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​आपके कम्प्यूटर पर है किसी की नज़र!

02 Jul 2019
जानिए क्यों कर सकती है सरकार आपके कम्प्यूटर और डेटा की जांच?
 
JULY 02 (WTN) – यदि आप यह सोच रहे हैं कि आपके कम्प्यूटर पर किसी की नज़र नहीं है, तो आपका यह सोचना ग़लत है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आपके कम्प्यूटर की निगरानी और डेटा की जांच का अधिकार 10 केन्द्रीय एजेंसियों को है। दिसम्बर 2018 में केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी करते हुए देश की 10 केन्द्रीय एजेंसियों को यह अधिकार दिया था कि वे किसी भी कम्प्यूटर के डेटा को चेक कर सकती हैं।
 
अधिसूचना के तहत इंटेलिजेंस ब्यूरो से लेकर NIA तक दस केन्द्रीय एजेंसियों को किसी भी कम्प्यूटर में मौजूद, रिसीव और स्टोर किए गए डेटा समेत किसी भी तरह की जानकारी हासिल करने का अधिकार है। यह दस एजेंसियां हैं; इंटेलिजेंस ब्यूरो, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, सेन्ट्रल टैक्स बोर्ड, राजस्व खुफिया निदेशालय, केन्द्रीय जांच ब्यूरो, एनआईए, कैबिनेट सचिवालय (आर एण्ड एडब्ल्यू), डायरेक्टरेट ऑफ़ सिग्नल इंटेलिजेंस (जम्मू-कश्मीर, नॉर्थ-ईस्ट और आसाम के क्षेत्रों में) और दिल्ली पुलिस कमिश्नर।

इस बारे में सरकार का तर्क है कि कम्प्यूटर या फोन पर मेल, मैसेज, डेटा इंटरसेप्ट करने के लिए एजेंसियों को कोई ब्लैंकेट इजाजत नहीं दी गई है। सरकार का कहना है कि आजकल अपराधी आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हैं, जिसके कारण उन पर निगरारी रखने, और अपराध होने पर सबूतों के लिए आईटी अधिनियम के तहत केन्द्रीय एजेंसियों को कई तरह की शक्तियां देना ज़रूरी है। जैसा कि आप जानते हैं कि अब डेटा को एनक्रिप्टेड (जिसे कोई नहीं पढ़ सकता) फॉर्म में भेजा जा रहा है, इसके लिए इन एजेंसियों को इस तरह के अधिकार दिये गये हैं।

ऐसा नहीं है कि सरकार के इस फ़ैसले का विरोध नहीं हुआ हो। कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों ने सरकार के इस फ़ैसला का काफ़ी विरोध किया है। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर कर इसे चुनौती दी गई है। जिसमें कहा गया है कि सरकार की ओर से जारी किया गया यह आदेश लोगों की निजता का उल्लंघन है। हालांकि, इस बारे में सरकार की राय है कि केन्द्रीय एजेंसियों को जो अधिकार दिये गये हैं वो एक सीमा में हैं, और निजता के अधिकार की रक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षा क़ानून मौजूद हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सूचना प्रौद्योगिकी कानून, 2000 की धारा 69 के तहत सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को किसी कम्प्यूटर सिस्टम में तैयार, पारेषित, प्राप्त या भण्डारित किसी भी प्रकार की सूचना के इंटरसेप्शन, मॉनिटरिंग और डीक्रिप्शन की अनुमित होगी। सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 69 किसी कम्प्यूटर संसाधन के जरिए किसी सूचना पर नज़र रखने, या उन्हें देखने के लिए निर्देश जारी करने की शक्तियों से जुड़ी है। वहीं पहले के एक आदेश के मुताबिक, केन्द्रीय गृह मंत्रालय को भारतीय टेलीग्राफ क़ानून के प्रावधानों के अंतर्गत फोन कॉलों की टैपिंग और उनके विश्लेषण के लिए खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों को अधिकृत करने या मंज़ूरी देने का भी अधिकार है।

यानि की साफ़ है कि ज़रूरत पड़ने पर 10 केन्द्रीय जांच एजेंसिया आपके कम्प्यूटर या डेटा की जानकारी हासिल कर सकती हैं। जानकारों का मानना है कि इस तरह के अधिकार लगभग हर देश की सरकार के पास होते हैं ताकि वो अपराधियों पर निगरानी रख सके और अपराध होने पर उन्हें पकड़ भी सके। भारत हमेशा से ही आतंकियों के निशाने पर रहा है, ऐसे में आतंकियों के साथ-साथ आर्थिक अपराधियों के बारे में भी पूरी जानकारी जुटाने के लिए केन्द्रीय एजेंसियों के पास कम्प्यूटर या डेटा की जानकारी हासिल करने के अधिकार होना ज़रूरी है। लेकिन आपको घबराने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि यदि आपने कोई भी ग़लत काम नहीं किया है तो आपके कम्प्यूटर और डेटा की जानकारी को कोई भी हासिल नहीं कर सकता है, जब तक कि आप खुद ऐसा ना करें या फ़िर लापरवाही ना बरतें।