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जानिए किन कारणों से भारत नहीं रहा दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था?

02 Aug 2019
डॉलर की तुलना में रुपये की ‘कमज़ोरी’ से पिछड़ी देश की अर्थव्यवस्था!

AUG 02 (WTN) – साल 2018 में भारतीय अर्थव्यवस्था की सुस्ती ने देश को एक बड़ा झटका दिया है। यह झटका इतना तगड़ा है कि भारत अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं रह गया है। इस झटके के साथ भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की दृष्टि से सातवें नम्बर पर पहुंच गया है। आख़िर ऐसा क्या हुआ कि भारत की अर्थव्यवस्था पांचवें से सातवें पायदान पर आ गई? आइये इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
 
विश्व बैंक के नये आंकड़ों के अनुसार साल 2018 में ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था बढ़कर 2.82 ट्रिलियन डॉलर हो गई, जिसके कारण ब्रिटेन फ़िर से दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। वहीं फ्रांस की अर्थव्यवस्था साल 2018 में बढ़कर 2.78 ट्रिलियन डॉलर हो गई। इसी कारण से फ्रांस ने भारत को पछाड़कर छठा स्थान हासिल किया। पर साल 2018 में कमजोर ग्रोथ रेट के कारण भारत की अर्थव्यवस्था 2.73 ट्रिलियन डॉलर तक ही पहुंच पाई, जिसके कारण भारत दो पायदान नीचे 7वें स्थान पर पहुंच गया।

जैसा कि हमने आपको बताया कि भारत अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं रह गया है। भारत का स्थान अब ब्रिटेन ने ले लिया है। वहीं जिस फ्रांस को पीछे छोड़कर भारत आगे बढ़ा था, वहीं फ्रांस अब एक बार फ़िर से भारत से आगे हो गया है। विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अब फ्रांस का स्थान छठा हो गया है। फ्रांस के बाद भारत सातवें पायदान पर काबिज है। इस सूची में अभी भी अमेरिका टॉप पर बना हुआ है। वहीं चीन दूसरे, जापान तीसरे और जर्मनी चौथे नम्बर पर है।
 
दरअसल, विश्व बैंक से मिले आंकड़ों के मुताबिक़ साल 2018 में ब्रिटेन और फ्रांस की अर्थव्यवस्था में भारत के मुक़ाबले ज़्यादा ग्रोथ रिकॉर्ड दर्ज की गई है। इसी कारण से यह दोनों देश भारत से आगे निकल गये। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था में साल 2018 में सिर्फ 3.01 प्रतिशत की वृद्धि ही देखी गई। जबकि साल 2017 में भारत की अर्थव्यवस्था में 15.23 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई थी। साल 2017 में शानदार ग्रोथ के कारण ही फ्रांस और ब्रिटेन जैसी अर्थव्यवस्थाओं को भारत ने पछाड़ दिया था।

बात करें ब्रिटेन की तो साल 2017 में ब्रिटेन की ग्रोथ सिर्फ़ 0.75 प्रतिशत थी, जबकि भारत की ग्रोथ 15.23 प्रतिशत थी। इसी कारण से भारत ने ब्रिटेन को पछाड़ दिया था। वहीं साल 2018 में ब्रिटेन की ग्रोथ 6.81 प्रतिशत रही, जो कि भारत की ग्रोथ 3.01 प्रतिशत से दोगुनी थी। इसलिए ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था भारत की अर्थव्यवस्था को पीछे करते हुए एक बार फ़िर से पांचवें स्थान पर पहुंच गई।

ब्रिटेन के अलावा फ्रांस की अर्थव्यवस्था भी साल 2017 में भारत की तुलना में कम तेज़ी से बढ़ी थी। लेकिन साल 2018 में फ्रांस की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ भारत से ज़्यादा रही, जिसके कारण फ्रांस एक बार फ़िर से सातवें पायदान पर आ गया। साल 2017 में फ्रांस की ग्रोथ रेट 4.85 प्रतिशत थी तो वहीं साल 2018 में फ्रांस की ग्रोथ रेट 7.33 प्रतिशत थी। साल 2018 में फ्रांस का प्रदर्शन भारत और ब्रिटेन दोनों से ही बेहतर रहा। साल 2018 में शानदार ग्रोथ रेट के कारण ही ब्रिटेन और फ्रांस ने भारत को पछाड़ दिया।

आंकड़ों से साफ़ ज़ाहिर होता है कि साल 2017 में भारत की ग्रोथ रेट ब्रिटेन और फ्रांस से काफ़ी ज़्यादा थी, जिसका फ़ायदा भारत को मिला था और भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया था। लेकिन साल 2018 में भारतीय अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ़्तार ने देश की ग्रोथ रेट को काफ़ी कम कर दिया, जिसका परिणाम यह हुआ कि भारत विश्व की पांचवीं से गिरकर सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था रह गया।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2017 की शानदार ग्रोथ रेट के कारण ही भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सका था। साल 2018 में भारत की कमज़ोर ग्रोथ रेट के पीछे कई कारण हैं, जिसमें से एक प्रमुख कारण अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले भारतीय रुपये का कमज़ोर होना है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2017 में अमेरिकी डॉलर की तुलना में भारतीय रूपये में 3 प्रतिशत का उछाल आया था, जिसका फ़ायदा भारत को मिला और भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया था।

लेकिन साल 2018 में डॉलर की तुलना में रुपये में काफ़ी गिरावट देखी गई। साल 2018 में भारतीय रुपया डॉलर की तुलना में 5 प्रतिशत तक कमज़ोर रहा। डॉलर की तुलना में रुपये के कमज़ोर होने का ख़ामियाज़ा भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ा और भारत की अर्थव्यवस्था पांचवें से सातवें पायदान पर आ गई। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि आने वाले पांच सालों में भारतीय अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। लेकिन 2018 की कमज़ोर ग्रोथ रेट से जो नुकसान भारतीय अर्थव्यवस्था को हुआ है, वो चिंताजनक है। यदि डॉलर की तुलना में रुपया मज़बूत नहीं रहा तो 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था को हासिल करना काफ़ी कठिन होगा।