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यदि ऐसा रहा तो जल्द बर्बाद हो जाएगी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था!

10 Jul 2019
अब बस ‘सख़्त क़दम’ ही बचा सकते हैं पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को!

JULY 10 (WTN) – आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पूरी दुनिया में बदनाम पाकिस्तान ने यदि जल्द ही कोई क़ारगर उपाय नहीं किये तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कभी भी बर्बाद हो सकती है। पाकिस्तान के आर्थिक हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि वहां की जनता का महंगाई के कारण जीना दूभर हो गया है। इमरान ख़ान के प्रधानमंत्री बनने के बाद से तो पाकिस्तान की आर्थिक हालत और भी ख़राब हो गई है। हालात यह हैं कि से पिछले 10 महीने में पाकिस्तानी रूपये में क़रीब 30 प्रतिशत की गिरावट आई है।

18 अगस्त 2018 को इमरान ख़ान, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे। उस समय एक अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले पाकिस्तानी रूपया 123 के स्तर पर था। जबकि आज की तारीख़ में पाकिस्तानी रुपया एक अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले 158 पर पहुंच गया है। पाकिस्तानी अर्थशास्त्र के जानकारों के अनुसार पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के इतिहास में इतनी छोटी अवधि में इतनी बड़ी गिरावट पहली बार हुई है। साफ़तौर पर इसमें प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की जवाबदेही सामने आती है, क्योंकि पाकिस्तान की मुद्रा रूपया पूरी एशिया में सबसे ख़राब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गई है।

पाकिस्तान की आर्थिक हालत दिनों-दिन ख़राब होती जा रही है। इसी के मद्देनज़र अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) ने पाकिस्तान को चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यदि समय रहते पाकिस्तान ने अर्थव्यवस्था को लेकर कोई ठोस क़दम तुरन्त नहीं उठाए तो पाकिस्तान की आर्थिक हालत और भी ज़्यादा ख़राब हो सकती है, और यदि ऐसा होता है तो इससे पाकिस्तान की ग़रीब आम जनता को भीषण महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।

पाकिस्तान की आर्थिक हालत इतनी ख़राब हो चुकी है कि नक़दी संकट से उबरने के लिए पाकिस्तान को आईएमफ से 6 अरब डॉलर यानी कि 41 हज़ार करोड़ रूपयों का बैलआउट पैकेज लेना पड़ा है। लेकिन इस सबके बीच, आईएमएफ ने पाकिस्तान के बारे में बताया कि बड़ी वित्तीय ज़रूरतों, कमज़ोर और असंतुलित विकास के कारण पाकिस्तान आर्थिक मोर्चे पर काफी चुनौतियों का सामना कर रहा है।

आईएमएफ के मुताबिक़ इस सबसे निपटने के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को टैक्स के जरिये राजस्व को बढ़ाना होगा। वहीं इस समय पाकिस्तान को आर्थिक असंतुलन को सही करने की भी काफ़ी ज़रूरत है, क्योंकि ऐसा किये बिना पाकिस्तान की अर्थव्यस्था पटरी पर नहीं आ सकती है। भुगतान संतुलन का संकट पैदा ना हो इसके लिए पाकिस्तान को विदेश मुद्रा भण्डार बढ़ाने की ख़ासी ज़रूरत है। आईएमएफ ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जल्द से जल्द सख़्त मौद्रिक नीतियां नहीं अपनाई गईं तो पाकिस्तान में महंगाई अनियंत्रित हो जाएगी।

आईएमएफ ने पाकिस्तान से साफ़ कह दिया है कि यदि इनमें से कोई भी क़दम पाकिस्तान ने समय पर सख़्ती से नहीं उठाए तो इससे पाकिस्तान की आर्थिक स्थिरता पर बड़ा ख़तरा खड़ा हो जाएगा, और ऐसे में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को डूबने से बचाना काफ़ी मुश्किल हो जाएगा। इस सबके बीच पाकिस्तान में रूपये का गिरना लगातार जारी है। कहा जा रहा है कि यदि पाकिस्तान की अर्थव्यस्था के यही हालात रहे तो साल के आख़िरी तक पाकिस्तानी रूपया अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले 175 से 180 तक जा सकता है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के जो हालात इस समय हैं, उससे रूपये की गिरावट थमने की उम्मीद नज़र नहीं आ रही है।

दरअसल, पाकिस्तान के निर्यात में काफ़ी गिरावट आई है, जिसके कारण पाकिस्तान के पास भुगतान के लिए डॉलर की कमी होती जा रही है। लगातार बढ़ते भुगतान संतुलन के कारण पाकिस्तान को डॉलर ख़रीदना पड़ेगा। जब पाकिस्तान भुगतान संतुलन के लिए डॉलर ख़रीदेगा तो स्वाभाविक है कि पाकिस्तानी रूपये में गिरावट आएगी, और जब रूपये में गिरावट आएगी तो महंगाई बढ़ेगी।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान की वर्तमान आर्थिक हालत के लिए पाकिस्तान ख़ुद ज़िम्मेदार है। जानकारों के मुताबिक़, चीन ने पाकिस्तान को योजनाबद्ध तरीक़े से इस तरह से कर्ज़ के बोझ में डाल दिया है, जिससे आने वाले कई सालों तक इस कर्ज़ का बोझ पाकिस्तान को सहना है। इस समय पाकिस्तान पर चीन का क़रीब 50 बिलियन डॉलर का कर्ज है। पाकिस्तान से दोस्ती का दम भरने वाला चीन भी इस समय पाकिस्तान की कोई ठोस सहायता करता नज़र नहीं आ रहा है।

वहीं जैसा कि आप जानते हैं कि पाकिस्तान लगातार आतंकवाद तो बढ़ावा देता रहता है। पाकिस्तान की इन्हीं हरकतों के कारण एफएटीएफ ने जब से पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला है, तभी से पाकिस्तान को काफ़ी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि एफएटीएफ द्वारा ग्रे लिस्ट में डालने के बाद से पाकिस्तान की कर्ज़ लेने की सीमा तय हो गई है। यदि पाकिस्तान ने आतंकवाद को लेकर अपने नज़रिये में बदलाव नहीं किया तो हो सकता है कि पाकिस्तान एफटीएफ की ब्लैक लिस्ट में भी आ जाए। और यदि ऐसा हो गया तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बर्बाद होने से कोई नहीं रोक सकता है।