HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

रोटी के लिए तरसती पाकिस्तान की ग़रीब जनता

15 Oct 2019
नहीं सुधरे हालत तो गर्त में धंस सकती है पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था

OCT 15 (WTN) – अपने देश की ग़रीबी, अशिक्षा और पिछड़ेपन को दूर करने के बजाय पाकिस्तान की सरकारों ने हमेशा से ही भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दिया है, और पाकिस्तान की सरकारें यह काम वहां की सेना के कहने पर करती आ रही हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि पाकिस्तान में दुनिया को दिखाने के लिए ही बस लोकतंत्र है, बाकी वहां की सरकारों पर सेना का पूरा नियंत्रण रहता है। पाकिस्तान की सरकारों और सेना ने कभी भी देश की अर्थव्यवस्था पर सही तरीक़े से ध्यान नहीं दिया, जिसका नतीज़ा है पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था डूबने के कगार पर आ गई है।

जी हां, गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के बारे में वर्ल्ड बैंक ने बेहद ही कड़े शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान की आर्थिक हालत बद से बदतर होती जा रही है, और यदि ऐसा ही रहा तो आने वाले समय में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था मंदी की गर्त में धंसती चली जाएगी। विश्व बैंक के मुताबिक़, पाकिस्तान की आर्थिक हालत बहुत ही ख़राब है। बढ़ते राजस्व घाटे और विदेशी मुद्रा भण्डार में कमी के कारण पाकिस्तान का आर्थिक संकट ख़त्म नहीं हो रहा है।
 
पाकिस्तान की इस आर्थिक हालत के लिए पाकिस्तान के लोग उनके प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को ही इसके लिए ज़िम्मेदार मान रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इमरान ख़ान के प्रधानमंत्री बनने के बाद से पिछले 10 महीने में पाकिस्तानी रुपये में 30 प्रतिशत की गिरावट आई है। इतना ही नहीं, इस दौरान पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भण्डार भी लगातार कम होता गया है। पाकिस्तान की हालत यह हो गई है कि भारत में सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव में ख़र्च हुए क़रीब सात अरब डॉलर के बराबर ही पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भण्डार बचा है।

आतंकियों को ट्रेनिंग और पनाह देना वाले पाकिस्तान की आर्थिक हालत यह हो गई है कि पाकिस्तान से निर्यान ना के बराबर हो गया है। बात करें महंगाई की तो पाकिस्तान में महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। पाकिस्तान में राशन से लेकर सब्ज़ियों के दाम इतने बढ़ गये हैं कि वे ग़रीब और मध्यम वर्ग की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं। रोटी की क़ीमत भी इतनी बढ़ गई है कि पाकिस्तान में ग़रीबों का जीना मुश्किल होता जा रहा है।
 
ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान की दयनीय आर्थिक हालत के बाद उसे अंतर्राष्ट्रीय सहायता ना मिली हो। वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में साफ़ कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा पाकिस्तान को 6 अरब डॉलर का राहत पैकेज जारी किए जाने के बाद भी पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था में मंदी गहरा सकती है, ऐसा इसलिए, क्योंकि पाकिस्तान की सरकार का वित्तीय मैनेजमेंट सही नहीं है।
 
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के बारे में वर्ल्ड बैंक का कहना है कि इसमें मध्यम अवधि में हल्की स्थिरता की उम्मीद की गई है। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक़, ख़राब आर्थिक नीतियों की वजह से पाकिस्तान क़र्ज़ में डूबता जा रहा है। इतना ही नहीं, बढ़ते राजकोषीय घाटे के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। वर्ल्ड बैंक ने चेतावनी देते हुए कहा है कि ऐसे में यदि पाकिस्तान की आर्थिक हालत नहीं सुधरती है, तो वैश्विक वित्तीय बाजार में अस्थिरता की वजह से प्राइवेट एक्सटर्नल फाइनेंसिंग में भी दिक्कतें आ सकती हैं।

वर्ल्ड बैंक ने पाकिस्तान के बारे में अपनी आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2020 में पाकिस्तान की आर्थिक ग्रोथ घटकर 2.4 प्रतिशत के स्तर तक आ सकती है। वहीं, वित्त वर्ष 2021 तक यह सुधार होकर यह सिर्फ़ 3 प्रतिशत तक ही पहुंच सकती है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह सुधार भी वैश्विक बाज़ार में स्थिरता, कच्चे तेल की क़ीमतों में नरमी और घटते राजनीतिक और सिक्योरिटी जोखिम पर निर्भर करता है।

जैसा कि हमने पहले आपको बताया कि पाकिस्तान में महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। वर्ल्ड बैंक ने पाकिस्तान की महंगाई को लेकर अपनी रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2020 तक पाकिस्तान में महंगाई की दर 13 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच सकती है। हालांकि, इसके बाद महंगाई दर में गिरावट देखने को मिलेगी। पाकिस्तान की बैंकों के बारे में वर्ल्ड बैंक का कहना है कि पाकिस्तान के कॉमर्शियल बैंकों की स्थिति वित्तीय रूप से बेहतर रहेगी, लेकिन पब्लिक सेक्टर बैंकों द्वारा केन्द्रीय बैंक से क़र्ज़ लेने और ब्याज दरों में वृद्धि होने से इनकी प्राइवेट क्रेडिट पर बुरा असर पड़ सकता है।
 
यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कई कारणों से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इन दिनों ख़राब दौर से गुजर रही है। यह सच है कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक आर्थिक मंदी की चपेट में हैं, लेकिन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की जो बदतर हालत है उसके लिए पाकिस्तान की सरकारों कुछ ज़्यादा ही ज़िम्मेदार हैं। अब देखना होगा कि पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार आतंकियों पर नकेल कसने में कामयाब हो पाती है कि नहीं, क्योंकि यदि पाकिस्तान ऐसा नहीं करता है तो उसकी डूबती अर्थव्यवस्था को वैश्विक वित्तीय संस्थाओं से मदद मिलना मुश्किल साबित होगा।