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​क्या जिम्मेदारी से भाग रहे हैं राहुल गांधी?

26 Jun 2019
कांग्रेस अध्यक्ष रहें या ना रहें फ़िर भी विपक्ष के ‘निशाने’ पर रहेंगे राहुल गांधी!

JUNE 26 (WTN) – आपातकाल के बाद हुए लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी को इतनी बुरी तरह से हार का सामना नहीं करना पड़ा था, जितनी बुरी तरह से 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की हार हुई है। 2014 में 44 और 2019 में सिर्फ़ 52 सीटों पर जीत हासिल करने वाली कांग्रेस पार्टी में इन दिनों सब कुछ सही नहीं चल रहा है। लोकसभा चुनाव में बुरी तरह से हार के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष बने रहने से इनकार कर दिया है। सोनिया गांधी समेत कांग्रेस के 51 लोकसभा सांसद भी राहुल गांधी को इस बात के लिए नहीं मना पा रहे हैं कि वे कांग्रेस अध्यक्ष बने रहें। इस बीच राहुल गांधी ने साफ़ कह दिया है कि वे अब कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बने रहना चाहते हैं, और पार्टी उनका विकल्प जल्द से जल्द तलाश करे। लेकिन इस सबके बीच बड़ा सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी ज़िम्मेदारियों से भाग रहे हैं?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद निराश राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़े की पेशकश की है, और कांग्रेस को एक महीने की मोहलत दी है कि पार्टी उनकी जगह पर किसी और को अध्यक्ष बनाए। कांग्रेस में नये अध्यक्ष के लिए चर्चाएं जारी है, लेकिन कोई नाम फाइनल नहीं हो पा रहा है। वैसे सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के कोई भी नेता नहीं चाहते हैं कि राहुल गांधी अध्यक्ष पद छोड़ें, लेकिन राहुल गांधी ने साफ़ कर दिया है कि वो अब कांग्रेस अध्यक्ष नहीं रहेंगे।

मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह, पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुशील कुमार शिन्दे, पूर्व केन्द्रीय मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के नामों पर विचार किया जा रहा है कि इनमें से कोई एक कांग्रेस अध्यक्ष बन सकता है। यह तय है कि जो भी कांग्रेस का अध्यक्ष बनेगा वो गांधी परिवार का क़रीबी होगी, ऐसे में कहा जा रहा है कि गांधी परिवार के क़रीबी होने और संगठन पर अच्छी पकड़ होने के कारण अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष बन सकते हैं।

यह तय है कि राहुल गांधी फ़िलहाल एक से दो साल तक कांग्रेस अध्यक्ष पद से दूर रहेंगे। लेकिन यदि राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष नहीं रहेंगे तो फ़िर वे इस दौरान करेंगे क्या। कयास लगाए जा रहे थे कि राहुल गांधी कांग्रेस संसदीय दल के नेता बनकर मोदी सरकार से दो-दो हाथ करेंगे, लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ। राहुल गांधी ना कांग्रेस अध्यक्ष रहेंगे और ना ही उन्होंने लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता की ज़िम्मेदारी सम्भाली है, तो ऐसे में हर किसी के दिमाग में यही सवाल है कि राहुल गांधी करेंगे क्या?

राजनीति के जानकारों के मुताबिक़ राहुल गांधी को इस समय मज़बूती के साथ कांग्रेस पार्टी की कमान सम्भालना चाहिए, लेकिन ऐसा करने के बजाय वे इससे भाग रहे हैं। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी क़रीब एक से दो साल तक कांग्रेस अध्यक्ष पद से दूरी बनाए रखेंगे। इस दौरान राहुल गांधी पूरे देश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मिलकर पार्टी को मज़ूबती देने के लिए चर्चा करेंगे। राहुल गांधी इस दौरान बिना पद के ही पूरे देश का दौरा करेंगे और कांग्रेसी कार्यकर्ताओं से मिलकर उनका हौंसला बढ़ाने की कोशिश करेंगे। सूत्रों के मुताबिक़ यह कांग्रेस पार्टी की रणनीति है कि राहुल गांधी बिना किसी पद पर रहे ही मोदी सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलेंगे।

चुंकि राहुल गांधी के पास कोई पद नहीं रहेगा, ऐसे में जो भी कांग्रेस अध्यक्ष होगा वो सत्ता पक्ष की निगाहों और निशाने पर रहेगा। बिना किसी पद के राहुल गांधी पूरे देश के दौरे के लिए ज़्यादा समय दे पाएंगे, वहीं पद ना होने से खुलकर कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं से चर्चा कर पाएंगे। लेकिन बिना पद के रहने पर राहुल गांधी पर आरोप लगेंगे कि मज़बूत सत्ता पक्ष के सामने जब एक मज़बूत विपक्षी नेता की ज़रूरत थी तो राहुल गांधी ने इस ज़िम्मेदारी को नहीं सम्भाला।
 
इसी कारण यह एक बड़ा सवाल है कि क्या राहुल गांधी अपने ज़िम्मेदारी से दूर तो नहीं भाग रहे हैं? लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक हार के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस की हार की ज़िम्मेदारी ली वहां तक तो सब ठीक था, लेकिन हार की ज़िम्मेदारी लेने के बाद राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने के लिए नये सिरे से शुरूआत करना चाहिए थी बजाय पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़े की पेशकश करके। यह सभी जानते हैं कि कांग्रेस पार्टी में गांधी परिवार ही कांग्रेस में एकता की धुरी है, यदि राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष नहीं रहेंगे तो इसका पार्टी पर कुछ तो असर ज़रूर पड़ेगा।

हां यह तय है कि जो भी कांग्रेस का अध्यक्ष बनेगा वो गांधी परिवार का क़रीबी होगा, और उसके द्वारा लिया गया हर फ़ैसला गांधी परिवार की सलाह या फ़िर कहें कि आदेश के बाद ही लिया जाएगा। जो भी कांग्रेस अध्यक्ष बनेगा उसके पास निर्णय लेने की नाममात्र की शक्ति होगी। ऐसे में कांग्रेस में बनने वाला नया अध्यक्ष सिर्फ़ नाम का ही अध्यक्ष होगा, क्योंकि उसके द्वारा लिये जाने वाले हर फ़ैसले पर गांधी परिवार की ही मुहर लगेगी। ऐसे में विपक्ष आरोप लगाएगा कि राहुल गांधी बिना ज़िम्मेदारी लिये ही कांग्रेस को चला रहे हैं।

राहुल गांधी के अध्यक्ष पद से हटने के बाद राहुल गांधी सीधे तौर पर भाजपा के निशाने पर आ जाएंगे। राहुल गांधी के इस्तीफ़े पर भाजपा आक्रामक होते हुए कहेगी कि राहुल गांधी ने हार स्वीकार कर ली है, और वे प्रधानमंत्री मोदी का सामना नहीं कर पा रहे हैं। बिना पद के भी राहुल गांधी कांग्रेस में उतने ही शक्तिशाली रहेंगे जितने कि वे अभी हैं, लेकिन राहुल गांधी के बिना पद के होने पर भाजपा साफ़ तौर पर उन्हें निशाने पर लेते हुए कहेगी कि राहुल गांधी ज़िम्मेदारियों से भाग रहे हैं। ख़ैर अब देखते हैं कि कांग्रेस पार्टी का नया अध्यक्ष कौन बनेगा, और राहुल गांधी बिना पद के कांग्रेस पार्टी को कितना मज़बूत कर पाते हैं।