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मलेशिया को सबक सिखाने की तैयारी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी!

15 Oct 2019
कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ मलेशिया को पड़ सकता है ‘भारी’, आयात में कटौती कर सकती है मोदी सरकार

OCT 15 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कुशल राजनेता होने के साथ-साथ कुशल कूटनीतिज्ञ भी हैं। लगातार दो लोकसभा चुनाव में विपक्ष को बुरी तरह से हराकर नरेन्द्र मोदी ने जहां एक तरफ़ साबित कर दिया है कि उनकी राजनीति बहुत बड़े स्तर की है, वहीं आतंक के मामले में पाकिस्तान को सबक सिखाकर प्रधानमंत्री मोदी ने पूरी दुनिया को यह बता दिया है कि वे कितने बड़े कूटनीतिज्ञ हैं। आप जानते ही हैं कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद मोदी सरकार ने किस तरह से पाकिस्तान के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। वहीं मोदी सरकार ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को पूरी दुनिया में बेनकाब करने के साथ-साथ अलग-थलग कर दिया है।
 
वैसे तो कश्मीर मुद्दे पर लगभग पूरी दुनिया ने भारत का साथ दिया है, लेकिन कश्मीर मुद्दे पर मलेशिया ने पाकिस्तान का साथ देकर लगता है कि बहुत बड़ी ग़लती कर ली है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कश्मीर मुद्दे पर मलेशिया के पाकिस्तान के पक्ष में खड़े होने के बाद से भारत और मलेशिया के रिश्तों में तनाव बढ़ता नज़र आ रहा है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, भारत, मलेशिया से पाम ऑयल और अन्य उत्पादों के आयात में कटौती करने पर विचार कर रहा है।
 
जानकारी के मुताबिक़, भारतीय रिफाइनरियों ने मलेशिया से पाम ऑयल ख़रीदना बंद कर दिया है। ऐसा इसलिए, क्योंकि आयातकों को डर है कि मोदी सरकार, मलेशिया से आयात घटाने के लिए टैक्स बढ़ाने समेत कई अन्य क़दम उठा सकती है। हालांकि, अभी तक भारत सरकार की तरफ़ से कोई भी आधिकारिक बयान इस बारे में नहीं आया है। लेकिन, इस बारे में व्यापारियों का कहना है कि भारत सरकार का रूख साफ़ होने तक वे इण्डोनेशिया से ही पाम ऑयल आयात करेंगे।
 
जानकारी के मुताबिक़, भारत दुनिया भर में खाद्य तेल का सबसे बड़ा आयातक देश है। वहीं भारत, मलेशियाई पाम ऑयल का सबसे बड़ा ख़रीददार है। साल 2019 के पहले नौ महीनों में भारत ने 39 लाख टन पाम ऑयल ख़रीदा है। वहीं दूसरी तरफ़ भारत, मलेशिया को पेट्रोलियम उत्पाद, जीव-जन्तु और मांस, मेटल्स, केमिकल उत्पादों का निर्यात करता है। यानी कि साफ़ है कि दोनों ही देशों के बीच दोतरफ़ा व्यापार होता है।
 
कश्मीर मुद्दे पर मलेशिया सरकार द्वारा पाकिस्तान का साथ देने के बाद भारत सरकार के कथित कड़े क़दम के बारे में मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर बिन मोहम्मद का कहना है, “उनकी सरकार भारत द्वारा उठाए गए क़दमों के प्रभाव का अध्ययन करेगी। भारत भी मलेशिया को सामान निर्यात कर रहा है। यह केवल एकतरफ़ा व्यापार नहीं है बल्कि द्विपक्षीय है। कश्मीर मुद्दे पर दिये गये मेरे बयान को दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर की वजह नहीं बनाया जाना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो इससे दोनों देशों की ही हार होगी।”

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 27 सितम्बर को संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में मलेशियाई प्रधानमंत्री महातिर बिन मोहम्मद ने कश्मीर को लेकर भारत को नाराज़ करने वाला बयान दे दिया था। अपने सम्बोधन में महातिर ने कहा था, "जम्मू-कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र के संकल्प के बावजूद, उस पर हमला कर कब्जा किया जा रहा है। इस कार्रवाई के पीछे कुछ वजहें हो सकती हैं, लेकिन फिर भी यह ग़लत है। इस समस्या का समाधान शान्तिपूर्वक तरीक़ों से ही होना चाहिए।” इतना ही नहीं महातिर ने आगे कहा था, “भारत को पाकिस्तान के साथ मिलकर इस समस्या का समाधान करना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र को नज़रअंदाज़ करने से इस संस्था और इसके नियमों की प्रतिष्ठा धूमिल होगी।"
 
मलेशियाई प्रधानमंत्री के कश्मीर पर दिये गये विवादित बयान के बाद भारत में मलेशिया और उसके उत्पादों का बहिष्कार करने की मांग उठी थी। जिसके बाद अब कहा जा रहा है कि भारत सरकार मलेशियाई आयात में कटौती करने के विकल्प पर गम्भीरता से विचार कर रही है। लगता है कि मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद भारत की आर्थिक शक्ति और प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति को अच्छी तरह से समझ नहीं सके हैं।

आतंक और कश्मीर के मुद्दे पर जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान को उसकी औकात याद दिलाते हुए उसकी अर्थव्यवस्था को कंगाली की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है उसे साफ़तौर पर प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति जीत के तौर पर देखा जा रहा है। भारत ने यदि मलेशिया से होने वाले आयात में कटौती कर दी तो इससे मलेशिया को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, जबकि इसके बदले में भारत को कुछ ज़्यादा आर्थिक क्षति नहीं होने वाली है। बेहतर होगा कि मलेशिया, कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ ना देकर भारत का साथ दे, या फ़िर तटस्थ रहे। क्योंकि यदि मलेशिया ने कश्मीर मुद्दे पर भारत के विरोध में कोई भी क़दम उठाया, तो प्रधानमंत्री मोदी की आक्रामक कूटनीति के कारण मलेशिया को आर्थिक नुकसान उठाने तैयार रहना चाहिए।