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कहीं रणनीति के तहत तो विदेश यात्रा पर नहीं गये राहुल गांधी?

07 Oct 2019
राहुल गांधी की विदेश यात्रा से कांग्रेस नेताओं में मायूसी और नाराज़गी!

OCT 07 (WTN) – अभी तक की जानकारी के मुताबिक़ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव में प्रचार नहीं करेंगे। ऐसे में जबकि लोकसभा चुनाव में हार के बाद निराश और हताश कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ राहुल गांधी को चुनाव प्रचार करना चाहिए था, वे चुनाव प्रचार की गहमागहमी के बीच विदेश यात्रा पर निकल गये हैं। कोई कह रहा है कि वे बैंकाक चले गये हैं, तो कई कह रहा है कि वे विपश्यना के लिए कम्बोडिया गये हुए हैं। राहुल गांधी ‘कहां’ गये हैं इस समय यह इतना महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि यह महत्पूर्ण है कि दो राज्यों के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले राहुल गांधी विदेश यात्रा पर गये ‘क्यों‘?
 
यानी कि मान लिया जाए कि विधानसभा चुनावों से ठीक पहले विदेश यात्रा पर जाकर राहुल गांधी ने साबित कर दिया है कि वे शायद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने हार मान चुके हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि लोकसभा चुनाव के बाद केन्द्र की भाजपा सरकार की महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव में पहली परीक्षा होने जा रही है, ऐसे में राहुल गांधी को कथित महंगाई, आर्थिक मंदी और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों पर मोदी सरकार को विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान घेरना चाहिए था, लेकिन ऐसा ना करके राहुल गांधी विदेश यात्रा पर चले गये हैं। इस मुश्किल वक़्त में राहुल गांधी के अचानक विदेश यात्रा पर चले जाने के कारण कांग्रेस नेताओं को जवाब देते नहीं बन रहा है।
 
इस समय जबकि कांग्रेस में उठापटक का दौर चल रहा है, ऐसे में राहुल गांधी का विदेश यात्रा पर जाना संदेह के घेरे में आता है। दरअसल, इस समय कांग्रेस में कुछ भी सही नहीं चल रहा है। लोकसभा चुनाव में हार के बाद निराश और नाराज़ राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया था, जिसके बाद चली लम्बी खींचतान के बाद सोनिया गांधी कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष बनी। लेकिन राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटते ही, राहुल गांधी धड़े के अशोक तंवर, संजय निरुपम, मिलिन्द देवड़ा, नवजोत सिंह सिद्धु और प्रद्योत देबबर्मन जैसे नेताओं को किनारे कर दिया गया है।
 
बात यहां तक आ गई है कि अशोक तंवर, संजय निरुपम और प्रद्योत देबबर्मन जैसे नेताओं ने तो कांग्रेस के पुराने नेताओं पर तानाशाही वाला रवैया अपनाने का आरोप तक लगा दिया है। राहुल गांधी के क़रीबी नेताओं का कहना है कि मौजूदा कार्यकारी अध्‍यक्ष सोनिया गांधी के खेमे के नेता राहुल गांधी के सहयोगी नेताओं के साथ ज़्यादती कर रहे हैं।
 
ऐसे समय में जबकि कांग्रेस पार्टी लोकसभा चुनाव के बाद अपना पहला बड़ा चुनाव लड़ने जा रही है, ऐसे में राहुल गांधी को पुरानी हार को भूलकर और उससे बहुत कुछ सीखकर महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए मैदान में उतरना था। लेकिन जब कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी की टीम संकट में है, ऐसे में कांग्रेस पार्टी और अपने समर्थित नेताओं को विधानसभा चुनाव में अकेला छोड़कर राहुल गांधी का विदेश यात्रा पर जाना उनकी ही पार्टी के उनके समर्थक नेताओं को नाराज़ कर रहा है।

राजनीति में चुनाव होते रहते हैं और चुनावों में हार जीत चलती रहती है। लेकिन परिपक्व नेता वही है, जो जीत को विनम्रता से स्वीकार करे और हार पर निराश, हताश और नाराज़ होने के बजाय उससे बहुत कुछ सीखे। लेकिन जिस तरह से राहुल गांधी लोकसभा चुनाव में हार के बाद से हताश, निराश और नाराज़ नज़र आ रहे हैं, उससे साबित होता है कि अभी भी राहुल गांधी में परिपक्वता की कमी है।
 
इस समय राहुल गांधी को पूरी कांग्रेस पार्टी को एकजुट करके विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरना चाहिए था। लेकिन इस सबसे अलग राहुल गांधी विदेश यात्रा के लिए निकल गये। वैसे सूत्रों के मुताबिक़ कहा जा रहा है कि राहुल गांधी को पार्टी के सर्वे में पता चल गया है कि महाराष्ट्र और हरियाणा दोनों ही राज्यों में कांग्रेस की बुरी तरह से हार होने वाली है, ऐसे में दो चुनावों में हार की ज़िम्मेदारी उठाने से बेहतर राहुल गांधी ने विदेश यात्रा पर जाना ही बेहतर समझा।
 
लेकिन महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के ऐन मौक़े पर राहुल गांधी की विदेश यात्रा को राजनीति के जानकार राहुल गांधी की एक सियासी चाल के तौर पर देख रहे हैं। जानकारों का मानना है कि लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी ने जिस लहजे से पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दिया था, उसे साफ़ था कि लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर वे अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से नाराज़ थे।
 
महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों में टिकट वितरण, प्रचार और मैनेजमेंट की ज़िम्मेदारी और वरिष्ठ नेताओं और सम्बन्धित राज्यों के नेताओं पर है। जैसा कि हमने आपको पहले ही बता दिया है कि कांग्रेस जानती है कि इन दोनों ही राज्यों में कांग्रेस की बुरी तरह से हार होने वाली है। ऐसे में हार के बाद इन राज्यों समेत अन्य राज्यों में पार्टी की अंदरूनी कलह अपने आप शान्त हो जाएगी या फ़िर वो खुलकर सामने आएगी।

जिस तरह से इस समय कांग्रेस पार्टी में वरिष्ठ नेताओं और युवा नेताओं के बीच अहम और वर्चस्व की लड़ाई चल रही है, हो सकता है कि उससे नाराज़ होकर राहुल गांधी विदेश यात्रा पर चले गये हैं। इन दोनों ही राज्यों में जीत से आशाहीन राहुल गांधी नहीं चाहते होंगे कि एक बार फ़िर से उन पर चुनाव में हार का आरोप लगे। वहीं हो सकता है कि राहुल गांधी इस चुनावों के परिणामों के ज़रिये अपनी पार्टी के उन नेताओं की राजनीति को ख़त्म करना चाह रहे होंगे, जो कि पार्टी के लिए अंदरूनी कलह का कारण बन रहे हैं।
 
ख़ैर कारण जो भी हों, लेकिन इतना तो तय है कि विधानसभा चुनावों से पहले राहुल गांधी का विदेश यात्रा पर जाना सवाल खड़े करने के लिए काफ़ी है। आज नहीं तो कल, कभी ना कभी तो राहुल गांधी को इस सवाल का जवाब देना ही पड़ेगा। सर्वे और अनुमान हैं कि महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की करारी हार होने वाली है। लेकिन राहुल गांधी इन चुनावों में प्रचार करे या ना करें, यदि कांग्रेस पार्टी हारती है तो इसके लिए ज़िम्मेदार वे भी होंगे।