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कश्मीर मुद्दे पर अब ‘इस’ तरह अमेरिका को ब्लैकमेल कर रहा है पाकिस्तान!

14 Aug 2019
अफगानिस्तान में मदद के बदले पाकिस्तान ने अमेरिका से मांगा कश्मीर मुद्दे पर ‘समर्थन’!
 
AUG 14 (WTN) – अब तक की अपनी सबसे ख़राब अर्थव्यवस्था के दौर से गुजर रहे पाकिस्तान का सालों से एक ही काम है, और वो काम है भारत में आतंकवाद फैलाना और भारत के आंतरिक मामलों में 'दखलंदाज़ी' करना। जब से भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाकर राज्य का विभाजन किया है, तभी से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। भारत के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप करने की कोशिश में पाकिस्तान ने पूरी दुनिया के देशों से कश्मीर मामले में सहायता मांगी, लेकिन पाकिस्तान को हर कहीं 'निराशा' ही हाथ लगी।

खुद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि कश्मीर मुद्दे पर पूरी दुनिया भारत के साथ खड़ी नज़र आ रही है। अमेरिका से लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक में कश्मीर मुद्दे पर 'नाकामी' हासिल होने के बाद निराश और बौखलाया पाकिस्तान अब 'नया दांव' खेलने की कोशिश कर रहा है और अमेरिका को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा है। क्या है पाकिस्तान का कश्मीर मुद्दे पर नया दांव? आइये आपको विस्तार से बताते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान पिछले कुछ सालों से अफगानिस्तान के मुद्दे पर अमेरिका को ब्लैकमेल करता आया है। पाकिस्तान जानता है कि अफगानिस्तान में तालिबान के साथ अमेरिकी की पुरानी दुश्मनी है। ऐसे में अमेरिका को समय-समय पर तालिबान के ख़िलाफ़ लडाई में पाकिस्तानी ज़मीन और पाकिस्तानी सेना की 'ज़रूरत' पड़ती रही है। अमेरिका की इसी 'मज़बूरी' का फ़ायदा अब पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर उठाने की कोशिश कर रहा है। 

दरअसल, पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे को अफगानिस्तान से जोड़ते हुए अमेरिका को प्रत्यक्ष रूप से यह चेतावनी दी है कि वह (पाकिस्तान) अपनी पश्चिमी सीमा यानी कि अफगानिस्तान से लगी सीमा से सेना को हटाकर पूर्वी मोर्चे (भारत से लगी सीमा) पर तैनात कर सकता है यदि कश्मीर मुद्दे पर भारत के साथ हालत बिगड़ते हैं। पाकिस्तान की इस 'चेतावनी' के बाद अमेरिका को डर है कि पाकिस्तान के इस क़दम से तालिबान के साथ चल रही उसकी शांति वार्ता मुश्किल में पड़ सकती है।

पाकिस्तान जानता है कि अमेरिका के लिए काफ़ी 'अहम' है कि तालिबान को काबू में रखने के लिए पाकिस्तान की सेना अफगानिस्तान की सीमा पर तैनात रहे। ऐसे में अमेरिका को ब्लैकमेल करते हुए पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के बदले कश्मीर वाला अपना पुराना दांव एक बार फ़िर से खेलने की कोशिश की है। हालांकि, पाकिस्तान के अमेरिका में राजदूत असद मसीद ख़ान ने इस बात को स्वीकार किया है कि कश्मीर और अफगानिस्तान दो अलग-अलग मुद्दे हैं।

लेकिन कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका से समर्थन की आशा लगाए पाकिस्तान ने अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका को यह चेतावनी दी है कि यदि पूर्व सीमा पर हालात बिगड़ते हैं तो पश्चिमी सीमा पर तैनात हमारी सेना को पूर्वी सीमा पर तैनात किया जा सकता है। पाकिस्तान ने काफ़ी 'सोच समझकर' कश्मीर के बदले में अफगानिस्तान वाला दांव खेला है, क्योंकि पाकिस्तान जानता है कि अफगानिस्तान और तालिबान के मुद्दे पर अमेरिका को पाकिस्तान की सहायता की 'ज़रूरत' है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सालों तक अफगानिस्तान में सेना की तैनाती के बाद अमेरिका अब किसी भी क़ीमत पर अफगानिस्तान से अपनी सेना की 'वापसी' चाहता है। अपनी सेना की वापसी के लिए ना चाहते हुए भी अमेरिका इन दिनों तालिबान के साथ शान्ति वार्ता की कोशिश कर रहा है। जैसा कि आप जानते हैं कि तालिबान पर पाकिस्तान का 'प्रभाव' बहुत ज़्यादा है, ऐसे में तालिबान के साथ शान्ति वार्ता में पाकिस्तान का साथ अमेरिका चाहता है।
 
आतंक के ख़िलाफ़ अमेरिका की लड़ाई में पाकिस्तान हमेशा से ही अमेरिका को ब्लैकमेल करता आया है। पाकिस्तान चाहता है कि यदि अमेरिका ने कश्मीर मुद्दे पर उसका साथ नहीं दिया तो वो आतंक के ख़िलाफ़ लड़ाई में अमेरिका का साथ नहीं देगा। यही वह 'ख़ास' कारण है जिसके कारण बुश और ओबामा प्रशासन अक्सर भारत पर पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमलों के ख़िलाफ़ आक्रामक रूख नहीं अपनाने के लिए 'दबाव' डालते थे।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका के ट्रम्प प्रशासन का तालिबान और अफगानिस्तान के प्रतिनिधियों के साथ समझौता लगभग अन्तिम चरण में है। वैसे इस 'शान्ति वार्ता' में शामिल सभी पक्ष पाकिस्तान को समझा चुके हैं और कह चुके हैं कि कश्मीर मुद्दे से अफगानिस्तान को जोड़ना कहीं से भी सही नहीं है, लेकिन इस समझाइश का पाकिस्तान पर कोई भी असर होता दिखाई नहीं दे रहा है।

पाकिस्तान चाहता है कि कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका, भारत पर 'सख्ती' दिखाए। लेकिन लगता है कि पाकिस्तान के राजनेता और वहां के राजनयिक दिन में सपने देखते रहते हैं। पाकिस्तान यदि यह सोच रहा है कि उसे खुश करने के लिए अमेरिका भारत जैसे आर्थिक रूप से शक्तिशाली देश पर 'दबाव' बनाएगा तो यह पाकिस्तान की 'सबसे बड़ी भूल' है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प स्पष्ट रूप से कह चुके हैं कि कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका किसी भी तरह की कोई भी मध्यस्थता नहीं करेगा, और भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों को मिलकर कश्मीर मुद्दे का समाधान निकालना है।

अमेरिका समेत सुरक्षा परिषद के तमाम देशों ने कश्मीर पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारत का साथ देते हुए कहा है कि अनुच्छेद-370 का फ़ैसला भारत का आंतरिक मामला है। अमेरिका और चीन समेत तमाम देशों से कश्मीर मुद्दे पर साथ ना मिलने के बाद बौखलाया पाकिस्तान, अफगानिस्तान मुद्दे पर अमेरिका को ब्लैकमेल करना चाह रहा है। लेकिन, शायद पाकिस्तान यह भूल गया है कि यदि अमेरिका ने पाकिस्तान की इस ब्लैकमेलिंग के बदले में पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक सहायता बंद कर दी तो पाकिस्तान की जनता के सामने दो वक़्त की रोटी के लाले पड़ जाएंगे। ऐसे में लगता नहीं है कि कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का अफगानिस्तान दांव सफल हो पाएगा।