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सोशल मीडिया पर जासूसी की एक बड़ी अफ़वाह पर लगा विराम!

15 Jul 2019
सीबीडीटी ने किया स्पष्ट; नहीं होती टैक्स चोरी पता लगाने सोशल मीडिया पर जासूसी

JULY 15 (WTN) – कुछ समय पहले भारत में यह चर्चा ज़ोरों पर थी कि आयकर विभाग के अधिकारी आपकी अघोषित सम्पत्ति की जांच के लिए सोशल मीडिया के जरिये आपकी जासूसी कर रहे हैं। कहा यह भी जा रहा था कि आयकर विभाग आपके विदेशों में घूमने और महंगी ख़रीददारी की फ़ोटो पर निगरानी रखता है, और इसके लिए करोडों रूपये ख़र्च करके एक सॉफ्टवेयर भी बनाया गया है। लेकिन क्या आख़िर में सच में ऐसा हो रहा है कि आयकर विभाग, सोशल मीडिया के जरिये आपकी अघोषित सम्पत्ति की जासूसी कर रहा है? आख़िर में कितनी सच्चाई है इस ख़बर में, आइये आपको बताते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सीबीडीटी आयकर विभाग के लिए नीतियां बनाने वाला शीर्ष निकाय है। कुछ समय पहले देश में यह अफ़वाह थी कि आयकर विभाग, सोशल मीडिया पर लोगों की गतिविधियों पर नज़र रखे हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि औसतन हर भारतीय हर दिन क़रीब 4 घण्टे सोशल मीडिया पर समय बिताता है। भारतीय लोग सोशल मीडिया पर अपनी कई गतिविधियों की जानकारी साझा करते रहे हैं, जैसे उन्होंने क्या ख़रीदा, कहां पर घूमने गये आदि।

दरअसल, कुछ मीडिया रिपोर्टस थीं कि आयकर विभाग इनकम टैक्स चोरी पर लगाम लगाने के लिए बिग डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल करने जा रहा है। इसके लिए प्रोजेक्ट इनसाइट पर एक हज़ार करोड़ रूपये ख़र्च किये गये हैं। इस प्रोजेक्ट के जरिये लोगों की सोशल मीडिया नेटवर्किंग प्रोफ़ाइल पर नज़र रखी जाएगी। सोशल मीडिया पर लोगों द्वारा अपलोड की गई फ़ोटो और वीडियो के जरिये उनके ख़र्चों के तरीक़ों का पता लगा जाएगा। यदि किसी व्यक्ति द्वारा घोषित आय की तुलना में उसकी ख़रीदी और विदेश यात्रा में विसंगतियां पाई गईं तो सम्बन्धित व्यक्ति के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी।
 
सूत्रों के आधार पर यह भी दावा किया था कि आयकर विभाग एक मास्टर फाइस का भी इस्तेमाल कर सकता है, जिसमें व्यक्तियों और कॉरपोरेट के बारे में पूरी सूचनाएं और ब्योरा होगा। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य टैक्स चोरी करने वालों को पकड़ना, और इनकम टैक्स रिटर्न भरने और कर चुकाने वालों की संख्या में इज़ाफ़ा करना है। इनसाइट प्रोजेक्ट में समेकित सूचना प्रबंधन प्रणाली होगी, जिससे सही समय पर सही क़दम उठाने में मदद के लिए मशीन लर्निंग का प्रयोग किया जाएगा।
 
जैसा कि आप जानते हैं कि नई कार ख़रीदने और विदेश यात्रा पर जाने की जानकारी भारतीय लोग अधिकतर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं, लेकिन इस जानकारी को वो इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय नहीं बताते हैं। इसी आधार पर मीडिया में ख़बरें थीं कि सोशल मीडिया से हासिल जानकारी के जरिये ही आयकर विभाग इनकम की सही जानकारी नहीं देने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर सकता है।

लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया के जरिये लोगों की निगरानी नहीं की जा रही है। इसके साथ ही सीबीडीटी का कहना है कि उसे इस तरह के तरीक़े अपनाने की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि विभाग के पास बड़े लेनदेन से जुड़े विभिन्न आंकड़े विभिन्न एजेंसियों से आते हैं।

सीबीडीटी के मुताबिक़ इन आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए उसके पास एक मज़बूत व्यवस्था है। यही कारण है कि बड़े लेनदेन की जानकारी उसे उसके सोर्स से मिल जाती है। सीबीडीटी ने इस बात को भी स्पष्ट कर दिया है कि आयकर विभाग लोगों के फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम या अन्य सोशल मीडिया हैण्डल पर निगरानी नहीं रखता है ताकि उससे उनकी आय से जुड़ी गोपनीय जानकारी, या उनके ख़र्च के तौर-तरीकों पर नज़र रखी जा सके।

हालांकि, अब जबकि सीबीडीटी ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल सोशल मीडिया के जरिये लोगों की किसी भी तरह की जासूसी नहीं की जा रही है तो मीडिया की उन रिपोर्टस पर अब विराम लग जाना चाहिए, जिसमें दावा किया जा रहा था कि सोशल मीडिया के जरिये आपकी निगरानी आयकर विभाग कर रहा है। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि क़ानून के जानकारों के मुताबिक़, सोशल मीडिया से इस तरह जानकारी जुटाकर लोगों से टैक्स की मांग करना क़ानूनी तौर पर ठोस सबूत नहीं है।