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​पीपुल्स यूनिवर्सिटी में करगिल विजय दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन

26 Jul 2019
करगिल विजय दिवस पर पीपुल्स यूनिवर्सिटी ने दी वीर जवानों को श्रद्धांजलि

JULY 26 (WTN) – कहते हैं कि राष्ट्र सेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं होती है। राष्ट्र के लिए प्राण न्यौछावर करने का जिसे मौक़ा मिलता है उसका जीवन धन्य हो जाता है। सैनिक अपने राष्ट्र के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा देते हैं। वहीं देश के नागरिकों का कर्तव्य है कि वे अपने बहादुर सैनिकों को उनकी वीरता के लिए सम्मान दें। इसी कड़ी में आज करगिल विजय दिवस के मौक़े पर भोपाल स्थिति पीपुल्स यूनिवर्सिटी में भूतपूर्व सैनिकों को सम्मानित किया गया।

 

कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन कर और करगिल युद्ध में शहीद हुए वीर जवानों को श्रद्धांजलि देकर हुआ। इस अवसर पर पीपुल्स यूनिवर्सिटी की डायरेक्टर मेघा विजयवर्गीय, यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ राजेश कपूर, डॉ वी.के.पंड्या, डायरेक्टर (एकेडमिक) और यूनिवर्सिटी की रजिस्ट्रार डॉ नीरजा मलिक और कई पूर्व सैनिक मौजूद थे।

 

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए पीपुल्स यूनिवर्सिटी के वाइस चांलसर डॉ राजेश कपूर ने कहा कि करगिल विजय पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए, क्योंकि यह विजय भारतीय सेना के अदम्य साहस और वीरता की परिचायक है। डॉ कपूर ने कहा कि इस विजय के बाद भारत ने साबित कर दिया कि योजनाबद्ध तरीक़े से युद्ध में जीत कैसे हासिल की जा सकती है।

 

करगिल विजय दिवस पर पीपुल्स यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी के विभिन्न संकायों से जुड़े हुए पूर्व सैनिकों को यूनिवर्सिटी की डायरेक्टर मेघा विजयवर्गीय, वाइस चांसलर डॉ राजेश कपूर, डॉ वी.के.पंड्या, डायरेक्टर (एकेडमिक) और रजिस्ट्रार डॉ नीरजा मलिक ने सम्मानित किया। कार्यक्रम में कर्नल (डॉ) आर.सी.अग्रवाल, कर्नल आलोक कुलश्रेष्ठ, कर्नल (डॉ) संजय दवे, ग्रुप कैप्टन (डॉ) अनिल दीक्षित, मेजर (डॉ) कैलाश चारोकर, लेफ्टिनेंट कर्नल करेश प्रसाद, लेफ्टिनेंट कर्नल रेखा रानी गुप्ता, मेजर (डॉ) वी.के.यादव, मेजर विनोद साहू, स्कॉर्डन लीडर (डॉ) योगेश शर्मा, स्कॉर्डन लीडर (डॉ) जगदम्बा दीक्षित, मेजर (डॉ) अनिल मिश्रा, कैप्टन प्रीतम सिंह यादव, ऑनरी लेफ्टिनेंट दिनकर जायसवाल, सूबेदार भगवान सिंह, सूबेदार दीनानाथ प्रसाद, नायब सूबेदार सुबोध मण्डल और नायब सूबेदार आर.के.मिश्रा को सम्मानित किया गया।

 

इस दौरान पूर्व सैनिक मेजर (डॉ) कैलाश चारोकर और मेजर (डॉ) अनिल मिश्रा ने करगिल युद्ध के समय के अपने अनुभव सभी के साथ साझा करते हुए कहा कि भारतीय सेना ने करगिल युद्ध को आपसी सामंजस्य और साहस के साथ जीता था। करगिल युद्ध विषम परिस्थितियों में लड़ा गया एक ऐसा युद्ध था जो कि भारतीय सेना की वीरता की एक बहुत बड़ी मिसाल है। हम सभी को भारतीय सेना और उसके सैनिकों पर गर्व करना चाहिए कि कैसे उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बाद भी जीत हासिल की।



आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आज का दिन भारत के लिए गर्व का दिन है, क्योंकि आज से ठीक 20 साल पहले, भारत ने पाकिस्तान के घुसपैठियों को करगिल की पहाड़ियों से वापस खदेड़ दिया था। आज ही के दिन भारतीय सेना ने पाकिस्तान पर जीत हासिल की थी। आज से 20 साल पहले साल 1999 में करगिल युद्ध हुआ था, जिसकी शुरूआत 8 मई 1999 को तब हुई थी जब पाकिस्तानी सैनिकों और आतंकियों को करगिल की चोटी पर देखा गया था।

 

आज से 20 साल पहले आज ही के दिन 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने करगिल युद्ध के दौरान चलाए गए ‘ऑपरेशन विजय’ को सफलतापूर्वक अंजाम देकर भारत भूमि को घुसपैठियों के चंगुल से आज़ाद कराया था। इसी विजय की याद में हर साल 26 जुलाई को करगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार करगिल युद्ध में भारत के कुल 527 सैनिक शहीद हुए थे। भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस और वीरता के लिए आज पूरा देश शहीद सैनिकों को याद कर रहा है।