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तीन तलाक़ बिल पर दिखा मोदी सरकार का कुशल ‘राजनीतिक प्रबंधन’

31 Jul 2019
तीन तलाक़ बिल: विपक्षी एकता में ‘सेंध’ लगाने में कामयाब रही मोदी सरकार

JULY 31 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने राज्यसभा में मुस्लिम महिला विवाह संरक्षण अधिकार विधेयक 2019 (तीन तलाक़ विधेयक) को पारित कराकर इतिहास रच दिया है। 2019 लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड जीत हासिल करने वाली मोदी सरकार के पास इस विधेयक को लोकसभा में पारित कराने के लिए तो बहुमत था, लेकिन राज्यसभा में मोदी सरकार अल्पमत में थी। तीन तलाक़ विधेयक राज्यसभा में बहुमत ना होने के कारण काफ़ी समय से अटका पड़ा था, लेकिन मोदी सरकार के कुशल राजनीतिक प्रबंधन के कारण आख़िरकार तीन तलाक़ बिल राज्यसभा में पारित हो गया।

दरअसल, राज्यसभा में तीन तलाक़ बिल पारित होने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। एक तो मोदी सरकार का सदन में कुशल राजनीतिक प्रबंधन और दूसरा विपक्षी दलों में एकता का अभाव। वैसे कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल और एनडीए की कुछ पार्टियां इस बिल के विरोध में थीं, लेकिन फ़िर भी यह बिल राज्यसभा में पास हो गया। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इस विधेयक को चयन समिति के पास भेजने और इसकी जगह दूसरा विकल्प पेश करने के लिए सरकार को सुझाव दिया था, लेकिन सरकार ने विपक्ष के सुझावों को अनसुना कर दिया।

लम्बी बहस, तर्कों और विवादों के बाद मोदी सरकार तीन तलाक़ विधेयक को राज्यसभा में पारित कराने में सफल रही है। लेकिन राज्यसभा में विपक्ष का रवैया देखकर इस बात की आशंका थी कि यह विधेयक एक बार फ़िर से पास नहीं हो सकेगा। लेकिन मोदी सरकार के कुशल राजनीतिक प्रबंधन ने विपक्ष के सारे समीकरण को गड़बड़ा दिया।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विपक्ष के कड़े विरोध के बावजूद मोदी सरकार एक सप्ताह के भीतर राज्यसभा में अपना दूसरा महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने में सफल रही है। इसके पहले मोदी सरकार सूचना का अधिकार संशोधन विधेयक उच्च सदन यानी कि राज्यसभा से पारित कराने में कामयाब रही है।
 
राज्यसभा में तीन तलाक़ विधेयक में मतविभाजन के दौरान विपक्षी दलों के करीब 23 सांसद राज्यसभा में उपस्थित नहीं थे। इन्हीं सदस्यों की अनुपस्थिति का पूरा फ़ायदा मोदी सरकार को मिला। मतविभाजन के दौरान सदन से अनुपस्थित रहने वालों में कांग्रेस के 4, समाजवादी पार्टी के 6, बहुजन समाज पार्टी के 4, राकांपा के 2, टीडीपी के 2, पीडीपी के 2, डीएमके का 1, सीपीएम का 1 और टीएमसी का एक सदस्य शामिल है। इसके अलावा जद-यू, एआईएडीएमके और टीआरएस के साथ अन्य कुल 33 सदस्य सदन से अनुपस्थित रहे।
 
इस विधेयक के पक्ष में 99 और विरोध में 84 वोट पड़े। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राज्यसभा में सदस्यों की कुल संख्या 245 है, लेकिन पांच सीटें रिक्त होने के कारण इस समय यह संख्या अभी 240 है। तीन तलाक़ विधेयक पर 184 सदस्यों ने मतदान किया। इस तरह मतविभाजन के समय कुल 56 सांसद अनुपस्थित रहे। सूत्रों की मानें तो मोदी सरकार ने इस विधेयक को पारित कराने के लिए अपने फ्लोर मैनेजर्स को सक्रिय कर दिया था।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, मोदी सरकार तीन तलाक़ के अपने चुनावी वादे को हर हाल में पूरा करना चाहती थी। राज्यसभा में सरकार के फ्लोर मैनेजर्स एआईएडीएमके, टीआरएस और जेडीयू के साथ सम्पर्क में थे। इसी कारण से इन पार्टियों के सांसद भी मतविभाजन के दौरान अनुपस्थति रहे। इसी राजनीतिक प्रबंधन के कारण ही मोदी सरकार को राज्यसभा में तीन तलाक़ बिल को पास कराने में सफलता मिली। 
 
कहा जा रहा है कि सरकार के फ्लोर मैनेजर्स की सक्रियता के कारण ही विपक्ष के 23 सदस्य सदन में तीन तलाक़ बिल पर वोटिंग के समय सदन से अनुपस्थित हो गए। वहीं एनडीए और अन्य दलों के 33 सांसद इस दौरान उपस्थित नहीं रहे। तीन तलाक़ बिल को राज्यसभा में अल्पमत में होने के बाद भी पास कराकर मोदी सरकार ने साबित कर दिया है सरकार का राजनीतिक प्रबंधन कितना कुशल है।