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मोदी सरकार की ‘आर्थिक स्ट्राइक’ से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बड़ा घाटा!

11 Jun 2019
थोड़ी ‘क़ीमत’ चुकाकर प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान को दिया बड़ा ‘झटका’!

JUNE 11 (WTN) – पुलवामा आतंकी हमले के बाद मोदी सरकार की कूटनीतिक कार्रवाइयों से पाकिस्तान अभी तक उबर नहीं सका है। प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह से पाकिस्तान को सामरिक, कूटनीतिक और आर्थिक रूप से घेरा है उससे पाकिस्तान को बहुत बड़ा झटका लगा है। बदतर आर्थिक स्थिति पर पहुंच चुकी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को मोदी सरकार की 'आर्थिक स्ट्राइक' से भी काफ़ी नुकसान उठाना पड़ रहा है और पाकिस्तान की आर्थिक हालत अब बस अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के सहारे ही टिकी है, क्योंकि चीन और पाकिस्तान के बाक़ी अन्य मित्र देशों ने भी पाकिस्तान को सहायता देने से हाथ खड़े कर दिये हैं।
 
दरअसल, भारत ने पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ व्यापार में सीमा शुल्क को 200 प्रतिशत कर दिया था। मोदी सरकार की इस आर्थिक स्ट्राइक का पाकिस्तान पर ऐसा नकारात्मर असर पड़ा है कि भारत में पाकिस्तान से होने वाला वाणिज्यक आयात इस साल मार्च में 92 प्रतिशत घटकर सिर्फ़ 28.4 लाख डालर रह गया है। साफ़ है कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा 200 प्रतिशत सीमा शुल्क लगाये जाने के कारण भारत में पाकिस्तान से होने वाले निर्यात कम हुआ है और इसका नुकसान पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को उठाना पड़ रहा है।

जैसा कि आप जानते हैं कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद पूरा देश गुस्से में था। देश के लोगों की इच्छा थी कि मोदी सरकार, पाकिस्तान को उसकी हरकतों के लिए कड़ी से कड़ी सजा दे। देश की जनभावनाओं को समझते हुए मोदी सरकार ने पाक अधिकृत कश्मीर के बालाकोट में एअर स्ट्राइक कर जैश-ए-मोहम्मद के कई आतंकियों को मार गिराने का दावा किया।

प्रधानमंत्री मोदी का मानना था कि एअर स्ट्राइक से तो आतंकियों का ख़ात्मा किया जाएगा, लेकिन पाकिस्तान को उसकी आतंक समर्थित हरकतों के लिए सबक सिखाना उससे पहले ज़रूरी है। इसी के चलते मोदी सरकार ने पाकिस्तान को दिया मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) का दर्जा भी वापस ले लिया।

प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि पाकिस्तान को आर्थिक रूप से कमज़ोर करना सबसे ज़्यादा भारत के लिए फ़ायदेमंद है, क्योंकि ऐसा होने से पाकिस्तान धीरे-धीरे टूट की कगार पर आ जाएगा। स्वाभाविक है कि ग़रीबी बढ़ने के कारण पाकिस्तान में चल रहे अलगाववादी आंदोलनों को हवा मिलेगी, और पाकिस्तान में आंतरिक अशांति फैलेगी। 14 फरवरी को हुए पुलवामा आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने 16 फरवरी को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कड़ी आर्थिक कार्रवाई की। इस कार्रवाई में भारत ने पाकिस्तान से आयातित सभी वस्तुओं पर सीमा शुल्क बढ़ाकर 200 प्रतिशत कर दिया। इन वस्तुओं में कपास, ताजे फल, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पादन और खनिज आदि शामिल हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान से मार्च 2018 में आयात 3.46 करोड़ डॉलर का था। लेकिन इस साल मार्च में पाकिस्तान से कुल आयात सिर्फ़ 28.4 लाख डॉलर का हुआ, जिसमें भी 11.9 लाख डॉलर का कपास आयात किया गया। हालांकि, इस दौरान भारत का पाकिस्तान में होने वाला निर्यात बढ़ा है। पूरे वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान भारत का पाकिस्तान को निर्यात 7.4 प्रतिशत बढ़कर 2 अरब डालर रहा। यानि कि मोदी सरकार की आर्थिक कूटनीति से भारत का पाकिस्तान को होने वाला आयात तो बढ़ा, लेकिन पाकिस्तान से भारत को होने वाला आयात लगभग बंद होने की कगार पर आ चुका है।

हालांकि, पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए मोदी सरकार ने जो कार्रवाई की है उससे पाकिस्तान से होने वाला आयात न्यूनतम स्तर पर आ गया है जिसके कारण भारत में पाकिस्तान से आयातित सामान की किल्लत बढ़ गई है। भारत जो सामान पाकिस्तान से मंगाता है वो अब भारतीयों के लिए महंगा पड़ता है, क्योंकि भारत ने पाकिस्तान से आयातित सामान पर सीमा शुल्क 200 प्रतिशत कर दिया है। लेकिन इससे कुछ ज़्यादा नुकसान भारतीय अर्थव्यस्था को नहीं है।

पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने जिस तरह से पाकिस्तान की घेराबंदी की है, उससे पाकिस्तान को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं पाकिस्तान की जवाबी आर्थिक कार्रवाई से भारत को कुछ ज़्यादा नुकसान नहीं हुआ है। चुंकि भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान की तुलना में काफ़ी बड़ी है इसलिए भारत को पाकिस्तान की तुलना में होने वाला नुकसान बहुत कम है। दरअसल, पाकिस्तान ने दिल्ली-काबुल के बीच वाणिज्यिक उड़ानों के लिए खुद के हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया है, जिसके बाद भारत को अफगानिस्तान से होने वाला निर्यात 30 प्रतिशत कम हो गया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि काबुल-दिल्ली वाणिज्यिक उड़ानों के लिए अभी ईरान और चीन के हवाई रास्तों का इस्तेमाल भारत और अफगानिस्तान कर रहे हैं। चुंकि यह हवाई रास्ता लम्बा है और यहां से समय भी ज़्यादा लगता है, इसलिए इस रास्ते से अफगानिस्तान से निर्यात भारत को महंगा पड़ता है। इसलिए अफगानिस्तान का भारत को होने वाला निर्यात 30 प्रतिशत कम हो गया है। खैर लेकिन मोदी सरकार की कूटनीति से जिस तरह से पाकिस्तान की आर्थिक हालत दिनों दिन ख़राब होती जा रही है, उससे एक ना एक दिन पाकिस्तान को सबक ज़रूर मिलेगा कि आतंक और आतंकियों को बढ़ावा देना और भारत से दुश्मनी मोल लेना उसके लिए कितना भारी है।