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इमरान ख़ान से नहीं सम्भल पा रहा पाकिस्तान!

02 Oct 2019
क़र्ज़, कमज़ोर करेंसी और महंगाई के अलावा पाकिस्तान को कुछ नहीं दे सके इमरान ख़ान

OCT 02 (WTN) – आतंक के ज़रिये भारत में अशान्ति फैलाने की कोशिश में पाकिस्तान सालों से लगा है। लेकिन पाकिस्तान अपनी आर्थिक हालत को ठीक करने और ग़रीबी दूर करने के बजाय, कश्मीर मामले पर भारत जैसे शक्तिशाली देश के आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप करता रहता है। जब से मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 को हटाया है, तभी से पाकिस्तान दुनिया के हर मंच पर कश्मीर मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसे मोदी सरकार की कूटनीति के कारण हर जगह हार का सामना करना पड़ा है।
 
पाकिस्तान एक ऐसा देश है जहां के आम नागरिकों की हालत दिनों-दिन ग़रीबी और महंगाई के कारण ख़राब होती जा रही है। इमरान ख़ान जब से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं, तभी से पाकिस्तान की आर्थिक हालत और भी ज़्यादा ख़राब हो गई है। इसी कारण से इमरान ख़ान को अपने ही देश पाकिस्तान में आलोचनाओं का शिकार होना पड़ रहा है। साफ़ शब्दों में कहा जाए तो इमरान ख़ान पाकिस्तान को सम्भाल नहीं पा रहे हैं।

यदि इमरान ख़ान के अभी तक के प्रधानमंत्री कार्यकाल को देखा जाए, तो साफ़ ज़ाहिर होता है कि इमरान ख़ान की ग़लतियों और नीतियों के कारण पाकिस्तान की आर्थिक हालत पहले से ज़्यादा ख़राब हो गई है और इसी कारण से पाकिस्तान के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
  
कहा जाता है कि इमरान ख़ान को पाकिस्तान की सेना का पूरा समर्थन हासिल है। पाकिस्तान की राजनीति के जानकारों का मानना है कि पिछले साल पाकिस्तान में हुए आम चुनाव में सेना की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दखलंदाज़ी के कारण ही इमरान ख़ान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बन सके थे। अभी तक प्रधानमंत्री के रूप में इमरान ख़ान ने जो भी फ़ैसले लिये हैं, उससे साफ़ ज़ाहिर होती है कि इमरान ख़ान पाकिस्तान आर्मी की कठपुतली मात्र हैं।

बात करें इमरान ख़ान के शासनकाल में पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति की, तो पाकिस्तान की जीडीपी ग्रोथ रेट 5.5 प्रतिशत से गिरकर 3.3 प्रतिशत हो गई है। इतना ही नहीं, इस समय पाकिस्तान के जो आर्थिक हालात हैं उसके आधार पर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगले साल पाकिस्तान की जीडीपी ग्रोथ रेट 2.4 प्रतिशत तक सिमट सकती है।

जैसा कि आप जानते हैं कि पूरी दुनिया में आयात और निर्यात ज़्यादातर अमेरिका डॉलर में ही होता है। जिस देश की करेंसी डॉलर की तुलना में मज़बूत होती है, उस देश को आयात सस्ता पड़ता है। लेकिन यदि पाकिस्तान की बात की जाए, तो पाकिस्तान के करेंसी रुपये में लगातार गिरावट आ रही है। पिछले साल अगस्त में एक अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले पाकिस्तानी करेंसी की क़ीमत 122 रुपये थी, लेकिन पिछले एक साल में पाकिस्तानी करेंसी, अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले काफ़ी कमज़ोर हुई है और एक अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले पाकिस्तान की करेंसी 156 रुपये के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई है।

जानकारों के मुताबिक़, अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले पाकिस्तानी करेंसी रुपये में और भी ज़्यादा गिरावट आ सकती है। यदि ऐसा होता है, तो इससे पाकिस्तान में विदेश से सामान मंगवाना महंगा होगा, और ऐसा होने से महंगाई बढ़ना स्वाभाविक है। वैसे जब से इमरान ख़ान प्रधानमंत्री बने हैं तब से पाकिस्तान में महंगाई में तेज़ी से वृद्धि हुई है।

पिछले साल जब इमरान ख़ान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे, तो उस समय महंगाई दर 3.9 प्रतिशत थी। लेकिन एक साल के अन्दर ही पाकिस्तान में महंगाई दर दो गुनी से ज़्यादा हो गई है। इमरान ख़ान सरकार के आर्थिक कुप्रबन्धन के कारण ही पाकिस्तान में इस समय महंगाई की दर 7.3 प्रतिशत हो गई है। जानकारों का मानना है कि यदि पाकिस्तान की यही आर्थिक हालत रही, तो अगले साल तक पाकिस्तान में महंगाई दर 13 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
 
जैसा कि आप जानते हैं कि पाकिस्तान एक अशांत देश है, जहां पर आतंकी हमले और बम धमाके होना आम बात है। ऐसे में पाकिस्तान में अब विदेशी निवेश भी धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। चीन, जो कि पाकिस्तान को अपने अच्छा मित्र कहता है, को छोड़कर बाक़ी देशों ने पाकिस्तान में निवेश करने से तौबा कर ली है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस साल जुलाई-अप्रैल के बीच पाकिस्तान में विदेशी निवेश में 51.7 प्रतिशत की कमी आई है, वहीं विदेशी निजी निवेश में भी क़रीब 64.3 प्रतिशत की कमी आई है।

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है, ऐसे में विदेशी क़र्ज़ चुकाने और देश चलाने के लिए पाकिस्तान क़र्ज़ पर क़र्ज़ लेता जा रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मार्च 2019 तक पाकिस्तान पर 85 बिलियन डॉलर का क़र्ज़ हो चुका था। पाकिस्तान ने पश्चिमी यूरोप और मध्य पूर्व के देशों के अलावा चीन से भारी क़र्ज़ ले रखा है।

पुलवामा हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार लगभग बाधित हो चुका है, जिसके बाद से पाकिस्तान की आर्थिक हालत पर और भी ज़्यादा ख़राब असर पड़ा है। पाकिस्तान, भारत से काफ़ी सामान आयात करता था, लेकिन इस पर रोक लगने के बाद से पाकिस्तान में सब्ज़ियों से लेकर आम ज़रूरत का सामान काफ़ी महंगा हो गया है जिसके कारण पाकिस्तान की जनता परेशानी का सामना कर रही है।

जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि चीन और पाकिस्तान में काफ़ी पुरानी दोस्ती है, लेकिन अब चीन के साथ भी इमरान ख़ान वफ़ादारी नहीं निभा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक़, चीन की महत्वाकांक्षी सीपीईसी परियोजना के कई प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हुए हैं। कहा जाता है कि पाकिस्तान की सेना और पाकिस्तान के अधिकारी चीनी प्रोजेक्ट्स में अब ज़्यादा रूचि नहीं दिखा रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि सीपीईसी से सिर्फ़ और सिर्फ़ चीन ही फ़ायदा उठाने वाला है।

इधर, पुलवामा आतंकी हमले के बाद से मोदी सरकार की कूटनीति के चलते पाकिस्तान आतंक के मुद्दे पर पूरी दुनिया में बेनकाब हुआ है, जिसके बाद FATF (Financial Action Task Force) पाकिस्तान पर कड़ी नज़र रखे हुए हैं, जिसके कारण पाकिस्तान को क़र्ज़ मिलने में मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान को बड़ी मुश्किल से अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से 6 अरब डॉलर का बैलआउट पैकेज मिला है, लेकिन इस पैकेज के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने इतनी कड़ी आर्थिक शर्ते लगा दी हैं, जिसके कारण पाकिस्तान में टैक्स और महंगाई के कारण लोगों का जीना मुहाल हो गया है।
 
साफ़ ज़ाहिर है कि इमरान ख़ान जब से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं, तब से लेकर अभी तक उनके कार्यकाल में पाकिस्तान की आर्थिक हालत दिनों-दिन ख़राब होती जा रही है। महंगाई के कारण जहां पाकिस्तान की जनता परेशान हैं, वहीं विदेशी क़र्ज़ बढ़ने और डॉलर के मुक़ाबले रुपये की कमज़ोरी के कारण पाकिस्तान की जीडीपी ग्रोथ रेट 3 प्रतिशत पर आ गई है। यदि इमरान ख़ान ने समय रहते पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए काम नहीं किया, तो आने वाले समय में हो सकता है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाए।