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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘इस दांव’ से चित होगा तुर्की!

29 Oct 2019
मोदी सरकार ने की तुर्की को चारों तरफ़ से घेरने की ‘प्लानिंग’!

OCT 29 (WTN) – 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में जिस तरह से नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने जीत हासिल की है, उससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि प्रधानमंत्री मोदी राजनीति के बहुत बड़े रणनीतिकार हैं। वहीं पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सर्जिकल स्ट्राइक, एअर स्ट्राइक करके और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पूरी दुनिया में पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कूटनीति में भी प्रधानमंत्री मोदी सफ़ल रहे हैं। यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कि प्रधानमंत्री मोदी रणनीति और कूटनीति दोनों के माहिर खिलाड़ी हैं।

जैसा कि आप जानते हैं कि अपनी कूटनीति के तहत प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान को ऐसा सबक सिखाया है कि पाकिस्तान FATF द्वारा ब्लैक लिस्टेड होने की कगार पर आ गया है। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान की इस तरह के घेराबंदी की है कि पाकिस्तान की आर्थिक हालत बद से बदतर होती जा रही है।

जैसा कि आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जम्मू कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भारत का पक्ष मज़बूती से पूरी दुनिया के सामने रखा है और पाकिस्तान को इस मामले में लगभग बिल्कुल अकेला कर दिया है।

मोदी सरकार द्वारा कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद दुनिया के लगभग सभी देशों ने भारत का साथ दिया है। बस चीन, मलेशिया और तुर्की जैसे देशों ने ज़रूर पाकिस्तान का साथ देकर मोदी सरकार को नाराज़ करने का काम किया है। लेकिन अपनी कूटनीति के लिए प्रसिद्ध प्रधानमंत्री मोदी अब अपने ही तरीक़े से तुर्की को सबक सिखाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
 
आपक जानकारी के लिए बता दें कि संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने 24 सितम्बर को दिये अपने भाषण में कश्मीर मुद्दा उठाकर पाकिस्तान का समर्थन किया था। अपने भाषण से पहले तुर्की राष्ट्रपति एर्दोगन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से मुलाक़ात भी की थी।

जैसा कि आप जानते हैं कि 5 अगस्त को भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा ख़त्म किया था, जिसके बाद पाकिस्तान, भारत के इस आंतरिक मामल में लगातार दखलंदाज़ी करते हुए कश्मीर मुद्दे को पूरी दुनिया में उठाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति के कारण पाकिस्तान दुनिया के हर मंच पर इस मुद्दे पर असफ़ल साबित हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति का ही नतीज़ा है कि सऊदी अरब और यूएई जैसे मुस्लिम देश भी कश्मीर मुद्दे पर भारत के साथ हैं।
 
कश्मीर मुद्दे पर सऊदी अरब और यूएई का कहना है कि कश्मीर मुद्दा भारत का आंतंरिक मामला है और वे इसमें दखल नहीं देंगे। लेकिन चीन और मलेशिया जैसे देशों के साथ तुर्की, कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खड़ा नज़र आ रहा है। कश्मीर मुद्दे पर तुर्की के पाकिस्तान के साथ खड़े होने के बाद भारत ने तुर्की केो घेरने के लिए उसके ख़िलाफ़ कई कूटनीतिक और आर्थिक क़दम उठाए हैं।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान ही तुर्की के ख़िलाफ़ अपना पहला कूटनीतिक क़दम उठा लिया था। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन के कश्मीर मुद्दा उठाने के बाद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साइप्रस, अर्मेनिया और ग्रीस के नेताओं से मुलाकात की थी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साइप्रस और ग्रीस का तुर्की से सालों पुराना क्षेत्रीय विवाद रहा है। वहीं अर्मेनिया का आरोप है कि साल 1915 में उसके देश में हुए लाखों लोगों के नरसंहार के लिए तुर्की ही ज़िम्मेदार है। प्रधानमंत्री मोदी ने तुर्की को घेरने की कूटनीति के तहत इन तीनों ही देशों के नेताओं से मुलाक़ात के दौरान तुर्की के ख़िलाफ़ खड़े इन तीनों ही देशों के तुर्की के ख़िलाफ़ रुख का समर्थन किया था।

तुर्की को घेरने की कूटनीति के तहत मोदी सरकार ने दूसरा क़दम तब उठाया जब तुर्की ने सीरिया में कुर्दों के ख़िलाफ़ हमला किया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 9 अक्टूबर को तुर्की की सेना ने उत्तर-पूर्व सीरिया में कुर्दों के ख़िलाफ़ हमला कर दिया था और कहा था कि वह यहां से कुर्दों का सफाया करके इसे एक सुरक्षित ज़ोन बनाएगा। तुर्की के इस हमले की भारत ने कड़ी आलोचना की थी और कहा था कि तुर्की को संयम बरतना चाहिए।
 
तुर्की के ख़िलाफ़ एक और ठोस कूटनीतिक कार्रवाई करते हुए भारत ने इस महीने के आख़िरी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्तावित तुर्की दौरे को रद्द कर दिया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी 29 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक सऊदी अरब का दौरा करने के बाद तुर्की जाने वाले थे।
 
इधर, भारत ने तुर्की के साथ रक्षा सम्बन्धों में भी कमी कर दी है। दरअसल, तुर्की और पाकिस्तान के बीच इन दिनों रक्षा सम्बन्ध काफ़ी क़रीबी और मज़बूत होते जा रहे हैं। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए भारत ने तुर्की को हथियारों के निर्यात में कटौती कर दी है। इतना ही नहीं, भारत ने अपने पर्यटकों को तुर्की जाने के लिए बाक़ायदा एक ट्रैवल एडवाइज़री भी जारी की है। मोदी सरकार के इन क़दमों से साफ़ ज़ाहिर होता है कि कश्मीर मुद्दे पर तुर्की का पाकिस्तान के साथ खड़े रहना अब उसके लिए भारी पड़ने वाला है।

जैसा कि आप जानते हैं कि मोदी सरकार के पहले की सरकारों की विदेश नीति में मध्य-पूर्व देशों के साथ बस आर्थिक सम्बन्ध ही प्रमुख रहे हैं। लेकिन मोदी सरकार मध्य-पूर्व की विदेश नीति में परिवर्तन करने जा रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्य-पूर्व देशों के साथ भारत के रिश्तों में आर्थिक हित और आंतरिक राजनीति प्रमुख हैं। मध्य-पूर्व के देशों के साथ तेल व्यापार भारत के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण है। वहीं मध्य-पूर्व देशों में बड़ी संख्या में बसे भारतीयों द्वारा देश में भेजे गये पैसे भी काफ़ी मायने रखते हैं। इतना ही नहीं, भारत की मुस्लिम आबादी को देखते हुए मध्य-पूर्व देशों से अच्छे रिश्ते भारत की घरेलू राजनीति के लिए अहम माने जाते हैं।
 
प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि तुर्की की सबसे बड़ी काट सिर्फ़ और सिर्फ़ सऊदी अरब ही है। मध्य पूर्व में तुर्की से मिलने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी सऊदी अरब को साथ लेकर चलने की कूटनीति पर काम कर रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मुस्लिम बाहुल्य मध्य-पूर्व की राजनीति बेहद जटिल है।

भारत ने तुर्की के ख़िलाफ़ कूटनीतिक क़दम उठाकर और सऊदी अरब को प्राथमिकता देकर संकेत दे दिये हैं कि भारत के लिए आर्थिक, कूटनीतिक और भारत के मुस्लिमों के दृष्टिकोण से सऊद अरब ज़्यादा महत्वपूर्ण है। जैसा कि आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सऊदी अरब के दौरे पर हैं। यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कि तेल और आर्थिक हितों के अलावा अब तुर्की की अकड़ ढीली करने के लिए मोदी सरकार मध्य-पूर्व देशों के देशों के साथ कूटनीतिक सम्बन्ध स्थापित कर रही है।