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आख़िरकार मोदी की ‘कूटनीति’ के आगे ‘परास्त’ हुए इमरान ख़ान

25 Sep 2019
कश्मीर पर कामयाब रही प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति, इमरान ख़ान ने क़बूला नहीं मिला दुनिया का साथ
 
SEP 25 (WTN) – भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक परिपक्व राजनेता माने जाते हैं। अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति और रणनीति के कारण ही उन्होंने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल की। देश की अंदरूनी राजनीति में ही नहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने अब विदेश नीति में भी ख़ुद को एक बेहतरीन नेता साबित कर दिया है। जम्मू-कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 ख़त्म करने के बाद पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी कूटनीति के चलते ध्वस्त किया है, वो तारीफ़-ए-क़ाबिल है।
 
प्रधानमंत्री मोदी, जम्मू-कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद अपनी सधी हुई कूटनीति के ज़रिये विश्व के लगभग तमाम देशों को यह समझाने में सफ़ल रहे हैं कि अनुच्छेद 370 भारत का आंतरिक मामला है और दुनिया के किसी भी दूसरे देश को इससे ना तो परेशानी होना चाहिए, ना ही इस फ़ैसले पर आपत्ति दर्ज़ कराना चाहिए और ना ही इसमें दख़ल देना चाहिए।

कश्मीर मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी की सफ़ल कूटनीति का ही नतीज़ा है कि ख़ुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने आख़िरकार क़बूल कर लिया है कि कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का साथ नहीं मिला। इतना ही नहीं, इमरान ख़ान ने यह भी क़बूल कर लिया है कि कश्मीर के मुद्दे पर ज़्यादातर देशों ने भारत का ही साथ दिया।

अमेरिका के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक से अलग एक कार्यक्रम में इमरान खान ने सबके सामने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान की हार को स्वीकार कर लिया है। यानी कि कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री मोदी की सफ़ल कूटनीति का ही नतीज़ा है कि पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से निराशा हाथ लगी है। पाकिस्तान सोच रहा था कि जम्मू-कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद वो इस मुद्दे पर भारत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने, घेरने और दबाव बनाने में सफ़ल रहेगा, लेकिन चीन और टर्की को छोड़कर किसी भी देश ने पाकिस्तान का साथ नहीं दिया।

पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे को कई अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाकर उसका अंतर्राष्ट्रीयकरण कर भारत को घेरने की काफ़ी कोशिशें की, लेकिन मोदी सरकार ने पाकिस्तान की हर चाल को नाकामयाब साबित कर दिया। प्रधानमंत्री मोदी जानते थे कि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उठाकर मानवाधिकार के नाम पर भारत को बदनाम करने की कोशिश करेगा, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी अपनी विदेशी नीति के ज़रिये दुनियाभर के देशों को यह समझाने में कामयाब रहे कि कश्मीर के बारे में भारत ने जो भी फ़ैसला लिया वो राज्य की लोगों की भलाई के लिए ही लिया गया है।

कश्मीर मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति से परास्त पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान अब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को ब्लैकमेल करने का काम कर रहे हैं। इमरान ख़ान ने कश्मीर मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पर टिप्पणी करते हुए कहा है, “मैं अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से निराश हूं। अगर 80 लाख यूरोपीय या यहूदी या यहां तक ​8 अमेरिकियों को घेराबंदी में रखा गया होता, तो क्या तब भी यही प्रतिक्रिया होती? शायद यह नहीं होता। कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाने पर कोई बात नहीं कर रहा है, लेकिन हम दबाव डालते रहेंगे।”

इमरान ख़ान की बातों से साफ़ ज़ाहिर है कि कश्मीर के मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का साथ नहीं मिलने पर वे अब भावनाओं के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को ब्लैकमेल कर कश्मीर मुद्दे पर उनका सहयोग चाहते हैं। वहीं इमरान ख़ान का कहना है कि कश्मीर के हालात चिंताजनक हैं और वहां पर नौ लाख भारतीय सेना के जवान आखिर क्या कर रहे हैं? तो शायद लगता है कि इमरान ख़ान भूल गये हैं कि कश्मीर में भारतीय सेना इसलिए तैनात है ताकि आतंकियों और पाकिस्तानी सेना को उनकी नापाक गतिविधियों के लिए मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।

अपने ही देश में अपनी फज़ीहत कराने वाले इमरान ख़ान कश्मीर मुद्दे पर दुनियाभर से निराश होने के बाद अब कश्मीर की जनता को भड़काने का काम कर रहे हैं। इमरान ख़ान का कहना है कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फ़ैसले को कश्मीरी जनता चुपचाप स्वीकार नहीं करेगी। लेकिन लगता है कि इमरान ख़ान भूल गये हैं कि कश्मीरी जनता भी अब समझ गई है कि पाकिस्तान के बहकावे में आने से उनका कुछ भी भला नहीं होने वाला है।

यह चीन की मजबूरी ही थी कि वो पाकिस्तान के साथ कश्मीर मुद्दे पर खड़ा रहा, लेकिन चीन का रूख भी कश्मीर मुद्दे पर उतना आक्रामक नहीं रहा है जितनी कि पाकिस्तान को आशा थी। पाकिस्तान को चीन से ज़्यादा अमेरिका से आशा थी और है कि वो कश्मीर मुद्दे पर भारत पर दबाव बनाए और इस मामले में मध्यस्थता करे। हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई बार कह चुके हैं कि वे कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करने को तैयार हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी साफ़ कर चुके हैं कि भारत को कश्मीर मुद्दे पर किसी भी तीसरे पक्ष की दख़लंदाज़ी मन्ज़ूर नहीं है।

जिस तरह से पाकिस्तान और उसके प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की बेइज़्ज़ती कश्मीर मसले पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हुई है, वो ऐतिहासिक है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी कूटनीति के चलते पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे पर पूरी दुनिया में बेनकाब कर दिया है। भारत पूरी दुनिया को यह बताने में सफ़ल रहा है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और उसके बारे में क़ानून बनाने का उसे पूरा अधिकार है।

वहीं कश्मीर में मानवाधिकार हनन के पाकिस्तान के आरोपों का भी तगड़ा जवाब मोदी सरकार ने दिया है। जिस तरह से पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की तरफ़ से कोई भी सहयोग नहीं मिला है, उससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति के आगे इमरान ख़ान पूरी तरह से असफ़ल साबित हुए हैं।