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जानिए सोना ख़रीदते और बेचते समय की ‘सावधानियां’!

26 Aug 2019
आ सकता है इनकम टैक्स का नोटिस, यदि सोने की ख़रीदी-बिक्री में की ‘लापरवाही’

AUG 26 (WTN) - भारतीय लोगों में सोने के गहनों के प्रति कितना आकर्षण होता है यह सभी जानते हैं। भारत में सोना स्टेटस सिम्बल के रूप में माना जाता है। इतना ही नहीं, भारत में सोने को विपरित आर्थिक परिस्थितियों में सबसे बड़ा सहायक माना जाता है। भारत में सोना ख़रीदना और बेचना एक सामान्य सी प्रक्रिया है। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सोने के ख़रीदने और बेचने के कुछ नियम होते हैं। आपको सोना बेचने और ख़रीदने की नियमों की जानकारी होना काफ़ी ज़रूरी है, क्योंकि निर्धारित मात्रा से ज़्यादा सोना ख़रीदने और बेचने पर टैक्स चुकाना पड़ता है।

देखा गया है कि सोने के छोटे स्तर पर व्यापारियों द्वारा सोना और उसके गहने बेचते और ख़रीदते समय नियमों का पालन नहीं करने, और जनता के बीच जागरूकता की कमी के कारण भारत में सोने के आभूषणों के व्यापारी अपनी ख़ुद की शर्तों पर सोना ख़रीदते और बेचते हैं। देखा गया है कि सोने की दुकानों पर ग्राहक कई बार ठग लिये जाते हैं। आज हम आपको बताते हैं कि सोना और उसके गहनों की ख़रीदी और बिक्री के क्या नियम हैं, और इस पर ग्राहक को किस तरह के टैक्स देने पड़ते हैं, और यदि आप यह टैक्स नहीं भरते हैं तो आपको इनकम टैक्स विभाग से नोटिस भी आ सकता है।

जानकारों के मुताबिक़, सोने के गहने ख़रीदते समय कैश, नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड से भुगतान किया जा सकता है। एक तय रक़म से ज़्यादा सोने की ख़रीदी आप नक़द में नहीं कर सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जीएसटी लागू होने के बाद सोने के गहने ख़रीदते समय इन्हें बनाने का शुल्क अदा करना होता है, जोकि कुल सोने की क़ीमत का क़रीब 3 प्रतिशत होता है।

सोना और सोने के गहने बेचते समय भी टैक्स चुकाना पड़ता है। सोना बेचने पर उस पर लगने वाला टैक्स इस पर निर्भर करता है कि बेचने वाले व्यक्ति ने सोना या उसके गहने ख़रीदने के बाद उन्हें कितने समय तक अपने पास रखा है। इसी आधार पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस (STCG) या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) के आधार पर सोना बेचने पर टैक्स लगता है।

यदि कोई व्यक्ति सोना या उसके गहने ख़रीदने के 36 महीने के अन्दर उसे बेच देता है, तो ख़रीदे गये सोने या उसके गहनों के बढ़े हुए मूल्य पर सम्बन्धित व्यक्ति को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स चुकाना होता है। सोना या उसके गहने बेचने के बाद सम्बन्धित व्यक्ति को जो फ़ायदा होता है, उसे उसकी कुल आय में जोड़ा जाता है। इसके बाद इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय सम्बन्धित व्यक्ति की आय किस टैक्स-स्लैब में आती है, उसी हिसाब से सम्बन्धित व्यक्ति को इनकम टैक्स चुकाना होता है।

वहीं यदि सोना या उसके गहने ख़रीदे हुए 36 महीने से ज़्यादा का समय हो गया है, तो उसके बढ़े हुए मूल्य पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स चुकाना पड़ता है। पिछले कुछ समय से अलग-अलग वित्त वर्ष में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स अलग-अलग रहा है। इस टैक्स को चुकाने के बाद सोना या सोने के गहने बेचने से जो फ़ायदा ग्राहक को मिलता है वो उसकी कुल आय में जोड़ा जाता है। इसी आय पर इनकम टैक्स की गणना की जाती है।

वहीं हमारी आपको सलाह है कि जब भी सोना या उसके गहने ख़रीदें, तो उसका बिल ज़रूर लें और बिल को सम्भालकर रखें। बिल हमेशा पक्का ही लें, जिसमें सोने या उसके जेवर की शुद्धता, वजन और क़ीमत के बारे में सारी जानकारी हो। सोना या उसके गहने का बिल आपके पासे होने पर आप सुनार को कम के कम कटौती पर सोना बेच सकते हैं। यदि आपके पास सोना या उसके गहने का बिल नहीं होगा, तो सुनार इस स्थिति में आप से मनमाने रेट पर उसे ख़रीद सकता है जिससे आपको नुकसान हो सकता है।

यदि आप सोना या उसके गहने ख़रीद रहे हैं तो आपको यह पता होना चाहिए कि जो सोना आप ख़रीद रहे हैं उसकी शुद्धता क्या है। देखा गया है कि ज़्यादातर सुनार 22 कैरेट सोने की ख़रीदी को ज़्यादा प्राथमिकता देते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऐसे सोने पर 915 हॉलमार्क का निशान लगा होता है। आपके सोने के गहने किस कैरेट के हैं, इसकी जानकारी के लिए आपको इसकी जांच कराना चाहिए ताकि आपको पता चल सके कि आपके सोने के गहने की क्या क्वालिटी है, और उसी आधार पर आप उसे बेच सकें।