब डॉलर के कर्ज़ पर भी रोक लग सकती है, क्योंकि पाकिस्तान को यदि आईएमएफ से लोन चाहिए तो उसे FATF से क्लीयरेंस मिलना बहुत ज़रूरी है। दरअसल, आईएमएफ ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि पाकिस्तान को मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग के ख़िलाफ़ वास्तविक क़दम उठाने होंगे।

लेकिन आतंक और आतंकियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने में नाकामयाब रहने के बाद पाकिस्तान ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए भारत पर दोषारोपण करना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का इस बारे में कहना है कि भारत, पाकिस्तान को FATF में ब्लैक लिस्ट करवाना चाहता है। दरअसल, OIC में भारत को मिले समर्थन से पाकिस्तान तिलमिला गया है। इस्लामिक देशों के बीच भारत के बढ़ते सम्बन्धों के कारण पाकिस्तान को डर है कि मोदी सरकार पाकिस्तान को FATF में ब्लैक लिस्ट कराने में सफ़ल रही तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बर्बाद होने से कोई नहीं रोक सकता है।