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आर्थिक मंदी के बीच भी भारत ने निभाया अपना दायित्व!

12 Oct 2019
अमेरिका समेत कई देशों का UN पर बकाया; पैसों की किल्लत से जूझ रही दुनिया की सबसे बड़ी पंचायत
 
OCT 12 (WTN) – वैश्विक आर्थिक मंदी का असर पूरी दुनिया पर देखा जा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक़, दुनिया के 90 प्रतिशत देशों की अर्थव्यवस्था को आर्थिक मंदी ने प्रभावित किया है। आर्थिक मंदी से अमेरिका जैसे विकसित देश के साथ-साथ भारत और ब्राजील जैसे विकासशील देश भी बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। आर्थिक मंदी का असर इतना गहरा और व्यापक है कि इसका सीधा-सीधा नकारात्मक प्रभाव अब संयुक्त राष्ट्र संघ पर पड़ने लगा है।
 
जी हां, पूरी दुनिया में शान्ति स्‍थापित करने समेत कई अहम मुद्दों पर निर्णय लेने वाला संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ इस समय बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है। कई कारणों के चलते संयुक्‍त राष्‍ट्र के पास नक़दी की इतनी कमी हो गई है कि उसे अब अपने परिसर के एयर कंडीशनर यूनिट और लिफ्ट तक को बंद करना पड़ा है। यह पढ़कर आपको आश्चर्य ज़रूर हुआ होगा, लेकिन न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ की इमारत में शाम 6 बजे से सुबह 8 बजे तक हीटर और एसी बंद रखने का फ़ैसला लिया गया है।

संयुक्त राष्ट्र संघ पर आर्थिक संकट इतना गहरा गया है कि संयुक्त राष्ट्र संघ के परिसर में मौजूद फव्‍वारों और वाटर कूलर को भी बंद कर दिया गया है। हालत यह हो गई है संयुक्त राष्ट्र संघ में किसी भी तरह की कोई भी नई भर्तियां नहीं हो रही हैं। और तो और सामान ख़रीदी तक बंद है। आर्थिक संकट ने संयुक्त राष्ट्र का यह हाल कर दिया है कि वहां पर किसी भी तरह की को कोई भी कॉन्फ्रेंस नहीं हो रही है।

आर्थिक संकट से बचने के लिए कई तरह के उपाय किये जा रहे हैं, जिसके तहत आधिकारिक दौरे कम कर दिये गये हैं। लेकिन इतना सब होने के कारण संयुक्‍त राष्‍ट्र के कामकाज पर बुरी तरह असर पड़ रहा है। दरअसल, वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण संयुक्त राष्ट्र संघ सालों के बाद इस तरह के आर्थिक संकट से गुजर रहा है। हालत यह है कि बजट में कटौती कर किसी तरह से UN के काम को चलाया जा रहा है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि संयुक्त राष्ट्र संघ पर वैश्विक आर्थिक संकट का अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव पड़ा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि दुनिया के 63 देशों पर संयुक्त राष्ट्र संघ का पैसा बकाया है। वैसे संयुक्त राष्ट्र ने सार्वजनिक रूप से उन देशों के बारे में नहीं बताया है, जिन्होंने अपने भुगतान को मंज़ूरी नहीं दी है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक़, भुगतान ना करने वाले देशों में अमेरिका, ब्राजील, अर्जेंटीना, मैक्सिको और ईरान जैसे देश शामिल हैं। इनके अलावा, सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, इज़रायल, वेनेजुएला और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो जैसे देश भी शामिल हैं।

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश अमेरिका अकेले ही संयुक्‍त राष्‍ट्र को सबसे ज़्यादा आर्थिक मदद देता है। अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र के कुल बजट का क़रीब 22 प्रतिशत हिस्सा देता है। लेकिन आपको पढ़कर आश्चर्य होगा कि इस समय अमेरिका ही संयुक्‍त राष्‍ट्र का सबसे बड़ा बकायेदार है, जिसके कारण दुनिया की सबसे बड़ी पंचायत की इतनी ख़राब आर्थिक हालत हो गई है।

दरअसल, 4 अक्टूबर तक 128 देशों ने संयुक्त राष्ट्र संघ को ऑपरेटिंग बजट के लिए 1.99 अरब डॉलर दिए हैं, जिसमें 1.386 अरब डॉलर की राशि 65 देशों ने दी है। इनमें से अमेरिका ने ही अकेले 1 अरब डॉलर की राशि मुहैया कराई है। ज्ञात हो कि संयुक्त राष्ट्र का बजट 2018-19 के लिये करीब 5.4 अरब डॉलर था, लेकिन आर्थिक संकट के चलते इस राशि की जुगाड़ कर पाना मुश्किल जान पड़ रहा है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हाल ही में चेतावनी देते हुए कहा था कि संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी वैश्विक संस्था 23 करोड़ डॉलर के घाटे में चल रही है और अक्टूबर महीने के आख़िरी तक संस्था का पैसा ख़त्म हो सकता है। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के क़रीब 37 हज़ार कर्मचारियों के नाम लिखे पत्र में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव गुटेरेस ने कर्मचारियों से कहा है कि उनके वेतन तथा भत्ते सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त क़दम उठाए जाएंगे।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव गुटेरेस ने कर्मचारियों को लिखे अपने पत्र में लिखा है, “संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने वर्ष 2019 में संयुक्त राष्ट्र के संचालन के लिए ज़रूरी बजट का केवल 70 प्रतिशत हिस्सा ही अदा किया है। इस कारण सितम्बर महीने के आख़िरी तक 23 करोड़ डॉलर की कमी हो गई। वहीं इस महीने के अंत तक रिज़र्व में रखी गई राशि भी ख़त्म होने से संकट खड़ा हो गया है।”

लेकिन वैश्विक आर्थिक मंदी के बीच भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिसने संयुक्त राष्ट्र में अपने सभी बकाये का भुगतान किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन के मुताबिक़, कुल सदस्य 193 देशों में से भारत समेत 35 देशों ने संयुक्त राष्ट्र में अपने सभी बकाये का भुगतान कर दिया है।

साफ़ ज़ाहिर है कि आर्थिक मंदी के बीच, जो काम अमेरिका जैसे विकसित देश नहीं कर सके वो काम आर्थिक मंदी से जूझ रहे भारत की मोदी सरकार ने कर दिखाया है। सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य होने के बाद भी अमेरिका अपना बकाया भुगतान करने में देरी कर रहा है, इससे प्रतीत होता है कि वो अपनी ज़िम्मेदार के प्रति कितना लापरवाह है।