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जानिए क्यों गोल्ड बैंकिंग है भारत के गोल्ड मार्केट के लिए बेहद ज़रूरी?

01 Nov 2019
बुलियन बैंकिंग से बदल सकती है भारत के गोल्ड मार्केट की तस्वीर

NOV 01 (WTN) – गोल्ड बैंक! पढ़कर अजीब लगा होगा आपको कि सोने का बैंक। यदि हम आपसे कहें कि आने वाले समय में देश में गोल्ड बैंक खुलने वाले हैं, तो आप सोच रहे होंगे कि आख़िर गोल्ड बैंक होते क्या हैं और कैसे काम करते हैं, तो आइये आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं। सबसे पहले तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने भारत सरकार को देश में चरणबद्ध तरीक़े से देश में बुलियन बैंकिंग यानी कि गोल्ड बैंकिंग शुरू करने की सलाह दी है।
 
दरअसल, WGC ने यह सुझाव इसलिए दिया है जिससे भारत के विशाल गोल्ड मार्केट को संगठित किया जा सके और उसे पारदर्शी बनाया जा सके। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन के बाद भारत गोल्ड का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। चीन में हर साल क़रीब 984 मीट्रिक टन गोल्ड की खपत है। वहीं भारत में हर साल क़रीब 849 मीट्रिक टन गोल्ड की खपत है। जैसा कि आप जानते हैं कि भारत में गोल्ड को स्टेटस सिम्बल के रूप में जाना जाता है और भारत में गोल्ड की सबसे ज़्यादा खपत जेवरात बनाने में होती है।
 
आंकड़ों के हिसाब से भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कन्ज्यूमर देश है, लेकिन फ़िर भी भारत में गोल्ड मार्केट के सामने कई चुनौतियां हैं। भारतीय गोल्ड मार्केट की सबसे बड़ी चुनौती है गोल्ड की क्वॉलिटी का अश्योरेंस ना होना। वहीं भारतीय गोल्ड मार्केट अभी भी असंगठित है जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से भारतीय गोल्ड मार्केट प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाता है और इसी कारण से वो कमज़ोर स्थिति में है। जानकारों का मानना है कि इस तरह की सभी समस्याओं से निपटने के लिए बुलियन बैंकिंग यानी कि गोल्ड बैंकिंग एक बहुत बढ़िया रास्ता हो सकता है।

माना जा रहा है कि यदि भारत में गोल्ड बैंकिंग की शुरुआत होती है, तो इससे भारत का गोल्ड मार्केट प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय बाज़ारों में अपनी जगह बना पाएगा। ऐसा नहीं है कि मोदी सरकार के लिए गोल्ड बैंकिंग की बात कोई नई बात है। भारत में बुलियन बैंकिंग की शुरुआत गोल्ड पॉलिसी का एक अहम हिस्सा कहा जा रहा है और मोदी सरकार काफ़ी वक़्त से इसे लाने की तैयारी कर रही है। कहा जा रहा है कि भारत में गोल्ड बैंकिंग की कभी भी शुरुआत हो सकती है।

दरअसल, मोदी सरकार गोल्ड को ऐसेट क्लास बनाने के उद्देश्य से इस नीति को लाने पर विचार कर रही है। भारत के विशाल गोल्ड मार्केट को देखते हुए ही वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने भारत में बुलियन बैंकिंग (गोल्ड बैंकिंग) की ज़रूरत पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। कहा जा रहा है कि इस रिपोर्ट को जल्द ही वित्त मंत्रालय, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इण्डिया और SEBI (Securities and Exchange Board of India) को सौंपा जा सकता है।

भारत के लिहाज़ से देखा जाए तो गोल्ड बैंकिंग से भारत की अर्थव्यवस्था में काफ़ी नये बदलाव आ सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोल्ड सबसे अच्छा लिक्विड ऐसेट क्लास है यानी कि गोल्ड को आसानी से कैश में भुनाया जा सकता है। भारत के लिए गोल्ड बैंकिंग और बुलियन मार्केट ज़रूर नया हो, लेकिन चीन, यूके,अमेरिका और स्विट्ज़रलैंड समेत कई देशों में बुलियन मार्केट पूरी तरह कामकाजी और संगठित है।

इन देशों में बुलियन बैंकिंग के जरिए लोग बुलियन मार्केट में पहुंचते हैं। वैसे पारम्परिक तौर पर बुलियन मार्केट पर यूके और अमेरिका का दबदबा था और यहां पर मुख्य रूप से ग्लोबल बैंक ये सेवाएं देते थे। लेकिन चीन में संगठित बाज़ार के उभरने से सिस्टम में एक नया बदलाव आया है। जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि चीन में गोल्ड की सबसे ज़्यादा खपत होती है। ऐसे में आज की तारीख में चीनी बैंकों की बड़ी तादात बुलियन मार्केट में भी हिस्सेदारी है।

अब बात करते हैं भारत के गोल्ड मार्केट की तो भारत वैसे तो गोल्ड खपत के मामले में दुनिया में दूसरे नम्बर का देश है, लेकिन भारत में सोने का ज़्यादातर इस्तेमाल गहने बनवाने में ही होता है। लेकिन दुनिया का दूसरे सबसे बड़ा गोल्ड मार्केट होने के बाद भी भारत में सर्राफा बैंकिंग अभी अपने शुरुआती स्तर पर ही है और सीमित सेवाएं ही दे रहा है। इसमें सोने के जेवरातों की बिक्री, सोने के सिक्कों की बिक्री और जेवरातों के बदले में क़र्ज़ जैसी सेवाएं शामिल हैं। लेकिन ये सेवाएं मुख्यधारा की बुलियन बैंकिंग इंडस्ट्री में सिर्फ़ नॉन-कोर सर्विस में गिनी जाती हैं।
 
अब आपको बताते हैं कि आख़िरकार गोल्ड बैंक काम किस तरह से करेंगे। बुलियन बैंकिंग या गोल्ड बैंकिंग के ज़रिये आम लोगों सोने के बदले क़र्ज़ ले सकते हैं या फ़िर किसी को क़र्ज़ दे सकते हैं। वहीं बुलियन बैंकिंग में गोल्ड के ज़रिये निवेश भी किया जा सकता है। और तो और इसमें शेयर की तरह सोने की ट्रेडिंग भी की जा सकती है। जैसे कि दुनियाभर में फ़िलहाल बुलियन बैंकिंग का इस्तेमाल सबसे ज़्यादा निवेश के लिए होता है, भारत में भी बुलियन बैंकिंग का इस्तेमाल ज़्यादातर निवेश के लिए ही होगा।
 
बुलियन बैंकिंग से आम लोगों को कई फ़ायदे मिलेंगे। जैसे अगर किसी को अपना सोना बेचना है तो यहां पर वो सोने की गुणवत्ता के आधार पर सही क़ीमत पर अपना सोना बेच सकेंगे। जबकि अभी सोना बेचने के समय स्थानीय ज्वैलर्स अक्सर सोने की गुणवत्ता पर सवाल उठाकर कम दाम में सोना ख़रीद लेते हैं। वहीं पैसों की कभी भी और कहीं भी ज़रूरत पड़ने पर बुलियन बैंकिंग के ज़रिये आसानी से पैसा मिल सकेगा। वहीं बुलियन बैंकिंग में गोल्ड मार्केट पूरी तरह से संगठित हो जाएगा, ऐसे में शेयर्स की तरह डिमैट में सोना रहा करेगा और जब भी जिसे भी पैसों की ज़रूरत होगी वो सोना बेचकर पैसा हासिल कर सकेगा।