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रणनीति के तहत अशोक गहलोत के रूप में चल सकते हैं राहुल गांधी नया ‘दांव’!

20 Jun 2019
गांधी परिवार के वफ़ादारअशोक गहलोत को मिल सकती है कांग्रेस अध्यक्ष की कमान

JUNE 20 (WTN) – लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस में 'मंथन' जारी है। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में जिस तरह से कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है, उससे राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं। दस साल की सत्ता के बाद कांग्रेस को साल 2014 के लोकसभा चुनाव में सत्ता विरोधी लहर का सामना करना, और कांग्रेस सिर्फ़ 44 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी थी। 2019 के लोकसभा में कांग्रेस को 'आशा' थी कि मोदी सरकार को भी सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ेगा और उसे हार नसीब होगी। लेकिन कांग्रेस ने जो सोचा वो नहीं हुआ, और 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सिर्फ़ 52 सीटों पर ही सिमट गई।

इस लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 'नैतिक ज़िम्मेदारी' लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़े की पेशकश की थी। लेकिन जैसा कि आप जानते हैं कि कांग्रेस पार्टी में गांधी परिवार ही पार्टी में 'एकता' की धुरी है। ऐसे में तमाम कांग्रेसी नेताओं ने 'एकसुर' से राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष बने रहने की गुजारिश की थी, लेकिन राजनीति में धीरे-धीरे 'परिपक्व' होते राहुल गांधी की 'रणनीति' कुछ और ही लगती है इसलिए उन्होंने अध्यक्ष बने रहने से 'इनकार' कर दिया।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जल्द ही कांग्रेस के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह काफ़ी लम्बे समय बाद होगा जब कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय गांधी परिवार से नहीं होगा। वैसे कांग्रेस में कई नेता हैं जो कि अशोक गहलोत से ज़्यादा वरिष्ठ और अनुभवी हैं, लेकिन अशोक गहलोत को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के पीछ कई 'कारण' हैं।

दरअसल, सबसे बड़ी बात है कि राहुल गांधी किसी ऐसे व्यक्ति को कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना चाहेंगे जो कि गांधी परिवार के प्रति 'वफ़ादार' हो साथ ही बाक़ी सभी नेताओं को भी साथ लेकर चल सके। इस मामले में यदि अशोक गहलोत की बात की जाए तो साफ़ है कि वे गांधी परिवार के सबसे क़रीबी नेताओं में से एक हैं। गहलोत ने गांधी परिवार की तीन पीढ़ियों के साथ काम किया है। अशोक गहलोत इन्दिरा गांधी, राजीव गांधी और नरसिम्हा राव सरकार में केन्द्र में मंत्री रह चुके हैं। यानी कि साफ़ है कि वे राहुल गांधी के पिता और दादी के साथ काम कर चुके हैं तो ऐसे में राहुल गांधी को उन पर 'काफ़ी भरोसा' होगा। 

वहीं कांग्रेस पार्टी में गहलोत को एक 'साफ़' छवि वाले नेता के रूप में जाना जाता है। विपक्ष के आरोपों को छोड़ दिया जाए, तो इतने सालों की राजनीति में अशोक गहलोत पर अभी तक कोई 'गम्भीर आरोप' नहीं लगा है और वे हमेशा से विवादों से दूर भी रहे हैं। एक नेता के रूप में कांग्रेस पार्टी में उनका 'रुतबा' काफ़ी बढ़ा है। गुजरात विधानसभा चुनाव में जिस तरह से 'रणनीति' बनाकर उन्होंने भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी, उससे राहुल गांधी उनसे काफ़ी 'प्रभावित' हैं।

'अनुभव' के मामले में भी अशोक गहलोत कांग्रेस के काफ़ी नेताओं पर भारी हैं। अशोक गहलोत राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री बन चुके हैं। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में अशोक गहलोत ने राजस्थान में कांग्रेस की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। राष्ट्रीय स्तर पर भी कांग्रेस में गहलोत काफ़ी काम कर चुके हैं, जिसके कारण गांधी परिवार को उन पर काफ़ी 'भरोसा' है।

देखा जाए तो अशोक गहलोत का राजनीतिक सफ़र 40 साल से भी ज़्यादा का है। राहुल गांधी चाहेंगे कि 'संकट' से दौर से गुजर रही कांग्रेस की कमान ऐसे व्यक्ति को सौंपी जाए, जो वरिष्ठ, अनुभवी और सक्रिय हो। यानी कि राहुल गांधी के 'सम्भावित पैमाने' पर अशोक गहलोत खरे उतरते नज़र आ रहे हैं। कांग्रेस पार्टी में वैसे तो अध्यक्ष पद के कई दावेदार हैं, लेकिन राहुल गांधी, अशोक गहलोत को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर उनकी 'साफ़ छवि' का फ़ायदा उठाना चाहेंगे।
 
गांधी परिवार के 'क़रीबी' अशोक गहलोत यदि कांग्रेस अध्यक्ष बनते हैं तो यह राहुल गांधी के लिए काफ़ी 'फ़ायदेमंद' रहेगा। सबसे पहले तो कांग्रेस अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी से 'मुक्त' होकर राहुल गांधी पूरे देश में घूमकर एक बार फ़िर से कांग्रेस को 'मज़बूत' करने का काम कर पाएंगे, जिसमें अनुभवी अशोक गहलोत उनका 'मार्गदर्शन' कर सकते हैं। वहीं अशोक गहलोत यदि कांग्रेस अध्यक्ष बनते हैं तो यह तय है कि वे हर 'फ़ैसले' गांधी परिवार को 'विश्वास' में लेकर ही लेंगे, ऐसे में राहुल गांधी का 'अप्रत्यक्ष' रूप से पार्टी पर 'नियंत्रण' भी रहेगा। यानी कि कहा जा सकता है कि अशोक गहलोत को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना राहुल गांधी का एक 'सूझबूझ' भरा फ़ैसला होगा।