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खाड़ी में बढ़ा तनाव, भारत में बढ़ सकती है महंगाई!

22 Jun 2019
ईरान-अमेरिका ‘तनाव’ के कारण ‘महंगा’ हुआ क्रूड ऑयल, भारत के फॉरेन रिज़र्व पर पड़ेगा असर
 
JUNE 22 (WTN) – ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ रहे तनाव के कारण भारत में महंगाई बढ़ सकती। यह पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि आख़िर ऐसा क्यों। दरअसल, ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के हालात के कारण कच्चे तेल की क़ीमतों में वृद्धि हो रही है। यदि ऐसा होना जारी रहा तो भारत पर इसका बड़ा असर दिखाई देखा। दरअसल, होर्मुज जलडमरू मध्य पर ईरान द्वारा अमेरिकी नौसेना के एक ड्रोन को मार गिराए जाने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है।

ईरान द्वारा अमेरिका का ड्रोन मार गिराने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अख़्तियार करने की जो धमकी दी है, उससे खाड़ी क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई है। कहा जा रहा है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध छिड़ता है तो इससे कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट आ सकती है और उसके दाम काफ़ी बढ़ सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह भारत के लिए चिंता का कारण है, क्योंकि भारत अपनी तेल ज़रूरतों के लिए पूरी तरह से तेल आयात पर निर्भर है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत अपने कच्चे तेल की ज़रूरत का 90 प्रतिशत तेल आयात करता है। भारत कच्चे तेल के लिए खाड़ी देशों पर ज़्यादातर निर्भर है। ईरान द्वारा अमेरिका के ड्रोन को मार गिराए जाने के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा है, जिससे ब्रेंट क्रूड ऑयल की क़ीमत में अचानक 5 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया, जो कि जनवरी के बाद से सबसे ज़्यादा है। कच्चे तेल की क़ीमतों में अचानक हुई वृद्धि से भारत ने चिंता जाहिर की है, क्योंकि यदि क्रूड ऑयल की क़ीमतों में वृद्धि होती रही तो भारत में पेट्रोल और डीज़ल महंगा होना तय है।

अमेरिका प्रतिबंधों के कारण भारत, ईरान से कच्चे तेल का आयात नहीं कर पा रहा है, जिसके कारण भारत को सऊदी अरब और अन्य तेल निर्यातक देशों से इस कोटे की पूर्ती करना पड़ रही है। एक तो कच्चे तेल की क़ीमतों में अचानक वृद्धि और फ़िर ईरान से तेल आयात बंद होने के बाद भारत ने तेल निर्यातक देशों के समूह ओपेके के एक मुख्य सदस्य सऊदी अरब से कच्चे तेल की क़ीमतों पर काबू रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने को कहा है ताकि भारत को होने वाले परेशानियां कम हों।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ब्रेंट क्रूड ऑयल की क़ीमत फ़िलहाल 65 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गई है। वैसे जून के शुरुआत में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की क़ीमतें स्थिर रही थीं, जिसके कारण तब आयात किये गये कच्चे तेल के कारण भारत में इस समय तेल की क़ीमतें नियंत्रित हैं। लेकिन जून के चौथे सप्ताह में कच्चे तेल की क़ीमतों में वृद्धि के परिणाम जुलाई के दूसरे सप्ताह तक सामने आएंगे। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की क़ीमतों में वृद्धि होने से भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। ऐसा इसलिए, क्योंकि कच्चे तेल को आयात करने में भारत को अपने काफ़ी विदेशी मुद्रा भण्डार को ख़र्च करना पड़ेगा, जिसका प्रतिकूल असर भारत के फॉरेन रिज़र्व पर पड़ेगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि क्रूड ऑयल महंगा होता है तो इससे भारत में पेट्रोल और डीज़ल के दामों में वृद्धि होना स्वाभाविक है। वहीं डीज़ल महंगा होने से महंगाई बढ़ना तय है। डीज़ल महंगा होने से परिवहन का व्यय बढ़ेगा, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की वस्तुओं के दामों पर होगा। यानि कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता है और युद्ध होता है तो क्रूड ऑयल की क़ीमतों में कम से कम 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। ऐसे में भारत में पेट्रोल और डीज़ल उसी अनुपात में महंगा होगा और देश में महंगाई बढ़ेगी। अब देखना होगा कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध छिड़ता है तो भारत सबसे पहले तो युद्ध की स्थिति में खाड़ी से क्रूड ऑयल निर्यात कर पाता है कि नहीं, और यदि कर पाता है तो महंगे क्रूड ऑयल के कारण भारत में कितनी महंगाई बढ़ती है।