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इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव कर मोदी सरकार पटरी पर लाएगी अर्थव्यवस्था!

29 Aug 2019
टैक्स स्लैब में बदलाव से बढ़ेगा उपभोग, अर्थव्यवस्था को मिलेगी गति!

AUG 29 (WTN) – 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की जनता से काफ़ी वादे किये थे। प्रधानमंत्री मोदी के वादों पर देश के मतदाताओं ने विश्वास किया, और भाजपा को एक बार फ़िर से लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत से जिताया। लोकसभा चुनाव में जीत हासिल के बाद अब मोदी सरकार अब देश की जनता को बड़ी-बड़ी सौगातें दे रही है। इसी कड़ी में हो सकता है कि आने वाले दिनों में देश के मध्यम वर्ग को इनकम टैक्स से काफ़ी राहत मिले। आख़िर किस तरह की राहत मोदी सरकार इनकम टैक्स में मिडिल क्लास को दे सकती है? इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।  

यदि सभी कुछ मोदी सरकार की योजना के अनुसार ही रहा, तो आने वाले दिनों में मोदी सरकार इनकम टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव कर सकती है। दावा किया जा रहा है कि यदि मोदी सरकार ऐसा करती है, तो इससे देश के उस मिडिल क्‍लास को एक बहुत बड़ी राहत मिलेगी जो टैक्स का एक बड़ा हिस्सा चुकाता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के सदस्य अखिलेश राजन की अगुवाई में सरकार द्वारा गठित समिति ने 58 साल पुराने आयकर अधिनियम में एक बड़े बदलाव को ज़रूरी बताते हुए नया टैक्‍स स्‍लैब लागू करने की सिफ़ारिश की है। यदि यह सिफ़ारिश लागू होती है, तो इस स्थिति में 5 लाख से 10 लाख रुपये सालाना कमाई करने वालों को सिर्फ़ 10 प्रतिशत टैक्स देना होगा।

जानकारी के लिए बता दें कि मौजूदा टैक्स स्लैब के मुताबिक़ 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक की सालना कमाई करने वालों को इस समय 20 प्रतिशत टैक्‍स देना पड़ता है। यदि मोदी सरकार इस सिफ़ारिश को लागू करती है, तो इससे 5 से 10 लाख रूपये सालाना कमाई करने वालों को एक बड़ी राहत मिल सकती है।

वहीं समिति की सिफ़ारिश है कि 10 लाख से 20 लाख रुपये तक की सालाना कमाई करने वालों पर 20 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाया जाए। साथ ही 20 लाख रुपये से दो करोड़ रुपये तक की सालाना आय वालों पर 30 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाने की सिफ़ारिश समिति ने की है। इतना ही नहीं, दो करोड़ रुपये सालाना से ज़्यादा कमाई करने वालों पर 35 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाने और उन पर कोई भी सरचार्ज नहीं लगाने का प्रस्ताव सिफ़ारिश में है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मौजूदा टैक्स स्लैब में 2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक की सालाना आय पर 5 प्रतिशत की दर से इनकम टैक्‍स लगाया जाता है। वहीं 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक की सालाना कमाई पर 20 प्रतिशत, और 10 लाख रुपये से अधिक की सालाना कमाई पर 30 प्रतिशत की दर से इनकम टैक्‍स लगता है। हालांकि, जिनकी सालना कमाई 5 लाख रुपये तक है, उन्हें टैक्‍स रीबेट मिलता है। टैक्स रीबेट मिलने का मतलब है कि 5 लाख रूपये तक की सालाना कमाई करने वालों का इनकम टैक्‍स शून्‍य होता है।

दरअसल, काफी लम्बे से मांग उठ रही है कि सरकार को इनकम टैक्स में जनता के हित में काफ़ी बदलाव करना चाहिए। लोगों का कहना है कि जीएसटी व्यवस्था देश में लागू होने के बाद से वे अप्रत्यक्ष रूप से काफ़ी टैक्स सरकार को चुका रहे हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वो इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव कर और टैक्स में कमी कर मिडिल क्लास जनता को राहत प्रदान करे।
 
लेकिन इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव से सरकार की आमदनी में कुछ समय के लिए कमी आ सकती है। यह तय है कि प्रस्तावित सिफ़ारिशों को लागू करने के बाद इनकम टैक्स से आमदनी कम होने पर सरकार को इससे नुकसान होगा। जानकारों के मुताबिक़, यदि सरकार प्रस्तावित सिफ़ारिश के अनुसार इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव करती है, तो इससे दो से तीन साल तक सरकार की आमदनी घटेगी, लेकिन इससे रिटर्न फाइल करने में आसानी होगी।

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में आसानी इसलिए होगी, क्योंकि नया टैक्स स्लैब लागू होने से अलग-अलग तरह की छूट ख़त्म होगी जिससे टैक्सेशन आसान होगा। वहीं टैक्स सम्बन्धित विवादों के निपटारे के लिए मध्यस्थता पैनल बनाने से टैक्स चोरी रोकने में भी मदद मिलेगी।

इनकम टैक्स के जानकारों के मुताबिक़, टैक्स स्लैब में प्रस्तावित बदलाव से उपभोग बढेगा। जनता यदि पैसों का उपभोग करेगी तो जनता की जेब से ज़्यादा पैसा मार्केट में आएगा, जिससे अर्थव्यवस्था में नक़दी का संकट ख़त्म होगा और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और वैश्विक मंदी से निपटने में यह उपाय कारगर साबित होंगे। जब पैसा मार्केट में आएगा, तो स्वाभाविक है कि मार्केट में ख़रीदी बिक्री बढ़ने से सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे गति मिलने लगेगी।