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आधार नम्बर से लिंक हो सकते हैं फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर!

20 Aug 2019
मोदी सरकार की दलील; आधार नम्बर से लिंक हों सोशल मीडिया साइट्स के अकाउंट

AUG 20 (WTN) – जब से देश में आधार कार्ड अस्तित्व में आया है, तभी से इसके साथ तरह-तरह के विवाद जुड़ते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में आधार कार्ड की वैधता को चुनौती दी गई थी, जिसके बाद अपने एक ऐतिहासिक फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ योजनाओं और कामों के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता को ख़त्म कर दिया था, लेकिन कुछ योजनाओं और कामों के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य और कुछ योजनाओं और कामों के लिए इसे एक मान्य दस्तावेज़ घोषित किया था।

लेकिन यदि हम आपसे कहें कि आने वाले समय में फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर जैसी सोशल मीडिया साइट्स को आधार नम्बर से लिंक कराना ज़रूरी हो सकता है, तो यह पढ़कर आप सोच में पड़ गये होंगे कि आख़िर यह मामला क्या है? आइये इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।

दरअसल, केन्द्र की मोदी सरकार चाहती है कि सोशल मीडिया साइट्स को आधार नम्बर से लिंक करना ज़रूरी किया जाए, जिससे सोशल मीडिया साइट्स के द्वारा होने वाले किसी भी तरह के आपराधिक मामले की जांच मे आसानी हो सके। वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यूज़र प्रोफाइल को आधार से जोड़ने को लेकर फेसबुक की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट राजी हो गया है, जिसमें देश भर के अलग-अलग हाईकोर्ट्स में पेंडिंग मामलों को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की गई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस मामले में चार याचिकाएं दायर की गई हैं। दो याचिकाएं मद्रास हाईकोर्ट में, एक ओडिशा हाईकोर्ट में और एक बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर की गई है।

यूज़र प्रोफाइल को आधार से जोड़ने को लेकर मामले ट्रांसफर करने की मांग कर रही फेसबुक की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार, गूगल, ट्विटर और अन्य दूसरी सोशल नेटवर्किंग साइट्स को नोटिस जारी किया है। इस पूरे मामले में व्हाट्सएप का कहना है कि पॉलिसी मामले को हाईकोर्ट कैसे तय कर सकती है, क्योंकि यह अधिकार तो भारतीय संसद को है।

व्हाट्सएप का इस मामले में कहना है कि यूज़र प्रोफाइल को आधार से जोड़ने सम्बन्धित सभी मामलों को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किया जाए, जिससे वह इस मामले को सुने और इनका निपटारा करे। हालांकि, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने फेसबुक-आधार को लिंक करने से जुड़े मामलों की सुनवाई मद्रास हाईकोर्ट में जारी रहने की अनुमति दी है, लेकिन कहा है कि इस पर अन्तिम फ़ैसला नहीं दिया जाएगा। वैसे फेसबुक की तरफ़ से भी मांग की गई कि मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ही करे। फेसबुक का कहना है कि ये निजिता का मामला है।

इधर, सोशल मीडिया के वकील का कहना है कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट सुने और आदेश जारी करे। सोशल मीडिया की मांग है कि यह मामला पूरी तरह से ग्लोबल मामला है, तो ऐसा ना हो कि एक हाई कोर्ट कुछ आदेश पारित करें और दूसरा हाई कोर्ट कुछ और।

दरअसल, केन्द्र सरकार चाहती है कि सोशल मीडिया साइट्स के अकाउंट्स को आधार नम्बर से लिंक किया जाए। केन्द्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल का इस बारे में कहना है कि सरकार के पास ऐसी कोई तकनीक नहीं है, जिससे मैसेज या पोस्ट की शुरुआत करने वाले का पता लगाया जा सके वो भी विशेषकर आपराधिक प्रवृत्ति वाले पोस्ट्स पर। यदि सोशल मीडिया अकाउंट्स आधार नम्बर से लिंक होंगे, तो इस तरह के मामलों में किसी भी तरह की जांच में सहूलियत होगी।

दरअसल, काफ़ी समय से यह मांग की जा रही है कि फेसबुक समेत बाकी सोशल मीडिया साइट्स को आधार नम्बर से लिंक करना चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि ऐसा करने से सोशल मीडिया पर खुले फ़र्ज़ी अकाउंट बंद होंगे। वहीं यदि किसी सोशल मीडिया अकाउंट के द्वारा किसी भी तरह का कोई भी क्राइम होता है, तो आधार नम्बर लिंक होने से उस अकाउंट होल्डर तक पहुंचना आसान होगा। लेकिन आधार नम्बर को सोशल मीडिया साइट्स अकाउंट से जोड़ने का सोशल मीडिया कम्पनियां इसलिए विरोध कर रही हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इससे निजता की हनन होगा। अब देखना होगा कि इस मामले में क्या कुछ फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट देता है।