HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

आख़िर कब असर दिखाएंगे अर्थव्यवस्था को गति देने उठाए मोदी सरकार के उपाय?

30 Nov 2019
आर्थिक सुस्ती से आर्थिक विकास दर को लगा बड़ा झटका
 
NOV 30 (WTN) – आंकड़ों के हिसाब से देश की आर्थिक हालत इन दिनों चिन्ताजनक है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े बयां कर रहे हैं कि देश की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि चालू वित्त वर्ष (2019-20) की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ का आंकड़ा 4.5 प्रतिशत पर पहुंच गया है, और यह क़रीब 6 साल में किसी एक तिमाही की सबसे बड़ी गिरावट है। हालांकि, मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार के.वी.सुब्रमण्यन के मुताबिक़ उन्हें उम्‍मीद है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट एक बार फ़िर से रफ़्तार पकड़ेगी।
 
सरकार की तरफ़ से भी दावा किया जा रहा है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट में वृद्धि देखी जाएगी, क्योंकि सरकार ने पिछले तीन महीनों में अर्थव्यवस्था में तेज़ी लाने के लिए कई बड़े फ़ैसले लिये हैं। और इसी कारण से सरकार की तरफ़ से कहा जा रहा है और उद्योग जगत को आशा है कि आने वाली तिमाही में जीडीपी के आंकड़ों में सुधार हो सकता है। आइये आपको बताते हैं कि मोदी सरकार के वो कौन से ऐसे फ़ैसले रहे हैं, जिनके आधार पर कहा जा रहा है और आशा की जा रही है कि आने वाले समय में जीडीपी ग्रोथ रेट में सुधार हो सकता है।
 
सबसे पहले तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सितम्बर महीने में मोदी सरकार ने कॉरपोरेट टैक्‍स में कटौती का एक बड़ा ऐलान किया था। जिसमें घरेलू कम्पनियों पर बिना किसी छूट के इनकम टैक्स की सीमा 22 प्रतिशत कर दी गई थी। वहीं इसमें सरचार्ज और सेस जोड़ने के बाद कम्पनी को 25.17 प्रतिशत टैक्स ही देना होगा। मोदी सरकार के इस फ़ैसले से देश की उन बड़ी कम्पनियों को फ़ायदा मिलने की उम्मीद है, जो 30 प्रतिशत कॉरपोरेट टैक्स स्लैब में आती हैं।
 
वहीं वैश्विक आर्थिक सुस्ती से निपटने के लिए सरकार ने नए निवेश करने वाली घरेलू कम्पनियों को भी राहत दी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मोदी सरकार के फ़ैसले मुताबिक़, 1 अक्टूबर के बाद मैन्युफैक्चरिंग कम्पनी स्थापित करने वाले कारोबारियों को सिर्फ़ 15 प्रतिशत की दर से टैक्स देना होगा। वहीं सभी तरह के सरचार्ज और सेस लगने के बाद टैक्‍स की दर 17.10 प्रतिशत हो जाएगी। मोदी सरकार के इस फ़ैसले से नये निवेशकों को पहले की तुलना में काफ़ी फ़ायदा होगा, क्योंकि इससे पहले नए निवेशकों को 25 प्रतिशत की दर से टैक्स देना होता था। जानकारों के मुताबिक़, मोदी सरकार के इस फ़ैसले से नए कारोबार में वृद्धि होगी और इससे रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे।
 
अर्थशास्त्र का सिद्धांत है कि जब लोगों के पास पैसे रहेगा तो वे उसे ख़र्च करेंगे, और जब पैसा ख़र्च होगा तो पैसे के सर्कुलेशन से अर्थव्यवस्था आगे बढ़ेगी। लोगों के पास पैसा आए इसलिए मोदी सरकार देश के अलग-अलग शहरों में बैंकों के माध्यम से 'लोन मेला' लगाने जा रही है। इन लोन मेलों के ज़रिये बैंक के कर्मचारी अलग-अलग इलाकों में कैम्प लगाकर क़र्ज़ वितरित करेंगे। इन लोन मेलों का उद्देश्य उद्यमियों, किसानों और दूसरे ज़रूरतमंदों को लोन उपलब्ध कराना है ताक़ि मार्केट में नक़दी की कमी को पूरा किया जा सके।
 
जैसा कि आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य भारत में विदेशी निवेश को बढ़ाना है। इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए पिछले दिनों सरकार की ओर से एक टास्क फोर्स समिति का गठन किया गया था। इस समिति को आने वाले 5 सालों में 1.4 ट्रिलियन डॉलर यानी क़रीब 100 लाख करोड़ का निवेश बढ़ाने के लिए रोडमैप तैयार करने की ज़िम्‍मेदारी दी गई है।
 
वहीं मोदी सरकार ने सितम्बर के महीने में रियल एस्टेट को बूस्‍ट देने के लिए कई बड़े ऐलान किये थे। इसके तहत सरकार 10 हज़ार करोड़ रुपये का फण्ड उन अधूरे प्रोजेक्ट को देगी, जिनमें 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। ज़ाहिर है कि सरकार द्वारा फण्ड देने के कारण लटके हुए रिटल एस्टेट प्रोजेक्‍ट्स पूरे होंगे और घर ख़रीददारों को जल्‍द से जल्द पजेशन मिल सकेगा। वहीं मोदी सरकार घर ख़रीदने के लिए ज़रूरी फण्ड के लिए स्पेशल विण्डो बनाने जा रही है। इस विण्डो के ज़रिए घर ख़रीदने वालों को लोन लेने में आसानी होगी और वे आसानी से घर ख़रीद सकेंगे।
 
वहीं बैंकिंग सेक्टर में सुधार करते हुए मोदी सरकार ने अगस्‍त महीने में कई बड़े बैंकों के मर्जर करने का ऐलान किया था। वैसे तो बैंकों के मर्जर होने की प्रक्रिया पूरा होने में समय लगेगा, लेकिन बैंकों के विलय के फ़ैसले का फ़ायदा देश की अर्थव्यवस्था को मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है। बैंकिंग सेक्टर के जानकारों के मुताबिक़, बैंकों का विशाल होना न सिर्फ अर्थव्यवस्था के लिए फ़ायदेमंद होता है, बल्कि इससे उनके व्यावसायिक लागत में भी कमी आती है।
 
बैंकों के मर्जर के बारे में मोदी सरकार का तर्क है कि इससे बैंक और भी ज़्यादा मज़बूत होंगे जिससे उनकी क़र्ज़ देने की क्षमता बढ़ेगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फ़िलहाल कुछ बैंकों की क़र्ज़ देने की स्थिति कमज़ोर होने से कई कम्पनियों का निवेश प्रभावित हो रहा है। वहीं मोदी सरकार ने बैंकों की आर्थिक हालत सुधारने के लिए 70 हज़ार करोड़ रुपये जारी करने की बात कही है।
 
वहीं मोदी सरकार विनिवेश के ज़रिए भी अर्थव्‍यवस्‍था को गति देने की कोशिश में जुटी हुई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आम बजट में सरकार ने चालू वित्तवर्ष में विनिवेश से क़रीब 1.05 लाख करोड़ रुपये की राशि हासिल करने का लक्ष्य रखा था। इसी के तहत हाल ही में सरकार ने बीपीसीएल समेत 5 सरकारी कम्पनियों में हिस्सेदारी बेचने को मन्ज़ूरी दे दी है। इसके अलावा मोदी सरकार कई अन्य सरकारी कम्पनियों में अपनी हिस्‍सेदारी कम करने वाली है।
 
ऐसा नहीं है कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती से सिर्फ़ भारत की अर्थव्यवस्था ही प्रभावित है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक़, दुनिया की 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाओं को आर्थिक सुस्ती ने प्रभावित किया है। लेकिन भारत और ब्राज़ील जैसे तेज़ी से विकसित होती अर्थव्यस्थाओं पर आर्थिक सुस्ती का ज़्यादा असर पड़ा है। आर्थिक सुस्ती से मुक़ाबला करने और इससे पार पाने के लिए मोदी सरकार ने अपने स्तर पर कई उपाय किये हैं और कर रही है। लेकिन अब देखना होगा कि इन उपायों से देश की अर्थव्यवस्था को एक बार फ़िर से गति पकड़ने में कितना समय लगेगा।