HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

अब लिपस्टिक की बढ़ती बिक्री ने दिया आर्थिक मंदी का संकेत!

30 Aug 2019
लिपस्टिक की बढ़ी बिक्री ने बजाई ख़तरे की घण्टी!

AUG 30 (WTN) – जैसा कि आपने पढ़ा और सुना ही होगा कि इन दिनों पूरी दुनिया धीरे-धीरे आर्थिक मंदी की चपेट में आती जा रही है। अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के कारण पूरी दुनिया को आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ रहा है। आर्थिक मंदी पर पूरी दुनिया भर के अर्थशास्त्री अपने-अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं। वहीं आर्थिक मंदी से सम्बन्धित कुछ इंडेक्स की भी इन दिनों पूरी दुनिया काफ़ी चर्चा है। पुरुषों के अंडरगारमेण्टस की बिक्री में कमी से लेकर डेटिंग साइट्स पर बढ़ते सब्सक्राइबर्स, यह ऐसे इंडेक्स हैं जो सूचित कर रहे हैं कि आर्थिक मंदी धीरे-धीरे अपना असर दिखाने लगी है।

आर्थिक मंदी के इंडेक्स में इन दिनों ‘लिपस्टिक इंडेक्स’ की काफ़ी चर्चा हो रही है। दरअसल. 'लिपस्टिक इंडेक्स' पश्चिमी देशों के बाज़ारों में मंदी का एक संकेतक है। यानी कि यदि लिपिस्टिक की बिक्री ज़्यादा होती है, तो इसका मतलब यह है कि आर्थिक मंदी का दौर जारी है। पश्चिमी के देशों में लिपस्टिक की बिक्री में इज़ाफा देखा गया है, वहीं भारत का कलर कॉस्मेटिक्स मार्केट भी कुछ इसी तरह की स्थिति बयां कर रहा है।
 
दरअसल, इस समय जबकि देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर और रियल एस्टेट सेक्टर मंदी का सामना करना रहे हैं, भारत में कलर लिपस्टिक कॉस्मेटिक्स मार्केट डबल-डिजिट की रफ़्तार से बढ़ रहा है। यानी कि ‘लिपस्टिक इंडेक्स’ भारत में आर्थिक मंदी का संकेत दे रहा है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, भारत में लैक्मे (Lakme) और लॉरिअल (L’oreal) जैसे ब्रैंड्स के लिपस्टिक की बिक्री डबल डिजिट में बढ़ी है।

साफ़ है कि भारत में भी ‘लिपस्टिक इंडेक्स’ के अनुसार मंदी का दौर चल रहा है। दरअसल, ‘लिपस्टिक इंडेक्स’ के फॉर्म्यूले के अनुसार आर्थिक मंदी के दौरान लिपस्टिक की बिक्री बढ़ जाती है। इस इंडेक्स के शोधकर्ताओं का तर्क है कि मंदी के दौरान महिलाएं कपड़ों और अन्य महंगे फैशन पर पैसा ख़र्च करने के बजाय लिपस्टिक पर ज़्यादा पैसा ख़र्च करती हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि खुद को सुन्दर और अप-टू-डेट दिखाने के लिए मंदी के दौर में कपड़ों और महंगे फैशन की तुलना में लिपस्टिक महिलाओं के लिए ज़्यादा सस्ता विकल्प है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ‘लिपस्टिक इंडेक्स’ का प्रयोग सबसे पहले 'एस्टी लॉडर' के पूर्व चेयरमैन लियोनार्ड लॉडर ने साल 2000 की आर्थिक मंदी के दौरान कम्पनी की कॉस्मेटिक बिक्री में हुई वृद्धि को समझाने के लिए किया था। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, कई सारे कलर कॉस्मेटिक ब्रांड्स ने साल 2001 और 2008 की मंदी में एकसमान ट्रेंड दिखाए थे। यानी कि मंदी के दौरान लिपस्टिक की बिक्री में इज़ाफा होता है।

मंदी के समय लिपस्टिक की बिक्री बढ़ने के पीछे के कारणों पर अर्थशास्त्रियों का कहना है कि मंदी के कारण आय में गिरावट के कारण सस्ते सामानों की बिक्री और ख़पत दोनों ही बढ़ जाती है। हालांकि, लिपस्टिक के बड़े ब्रांड सस्ते सामान नहीं हैं, लेकिन फ़िर भी कपड़ों, गहनों और महंगे फैशनेबल सामान की तुलना में लिपस्टिक खुद को अप-टू-डेट रखने का एक सस्ता विकल्प है।
 
साफ़ ज़ाहिर है कि मंदी के समय लोगों की आय कम हो जाती है, जिसके कारण लोग विसालिता और महंगी वस्तुएं ना ख़रीदकर बस ज़रूरत की सेवाओं पर ही पैसा ख़र्च करते हैं। वहीं मंदी ना होने के समय आय बढ़ने से लोग विलासिता और महंगी वस्तुओं पर ज़्यादा ख़र्च करते हैं।

साफ़ ज़ाहिर है कि भारत में लिपस्टिक की बिक्री में डबल डिजिट की वृद्धि साफ़ संकेत दे रही है कि आर्थिक मंदी देश में दस्तक दे चुकी है। कुछ रेटिंग एजेंसियों ने अनुमान लगाया था कि यदि भारत सरकार कुछ एहतियात क़दम उठाए, तो वैश्विक आर्थिक मंदी का ज़्यादा असर भारत पर नहीं पड़ेगा। वैसे मोदी सरकार आर्थिक मंदी से निपटने से लिए ज़रूरी फ़ैसले लेती नज़र आ रही है। लेकिन अर्थशास्त्रियों के मुताबिक़, जब तक अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर का कुछ निष्कर्ष नहीं निकलता है, तब तक पूरी दुनिया में कम या ज़्यादा मंदी का असर देखा जाएगा।