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​‘असमंजस’ की स्थिति में कांग्रेस!

12 Jul 2019
राजनीतिक संकट के दौर में कांग्रेस को अध्यक्ष की सख़्त ज़रूरत

JULY 12 (WTN) – कांग्रेस पार्टी आज जिस दौर से गुजर रही है, इस दौर से तो पार्टी को आपातकाल के बाद भी नहीं गुजरना पड़ा था। लगातार दो लोकसभा चुनावों में बुरी तरह से हार के बाद कहा जा सकता है कि इन दिनों कांग्रेस पार्टी अपने सबसे ख़राब दौर से गुजर रही है। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सिर्फ़ 44 सीटों पर सिमट गई थी तो वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के 52 प्रत्याशी ही चुनाव जीत सके। लगातार दो लोकसभा चुनावों में नेता प्रतिपक्ष बनने लायक तक सीटें नहीं जीतने वाली कांग्रेस पार्टी के सामने इस समय सबसे बड़ा संकट है पार्टी को एकजुट रखने के लिए नये अध्यक्ष का चुनाव।
 
2019 के लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नाराज़ और निराश होकर अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है, और साफ़ कह दिया है कि वे कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बिल्कुल भी इच्छुक नहीं हैं। इतना ही नहीं राहुल गांधी ने यह भी कह दिया है कि ना ही वे और ना ही गांधी परिवार से कोई अन्य कांग्रेस अध्यक्ष बनेगा। वहीं राहुल गांधी ने खुद को और पूरे गांधी परिवार को नया कांग्रेस अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया से दूर रहने की बात भी कह दी है।
 
इस समय कांग्रेस पार्टी में कोई भी अध्यक्ष नहीं है, ऐसे में कांग्रेस पार्टी को इसका ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ रहा है। कर्नाटक और गोवा में जिस तरह से कांग्रेस पार्टी के विधायकों ने विद्रोह कर दिया है, उससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि कांग्रेस में अध्यक्ष ना होने का नतीज़ा उसे देखना पड़ रहा है।
 
कहने को तो मोतीलाल वोहरा कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष हैं, लेकिन उनकी उम्र और उनकी सक्रियता को देखते हुए वे कांग्रेसी विधायकों को एकजुट करने में सक्षम नहीं दिखाई दे रहे हैं। अब जबकि कांग्रेस पार्टी में टूट हो रही है, कार्यकर्ता निराश हैं और पार्टी दिशाविहीन होती जा रही है। ऐसे में क्या खुद राहुल गांधी को आगे आकर पार्टी की कमान नहीं सम्भालना चाहिए?
 
हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि कांग्रेस में जो भी अध्यक्ष बनेगा वो गांधी परिवार का क़रीबी होगा यह तय है। नये कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा जो भी फ़ैसले लिये जाएंगे वो सभी गांधी परिवार की सहमति के बिना सम्भव नहीं होंगे। ऐसे में जब आख़िरकार हर फ़ैसला गांधी परिवार को ही करना है, तो फ़िर क्यों नहीं राहुल गांधी सीधे तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी लेते हैं।

लोकसभा चुनाव में हार के बाद से कांग्रेस पार्टी में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कर्नाटक और गोवा में कांग्रेस विधायकों पर पार्टी आलाकमान की पकड़ नहीं दिख रही है। वहीं मध्य प्रदेश और राजस्थान में कभी भी अपने-अपने नेता को मुख्यमंत्री बनाने के लिए विधायक विद्रोह कर सकते हैं। कांग्रेस की वर्तमान की और सम्भावित परेशानियों को देखते हुए यह ज़रूरी है कि जल्द से जल्द कांग्रेस में कोई अध्यक्ष बने। यदि ऐसा नहीं होता है कि कांग्रेस की स्थिति और भी ख़राब होती जाएगी।

इसी साल महाराष्ट्र और कुछ अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनाव के लिए रणनीति बनाने और उस पर अमल कराने के लिए एक अदद अध्यक्ष की ज़रूरत कांग्रेस पार्टी को है। पहले से ही कमज़ोर कांग्रेस पार्टी को यदि समय रहते कोई कद्दावर नेता अध्यक्ष के रूप में नहीं मिला तो आने वाले समय में कांग्रेस पार्टी के सामने कई अन्य राज्यों में भी संकट खड़ा हो सकता है।
 
निराशा के दौर से गुजर रही कांग्रेस पार्टी को इस स्थिति से सिर्फ़ और सिर्फ़ गांधी परिवार ही बाहर निकाल सकता है। चुनाव में हार और जीत चलती रहती है। जीत के बाद ज़िम्मेदारियां आती हैं तो वहीं हार के बाद समीक्षा होती है। भाजपा भी साल 2004 से 2014 तक विपक्ष में रही थी, लेकिन लगाकार दो लोकसभा चुनावों में हार के बाद भाजपा ने अपनी रणनीति में बदलाव किया, और उसका नतीजा सामने है कि भाजपा ने लगातार दो लोकसभा चुनावों में पूर्ण बहुमत हासिल किया।

दो लोकसभा चुनावों में हार के बाद राहुल गांधी जिस तरह से ज़िम्मेदारियों से दूर जा रहे हैं, वह कांग्रेस पार्टी के लिए अच्छा संकेत नहीं हैं। चलिए राहुल गांधी अध्यक्ष बनने को तैयार नहीं हैं, लेकिन पार्टी का नया अध्यक्ष कौन बने इस फ़ैसले में तो उन्हें भागीदार होना ही चाहिए, क्योंकि इस समय कांग्रेस पार्टी को एकजुट करने और कार्यकर्ताओं में उत्साह लाने के लिए जल्द से जल्द कांग्रेस को एक अध्यक्ष की ज़रूरत है।

अब देखना होगा कि कांग्रेस कार्यसमिति नया अध्यक्ष चुनने में कितना समय लगाती है। कांग्रेस वैसे भी अध्यक्ष चुनने में काफ़ी देर कर चुकी है, और इस प्रक्रिया में और देरी करना कांग्रेस के लिए आत्मघाती साबित होगा। लेकिन चलिए मान लिया कि कांग्रेस में नया अध्यक्ष चुन भी लिया गया तो क्या नया अध्यक्ष सभी को सर्वमान्य होगा। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि गांधी परिवार कांग्रेस अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया से अलग है ऐसे में जो भी नया अध्यक्ष बनेगा वो गांधी परिवार का क़रीबी रहेगा यह तय है, लेकिन वो गांधी परिवार द्वारा नामित नहीं होगा। ऐसे में गुटबाज़ी के बीच देखना होगा कि नया कांग्रेस अध्यक्ष सभी का मान्य होता है कि नहीं।