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सावधान! ट्रैक हो सकता है व्हाट्सएप पर भेजे गये मैसेज का सेंडर

27 Jul 2019
दावा: एण्ड-टू-एण्ड एनक्रिप्शन फ़ीचर के बावजूद व्हाट्सएप पर मैसेज सेंडर का लगाया जा सकता है पता!
 
JULY 27 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि इंस्टेंट मैजेजिंग ऐप व्हाट्सएप इस समय पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा लोकप्रिय है। जिसके पास भी स्मार्टफोन है वो व्हाट्सएप का प्रयोग तो ज़रूर ही करता है। पूरी दुनिया में व्हाट्सएप के क़रीब 125 करोड़ यूज़र्स हैं, जिसमें से क़रीब 25 करोड़ यूज़र्स भारत में हैं। दरअसल, व्हाट्सएप के पूरी दुनिया में पापुलर होने का सबसे बड़ा कारण है इसका एण्ड-टू-एण्ड एनक्रिप्शन फ़ीचर। व्हाट्सएप का दावा है कि उसके इस फ़ीचर की ख़ासियत यह है कि सेंडर और रिसीवर के अलावा कोई अन्य व्हाट्सएप मैसेज को पढ़ नहीं सकता है। व्हाट्सएप के इसी अनोखे फ़ीचर के कारण ही वो पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा यूज़ किये जाने वाला इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप है।

लेकिन यदि आप यह सोच रहे हैं कि व्हाट्सएप के एण्ड-टू-एण्ड एनक्रिप्शन फ़ीचर का फायदा उठाकर आप फेक न्यूज़ या फ़िर अफ़वाहें फैला सकते हैं तो फ़िर ज़रा सावधान रहें। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि मद्रास हाईकोर्ट में व्हाट्सएप पर अफवाह फैलाने वाले मैसेज से सम्बन्धित एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा गया है कि व्हाट्सएप पर मैसेज के ओरिजनल सेंडर को ट्रेस किया जा सकता है। हालांकि, हाईकोर्ट में इस तर्क के जवाब में व्हाट्सएप का कहना है कि यूज़र्स को प्राइवेसी देने के लिए उसे प्रदान किये गये एण्ड-टू-एण्ड एनक्रिप्शन फ़ीचर के कारण व्हाट्सएप प्लेटफॉर्म पर किसी भी मैसेज के ओरिजनल सेंडर को ट्रैक नहीं किया जा सकता है।
 
लेकिन व्हाट्सएप के इस दावे पर कि एण्ड-टू-एण्ड एनक्रिप्शन फ़ीचर के कारण व्हाट्सएप प्लेटफॉर्म पर मैसेज के मूल सेंडर को ट्रैक नहीं किया जा सकता है, अब सवाल उठने लगे हैं। आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर वी कामाकोटी ने व्हाट्सएप के उस दावे का खण्डन किया जिसमें कहा गया है कि एण्ड-टू-एण्ड एनक्रिप्शन फ़ीचर के कारण व्हाट्सएप प्लेटफॉर्म पर मैसेज के मूल सेंडर को ट्रैक नहीं किया जा सकता है। प्रोफेसर कामाकोटी के मुताबिक़ व्हाट्सएप में एण्ड-टू-एण्ड एनक्रिप्शन फ़ीचर के बावजूद भी तकनीकी आधार पर ओरिजनल आइडेंटिफिकेशन टैग को किसी मैसेज से जोड़ा जा सकता है।
 
प्रोफेसर कामाकोटी ने मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश एस.मणिकुमार और न्यायाधीश सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच को बताया कि व्हाट्सएप द्वारा प्रोडक्ट की डिज़ाइन में कुछ बदलाव कर ऐसा कर पाना सम्भव है। इसके लिए व्हाट्सएप को जब भी कोई मैसेज फॉर्वर्ड हो तो ओरिजनेटर का मोबाइल नम्बर जोड़ना होगा।

इस पूरे मामले में प्रोफेसर कामाकोटी का कहना है कि व्हाट्सएप खुद को प्राइवेसी केन्दित कम्पनी नहीं कह सकती है, क्योंकि यहां पर कोई भी यूज़र बिना किसी सहमति के कोई भी मैसेज फॉर्वर्ड कर सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह पूरी सुनवाई एक पीआईएल पर हो रही थी। यह पीआईएल साइबर क्राइम मामलों में सोशल मीडिया को आधार से जोड़ने को लेकर दायर की गई थी।

जैसा कि आप जानते हैं कि फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया ऐप पर फेक न्यूज़ और अफवाहों को लेकर सरकार ने नाराज़गी दिखाने के बाद सख्ती दिखाई थी। भारत सरकार के दवाब के बाद व्हाट्सएप ने किसी भी मैसेज के फॉर्वड होने के बाद उस पर फॉर्वडेड का लेबल लगाना शुरू कर दिया है, जिससे व्हाट्सएप पर फेक न्यूज़ का पता लगाया जा सके। वहीं किसी भी मैसेज को व्हाट्सएप पर यूज़र एक साथ पांच से ज़्यादा लोगों को फॉर्वड नहीं कर सकता है।

मद्रास हाईकोर्ट में दावा किया गया है कि व्हाट्सएप का एण्ड-टू-एण्ड एनक्रिप्शन फ़ीचर होने के बावजूद भी व्हाट्सएप प्लेटफॉर्म पर फॉर्वड किये गये किसी भी मैसेज के सेंडर का पता लाया जा सकता है। अब यह दावा कितना सही साबित होता है यह तो मद्रास हाईकोर्ट में इस बात का दावा करने वाले प्रोफेसर कामाकोटी ही बता पाएंगे। लेकिन हमारी आपको सलाह है कि व्हाट्सएप पर किसी भी तरह की फेक न्यूज़ या अफवाह को भेजने से बचें।