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आर्थिक मोर्च पर फ़िर ‘असफ़ल’ साबित हुआ पाकिस्तान

28 Aug 2019
आईएमएफ की कड़ी शर्तों पर लगातार ‘फेल’ होता जा रहा है पाकिस्तान

AUG 28 (WTN) – भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान पूरी दुनिया में एक असफ़ल देश के रूप में कुख्यात है। आतंक और आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के कारण आज पाकिस्तान सरकार लगाकार आर्थिक मोर्च पर नये-नये संकटों का सामना कर रही है। बढ़ता विदेशी क़र्ज़, दिनों दिन बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी और भीतरी अंसतोष के कारण पाकिस्तान की आर्थिक हालत बद से बदतर होती जा रही है।

दीवालिया होने की कगार पर पहुंच चुके पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से राहत के लिए अपील की थी, जिसके बाद आईएमएफ कई कड़ी शर्तों के साथ पाकिस्तान को बेलआउट पैकेज देने के लिए राजी हुआ था। लेकिन पाकिस्तान को आईएमएफ से मिलने वाले बेलआउट पैकेज मिलने पर संशय हो गया है।

वित्तीय कुप्रबंधन के कारण पाकिस्तान का इस वित्तीय वर्ष में बजट घाटा पिछले आठ सालों में सबसे ज़्यादा है। इसी कारण से कहा जा रहा है कि पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मिलने वाले 6 अरब डॉलर के राहत पैकेज पर सवालिया निशान खड़े हो गये हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान के दिये जाने वाले बेलआउट की समीक्षा आईएमएफ कुछ ही दिनों के बाद करने जा रहा है।

अब जबकि पाकिस्तान का बजट घाटा पिछले आठ सालों में सबसे ज़्यादा रहा है, ऐसे में आईएमएफ से स्वीकृत बेलआउट पैकेज को हासिल करने के लिए पाकिस्तान को काफ़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
 
कंगाली की कगार पर पहुंचे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए आईएमएफ ने काफ़ी कड़ी शर्तों के साथ 6 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज स्वीकार किया है। लेकिन लगता है कि पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार आईएमएफ की शर्तों पर ख़रा उतरती नज़र नहीं आ रही है। दरअसल, आर्थिक बदहाली झेल रहे पाकिस्तान का बजट घाटा इस वित्तीय वर्ष में देश के कुल घरेलू उत्पाद का 8.9 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में यह 6.6 प्रतिशत था।

बेलआउट पैकेज के लिए आईएमएफ की शर्तों के मुताबिक़, पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार को बजट घाटा सीमित रखना था। दरअसल, बढ़ा हुआ बजट घाटा इमरान ख़ान सरकार की वित्तीय नाकामी का एक बहुत बड़ा सूबत है, क्योंकि इमरान ख़ान सरकार ने ख़ुद बजट घाटे को जीडीपी के 5.6 प्रतिशत कर सीमित रखने का लक्ष्य तय किया था। अर्थशास्त्र के जानकारों के अनुसार, पाकिस्तान सरकार का बजट घाटा निर्धारित लक्ष्य से 82 प्रतिशत बढ़ गया है। ऐसे में बढ़े हुए बजट घाटे के कारण वित्तीय वर्ष 2019-20 का बजट दो महीने के अन्दर ही अपनी अहमियत खो चुका है।

स्पष्ट है कि पाकिस्तान सरकार का ख़र्च लगातार बढ़ रहा है, जिसके कारण ही पाकिस्तान का बजट घाटा आठ सालों के बाद इतना ज़्यादा बढ़ा है। वित्तीय कुप्रबंधन के कारण पाकिस्तान सरकार का ख़र्च लगातार बढ़ता ही जा रहा है, जबकि उसकी राजस्व आय में लगातार कमी आती जा रही है।

हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने जुलाई महीने से शुरू हुए वित्तीय वर्ष में सरकारी राजस्व को 40 प्रतिशत तक बढ़ाने का कठिन लक्ष्य रखा है। लेकिन यदि पाकिस्तान सरकार राजस्व प्राप्ति के लक्ष्य को हासिल करने में असफ़ल रही, तो पाकिस्तान सरकार को आईएमएफ से मिलने वाले 6 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज के लिए संघर्ष करना होगा।

इमरान ख़ान सरकार ने पिछले साल की तुलना में इस बार 20 प्रतिशत ज़्यादा ख़र्च किया है, लेकिन राजस्व प्राप्ति में इस साल 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। पाकिस्तान की वित्तीय हालत यह है कि कुल सरकारी राजस्व का 80 प्रतिशत हिस्सा क़र्ज़ और रक्षा बजट में ही ख़र्च हो जाता है।

जानकारों के मुताबिक़, सरकारी राजस्व को 40 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य काफ़ी कठिन है। ऐसे में साफ़ है कि पाकिस्तान सरकार जुलाई से शुरू हुए वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में राजस्व प्राप्ति के आईएमएफ के लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाएगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि पिछली तिमाही में गैर-कर राजस्व में 98 प्रतिशत की गिरावट दर्ज़ की गई है जिसके कारण कुल राजस्व प्राप्ति में 20 प्रतिशत की कमी दर्ज़ की घई है।

इस स्थिति में हो सकता है कि टैक्स बढ़ाने के लिए पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार एक नया मिनी बजट पेश करे। ऐसा इसलिए, क्योंकि ऐसा करके पाकिस्तान सरकार, आईएमएफ के रिव्यू में यह साबित करने की कोशिश करेगी कि राजस्व प्राप्ति के लक्ष्य को हासिल करने के लिए वो पूरा प्रयास कर रही है।

ख़राब आर्थिक हालत से गुजर रहे पाकिस्तान की आर्थिक हालत सुधारने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने फिजूलख़र्ची रोककर ख़र्चे कम करने की कोशिशों का दिखावा ही किया है, और इसी कारण से राजस्व प्राप्ति के लक्ष्य को हासिल करने की पूरी कवायद में इमरान ख़ान सरकार नाकामयाब ही साबित हुई। हालांकि, राजस्व प्राप्ति के लिए इमरान ख़ान सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों की क़ीमतें भी बढ़ा दी थीं, लेकिन इसके कारण उल्टा पाकिस्तान में लोगों के गुस्से का सामना सरकार को करना पड़ा।

पाकिस्तान की आर्थिक हालत को देखते हुए आईएमएफ, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को फ़िलहाल सहारा देने और उसे पटरी पर लाने के लिए तीन साल के बेलआउट पैकेज के लिए कड़ी शर्तों पर राजी हो गया है। लेकिन लगता नहीं है कि पाकिस्तान की सरकार आईएमएफ की शर्तों पर ख़रा उतर पा रही है। कहा जा सकता है कि आने वाला समय पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार के लिए आर्थिक मोर्चे पर काफ़ी चुनौती भरा रहने वाला है। लेकिन पाकिस्तान इस मोर्च पर तभी सफ़ल हो सकता है, जब वो आतंक और आतंकियों को पनाह देना बंद करे।