HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

बहुत ज़रूरी है आपका पीएफ सम्बन्धित 'इन' नियमों को जानना

18 Nov 2019
जानिए कैसे तय होती है आपकी मासिक पेंशन?
 
NOV 18 (WTN) – यदि आप निजी क्षेत्र में नौकरी करते हैं तो आपके लिए पीएफ सम्बन्धित कुछ नियमों का जानना काफ़ी ज़रूरी है, क्योंकि यदि आपको इन नियमों की जानकारी नहीं है और इस कारण से आप कोई ग़लत फ़ैसला लेते हैं तो आपको आर्थिक नुकसान हो सकता है। एक सर्वे के मुताबिक़, नौकरी करने वाले ज़्यादातर लोगों को पीएफ़ सम्बन्धित नियमों के बारे या तो जानकारी ही नहीं होती है या फ़िर जो जानकारी होती है वो ग़लत जानकारी होती है, जिसके कारण ऐसे लोग कई तरह की सुविधाओं और लाभ से वन्चित रह जाते हैं और उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। आज इस लेख में हम आपको पीएफ सम्बन्धित ऐसे ही कुछ नियमों के बारे में बताते हैं, जिसका जानना आपके लिए काफ़ी ज़रूरी है।
 
यदि आप प्राइवेट सेक्टर में जॉब करते हैं और यदि आप नौकरी बदलते हैं तो आपको नौकरी बदलने के समय कभी भी पीएफ की रक़म को निकाल नहीं बल्कि उसे ट्रांसफर करा लें। ऐसा करने से ना केवल आपको टैक्स बचत में फ़ायदा मिलेगा बल्कि रिटायरमेण्ट के समय आपको पेंशन का लाभ भी मिल सकेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पीएफ ट्रांसफर, एम्प्लॉई पेंशन स्कीम में एम्प्लॉई प्रोविडेण्ट फण्ड (EPF) को निरन्तर मेम्बरशिप माना जाता है।
 
जानकारी के लिए बता दें कि यदि आप निजी क्षेत्र में काम करते हैं और आप पांच साल के अन्दर पीएफ से पैसे निकालते हैं तो न केवल आपको पीएफ निकालने पर टैक्स देना होगा बल्कि, इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत ख़ुद के योगदान पर मिलने वाले टैक्स बचत का भी लाभ आपको नहीं मिल पाएगा। लेकिन वहीं यदि आप पीएफ ट्रांसफर कराते हैं तो इसके बाद आप इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचत के साथ ही सेवानिवृत्ति के समय पेंशन के भी हकदार होंगे।
 
नियमानुसार यदि कोई व्यक्ति 10 से ज़्यादा किसी संस्थान में है और उसकी उम्र 58 साल से ज़्यादा हो गई है, तो वह सेवानिवृत्ति पेंशन का हक़दार हो जाएगा। अन्यथा, उस व्यक्ति को 58 साल से पहले रिटायर होने और सेवा में 10 साल रहने पर पेंशन मिलेगी। लेकिन दोनों ही मामलों में मिलने वाली पेंशन के लिए अलग-अलग क्रायटेरिया है।
 
आप सोच रहे होंगे कि पेंशन योग्य सैलरी किस आधार पर तय होती है। तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अधिकतम पेंशन योग्य वेतन प्रति माह 15,000 रुपये तक सीमित है। जब तक कि नियोक्ता और कर्मचारी के विकल्प पर मौजूदा सदस्य 1 सितम्बर 2014 तक 6,500 रुपये प्रति माह से अधिक वेतन पर योगदान दे रहे थे और बाद में 15,000 रुपये से अधिक वेतन पर योगदान दे रहे हैं। इसके लिए शर्त यह है कि सदस्यों को अतिरिक्त योगदान के रूप में 15,000 रुपये से ज़्यादा वेतन पर 1/16 प्रतिशत की दर से योगदान करना होगा।
 
वहीं पेंशन योग्य सर्विस के निर्धारण के लिए भी कुछ नियम हैं। जैसे किसी भी EPFO सदस्य की पेंशन योग्य सर्विस इस बात पर निर्भर करती है कि उन्होंने ईपीएफ में कितना योगदान किया है। अगर कोई सदस्य 58 साल की उम्र में रिटायर्ड होता है और 20 साल से ज़्यादा पेंशन योग्य सर्विस में है तो उनके पेंशन योग्य सर्विस में 2 साल और बढ़ा दिये जाएंगे।
 
वहीं मंथली पेंशन तय करने के लिए भी एक निश्चित क्रायटेरिया है। उदाहरण के तौर पर यदि रिटायर्ड होने पर किसी सदस्य की मासिक पेंशन योग्य सैलरी 20,000 रुपये और पेंशन योग्य सर्विस 20 साल है तो उसकी मासिक पेंशन 6,285 रुपये होगी। ऐसे में हमारी आपको सलाह है कि नौकरी बदलने पर पीएफ की रक़म निकालने की जगह इसे ट्रांसफर करा लें, जिससे आपको रिटायरमेंट पर टैक्स छूट और पेंशन का लाभ मिल सके।