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आसान नहीं है चीनी कम्पनियों का बहिष्कार; भारत के मोबाइल मार्केट में चीनी मोबाइल का ‘दबदबा’

30 Aug 2019
चीनी कम्पनियों ने किया भारतीय मोबाइल मार्केट पर ‘कब्ज़ा’!
 
AUG 30 (WTN) – विस्तारवादी मानसिकता वाला देश चीन की कूटनीति हमेशा से ही भारत विरोधी रही है। कश्मीरियों को नत्थी वीज़ा दिये जाने से लेकर डोकलाम विवाद तक चीन ने हमेशा भारत को नाराज़ करने के काम किये हैं। वहीं भारत के जम्मू-कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद से जिस तरह चीन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान का साथ दे रहा है, इससे भारतीय लोगों में चीन के ख़िलाफ़ गुस्से का माहौल है।
 
चीन की भारत विरोधी गतिविधियों के नाराज़ भारतीय समुदाय समय-समय पर चीनी सामान के बहिष्कार की चेतावनी देता रहता है। जम्मू-कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद चीन ने खुले तौर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान का साथ देकर एक बार फ़िर से साबित कर दिया है कि चीन की कूटनीति में भारत विरोध सर्वोपरि है। चीन के भारत विरोधी रूख़ को देखते हुए एक बार फ़िर से देश में चीनी सामान के बहिष्कार की चर्चा जोरों पर है।
 
लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में चीनी सामान की पहुंच हर गली मुहल्ले की दुकानों तक है। इतना ही नहीं भारत के मोबाइल मार्केट पर तो एक तरह से चीनी कम्पनियों का ही कब्जा है। यदि आपको लगता है कि भारतीय बाज़ार से चीनी सामानों को बहिष्कार आसान है, तो शायद आप ग़लत सोच रहे हैं। भारतीय बाज़ार चीन की बनाई अगरबत्ती से लेकर मोबाइल तक से भरे पड़े हैं। जो मोबाइल आप अपने साथ लगभग हमेशा रखते हैं, उसी मोबाइल के भारतीय बाज़ार में चीनी कम्पनियों का पूरी तरह से दबदबा है।     

भारतीय मोबाइल मार्केट में चीनी कम्पनियों का इतना वर्चस्व है कि पूरे भारतीय मोबाइल मार्केट में क़रीब 81 प्रतिशत हिस्सेदारी चीनी मोबाइल कम्पनियों की है। वहीं भारतीय मोबाइल मार्केट में बाकी सभी ब्रांड्स की कुल हिस्सेदारी सिर्फ़ 19% है, जो कि बीते साल की तुलना में 2% कम है।

भारत के मोबाइल मार्केट में सबसे ज़्यादा मोबाइल चीनी कम्पनी शियोमी बेचती है। पिछले दो सालों से लगातार भारत के 28% मोबाइल मार्केट पर चीनी मोबाइल कम्पनी शियोमी का कब्ज़ा बरक़रार है। शियोमी के अलावा भारतीय मोबाइल मार्केट में तीसरे नम्बर पर चीनी मोबाइल कम्पनी वीवो का कब्ज़ा है। 2019 की दूसरी तिमाही के आंकड़ों के अनुसार भारतीय मोबाइल मार्केट में चीनी मोबाइल कम्पनी वीवो की हिस्सेदारी क़रीब 11 प्रतिशत है।
 
वहीं भारतीय मोबाइल मार्केट में चौथे नम्बर पर भी एक चीनी मोबाइल कम्पनी ही मौजूद है। 9% हिस्सेदारी के साथ चीनी मोबाइल कम्पनी रियलमी चौथे स्थान पर है। जबकि साल 2018 की दूसरी तिमाही में भारतीय मोबाइल मार्केट में उसकी पहुंच सिर्फ़ 1% थी। भारतीय मोबाइल मार्केट में पांचवें स्थान पर भी एक चीनी कम्पनी ही है। पांचवें स्थान पर चीनी मोबाइल कम्पनी ओप्पो का कब्ज़ा है। 2019 की दूसरी तिमाही तक ओप्पो की हिस्सेदारी भारतीय मोबाइल मार्केट में 8% है।
 
साफ़ ज़ाहिर है कि भारत में चीनी कम्पनियों के सामान का बहिष्कार करना आसान नहीं है। अकेले भारतीय मोबाइल मार्केट में ही चीनी कम्पनियों का हिस्सा 80 प्रतिशत से ज़्यादा है। दरअसल, चीनी कम्पनियों के मोबाइल बेहतरीन फ़ीचर्स के साथ कम से कम दामों में उपलब्ध हैं, जबकि अन्य देशों की कम्पनियों के मोबाइल उसी फ़ीचर्स के साथ तुलनात्मक रूप से काफ़ी महंगे हैं। साफ़ है कि चीनी मोबाइल कम्पनियों से प्रतिस्पर्धा करना अन्य देशों की मोबाइल कम्पनियों और भारतीय मोबाइल कम्पनियों के बस की फ़िलहात बात नहीं है। वहीं चीनी कम्पनियों का बहिष्कार करना भी उतना आसान नहीं है, जितना कि अंदाज़ा लगाया जा रहा है।